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Ujjain: मां-बेटी की गला घोंटकर हत्या करने वाले दोषी को आजीवन कैद, मारने के बाद नहर में फेंक दिए थे शव

Sun, 10 Mar 2024 11:08 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, उज्जैन
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, उज्जैन Published by: दिनेश शर्मा Updated Sun, 10 Mar 2024 11:08 PM IST
सार

उज्जैन कोर्ट ने करीब 6 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में फैसला सुनाया है। आऱोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा दी है। आरोपी की कॉल डिटेल और अपराध की स्वीकारोक्ति को आधार मान कर फैसला सुनाया गया है। 

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Ujjain: Life imprisonment for the accused who strangled mother and daughter to death
दोहरे हत्याकांड के दोषी को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा दी है। - फोटो : file photo

विस्तार

मां-बेटी की गला घोंटकर हत्या करने वाले आरोपित को कोर्ट ने दोषी करार देकर आजीवन कैद की सजा सुनाई है। इन्होंने हत्या के बाद दोनों शवों को साहेबखेड़ी नहर में फेंक दिया था। कॉल डिटेल व मोबाइल लोकेशन व परिस्थितजन्य साक्ष्यों के अलावा आरोपियों के इकबाले जुर्म के आधार पर सजा सुनाई गई है।
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जिला अभियोजन अधिकारी राजेन्द्र खाण्डेगर ने बताया कि ग्राम रलायता भोजा निवासी सुभाष की छोटी बहन शांताबाई अपनी पुत्री निशा के साथ 26 दिसंबर 2017 को बैंक में रुपये निकालने के लिए गई थी। देर शाम तक वापस नहीं लौटने पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की थी। 1 जनवरी 2018 को मां-बेटी के शव साहेबखेड़ी नहर में मिले थे। पीएम रिपोर्ट में पता चला था कि मां-बेटी की गला घोंटकर हत्या की गई है। पुलिस को जांच में पता चला था कि शांताबाई का करीब छह साल पूर्व विवाह हुआ था। उसकी एक पुत्री थी। शादी के कुछ समय बाद उसके पति की मौत हो गई थी। इस कारण वह अपने मायके रलायता भोजा में रह रही थी। मृतका मजदूरी करने के लिए मेहबूब पुत्र अजीज (30) निवासी ग्राम कालियादेह के यहां जाती थी। इस कारण उससे अवैध संबंध हो गए थे। 
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महिला मेहबूब के साथ रहना चाहती थी। 26 दिसंबर 2017 को मृतका ने दोपहर करीब दो से तीन बजे के बीच मेहबूब को फोन कर कोयला फाटक बुलाया था। मेहबूब मारुति वैन लेकर गया था। कोयला फाटक चौराहे पर मेहबूब ने शांताबाई व उसकी पुत्री निशा को कार में बैठा लिया था। मेहबूब व शांताबाई के बीच विवाद होने पर उसने गला घोंटकर शांताबाई की हत्या कर दी थी। पुत्री ने निशा ने शोर मचाया तो मेहबूब ने उसका भी गला घोंट दिया था। इसके बाद साहेबखेड़ी नहर में मां-बेटी के शव फेक दिए थे। पुलिस ने मृतका के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली तो मेहबूब से बात करना सामने आया था। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की गई थी। उसकी निशानदेही पर नहर के किनारे से मृतका के कागजात बरामद किए गए थे। मृतका शांताबाई एवं निशा तथा आरोपी मेहबूब को अंतिम बार साथ देखने वाले गवाह शकील के न्यायालय में धारा 164 के तहत कथन करवाए गए थे। मेहबूब ने भी धारा 164 के तहत कोर्ट में दिए बयान में मेहबूब ने मृतका शांताबाई व निशा की गला दबाकर हत्या करने की बात कबूल की थी। इसके आधार पर कोर्ट ने मेहबूब को आजीवन कैद की सजा सुनाई है। प्रकरण में अभियोजन का संचालन एडीपीओ ईश्वर सिंह केलकर एवं नितेश कृष्णन ने किया।
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