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श्री चोर गणेश: उज्जैन के इसी मंदिर में कामयाबी की कामना कर चोरी करने जाते थे चोर, यहीं होता था माल का बंटवारा

Wed, 20 Sep 2023 04:57 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 20 Sep 2023 04:57 PM IST
सार

स्कंद पुराण के अवंतिका खंड में 'चोर गणेश' का उल्लेख है। वैसे मंदिर में स्थापित श्री गणेश का वास्तविक नाम दुर्मुख गणेश है, लेकिन इन्हें 'चोर गणेश' के नाम से जाना जाता है। 

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Shri Chor Ganesh: Thieves used to go to steal in this temple of Ujjain wishing for success
उज्जैन स्थित श्री चोर गणपति मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश भर मे अनेक नाम से गणेश मंदिर हैं, लेकिन उज्जैन में जिस नाम से उनका एक मंदिर है वह शायद पूरे देश में इकलौता मंदिर है। क्योंकि इस मंदिर को चोर गणेश मंदिर के नाम से ही जाना जाता है।
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उज्जैन के पुराने शहर में स्थित यह मंदिर सिंहस्थ मेला क्षेत्र में रामजनार्दन मंदिर मार्ग पर है। भगवान 'चोर गणेश' के इस मंदिर मैं यहां आम दिनों के अलावा गणेश उत्सव पर्व पर भक्तों की भारी भीड़ लगती है। मंदिर को लेकर लोगों में विशेष आस्था है। स्कंद पुराण के अवंतिका खंड में 'चोर गणेश' का उल्लेख है। वैसे मंदिर में स्थापित श्री गणेश का वास्तविक नाम दुर्मुख गणेश है, लेकिन इन्हें 'चोर गणेश' के नाम से जाना जाता है। 
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दो मान्यताएं
मंदिर को लेकर दो अलग-अलग किंवदंतिया हैं। पहली किंवदंती के अनुसार, अगर भगवान गणेश के किसी भक्त की कोई चीज गुम हो जाती है या चोरी हो जाती है तो भगवान 'चोर गणेश' के मंदिर में आकर अर्जी लगाने से भक्त की चोरी गई या खोई हुई वस्तु मिल जाती है। श्रद्धालु अपनी चोरी गई या गुम हो गई कीमती वस्तु को पाने के लिए भगवान 'चोर गणेश' के दरबार में अर्जी लगाने आते हैं। दूसरी किंवदंती के अनुसार पुराने समय में जब यह मंदिर एकांत में हुआ करता था, तब चोर चोरी करने के बाद माल का बंटवारा इस मंदिर में आकर करते थे। बंटवारे में चोरी का जो माल आखिर में बच जाता था, वह भगवान गणेश को अर्पित कर चोर चले जाते थे। तभी से भगवान गणेश के इस मंदिर का नाम 'चोर गणेश' पड़ गया। 
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सूंड बाएं हाथ की ओर
कहा जाता है चोर चोरी करने से पहले गणेशजी से कामयाबी की प्रार्थना कर जाते थे कि हम जब लौटकर आएंगे, तो उसमें से आपका हिस्सा जरूर देंगे। इस मंदिर के भगवान गणेश की मूर्ति भी खास है, क्योंकि मूर्ति की सूंड बाएं हाथ की ओर उठी हुई है। यह स्थान शहर के षड्विनायक मंदिरों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से जो भी भक्त प्रार्थना करता है उसकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होती है। (रिपोर्टः उज्जैन से नीलेश नागर)
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