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श्रावण महोत्सव 2023: आयोजन की पांचवीं संध्या में गायन-वादन-नृत्य की प्रस्तुतियों ने मोहा, दर्शक हुए भावविभोर
Sun, 06 Aug 2023 04:58 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 06 Aug 2023 04:58 PM IST
सार
अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव "शिव संभवम" की पांचवीं संध्या भी शानदार रही। इसमें गायन, वादन, नृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
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श्रावण महोत्सव की दूसरी प्रस्तुति पं. प्रवीण कुमार आर्य द्वारा निर्देशित पखावज त्रिवेणी की हुई।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के आयोजन 18 अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव "शिव संभवम" की पांचवीं संध्या भी शानदार रही। इसमें गायन, वादन, नृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। आयोजन स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
पहली प्रस्तुति फरीदाबाद की पद्मश्री सुमित्रा गुहा के शास्त्रीय गायन की हुई। गुहा ने अपने शास्त्रीय गायन में राग जोग विलंबित एक ताल में स्वरचित बंदिश महादेव भज रे.. से प्रस्तुति का आरंभ किया। इसी राग में तीनताल की परंपरागत बंदिश साजन मोरा घर आयो... व एकताल द्रुतलय में स्वरचित बंदिश सुर-नर मुनिजन... की प्रस्तुति दी। उसके पश्यात राग देश एवं राग मिया-मल्हार में सावन के गीत सावन की ऋतु आयी सखी री... की प्रस्तुति दी। पद्मश्री सुमित्रा गुहा ने प्रस्तुति का समापन राग भूपाली ताल कहरवा में शिव भजन हर-हर-हर शंभो नमामि शंकर से किया। आपके साथ तबला संगत अनूप घोष, हारमोनियम संगत दीपक खसरावल, तानपुरा संगत श्रुति श्रीवास्तव ने की।
श्रावण महोत्सव की दूसरी प्रस्तुति पं. प्रवीण कुमार आर्य द्वारा निर्देशित पखावज त्रिवेणी की हुई। इसमें पं. आर्य के साथ पखावज पर संगत की ऐश्वर्य आर्य व शिष्य छवि जोशी ने की। कार्यक्रम का आरंभ आपके गुरु द्वारा रचित द्वादश ज्योर्तिलिंग परण से किया गया। श्रावण महोत्सव 2023 "शिव संभवम" की पंचम संध्या की अंतिम प्रस्तुति उज्जैन की कथक नृत्यांगना माधुरी कोडपे की हुई। माधुरी कोडपे ने अपनी कथक नृत्य प्रस्तुति का प्रारंभ एक ताल में निबद्ध आदि देव-महादेव हे दयानिधे... से किया। तत्पश्चात शुद्ध कथक में ताल-धमार में उठान, ठाठ, आमद, चक्रदार तोडे, चक्रदार परण, परमेलु, गत निकास आदि का अद्भूत समावेश किया। साथ ही शिव कवित्त एवं जुगलबंदी की शानदार प्रस्तुति दी | कोडपे ने प्रस्तुति समापन मराठी भाषा में देवदत्त भिगारकर द्वारा रचित अभंग माझे विठ्ठल-रखुमाई कर कटेवरी उभे विटेवरी वास पंढरपुरी... से किया। आपके साथ साथी कलाकार के रूप में हारमोनियम संगत पर नृत्य गुरु डॉ. हरिहरेश्वर पोद्दार, तबला संगत पर भरत बरोट, पखावाज संगत पर प्रखर विजयवर्गीय, सितार संगत पर दीलिप फडके, सारंगी पर जगदीश बरोट, पढंत पर राहुल बने व गायन में निलेश मनोहर व विशाल वाकणकर ने संगत की।
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कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि संत श्री राम शरण दास रामानंद अखाड़ा, अंकपात उज्जैन, कलावती यादव, अध्यक्ष (सभापति) नगर पालिक निगम, उज्जैन, श्याम बंसल अध्यक्ष उज्जैन विकास प्राधिकरण, आयोजक समिति व कलाकारों द्वारा श्री महाकालेश्वर भगवान के समक्ष दीप-प्रज्जवलन कर किया गया। इस दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबन्ध समिति द्वारा संचालित श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के बटुकों द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया। दीपप्रज्वलन के उपरांत गणमान्य अतिथियों का मंदिर प्रबंध समिति सदस्य श्री राम पुजारी द्वारा सम्मान किया गया। गणमान्य अतिथियों द्वारा प्रस्तुति हेतु पधारे कलाकारों का सम्मान किया गया। मंच संचालन दीपक कोडापे द्वारा किया गया। आभार सहायक प्रशासनिक अधिकारी आरके तिवारी ने माना।
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पहली प्रस्तुति फरीदाबाद की पद्मश्री सुमित्रा गुहा के शास्त्रीय गायन की हुई। गुहा ने अपने शास्त्रीय गायन में राग जोग विलंबित एक ताल में स्वरचित बंदिश महादेव भज रे.. से प्रस्तुति का आरंभ किया। इसी राग में तीनताल की परंपरागत बंदिश साजन मोरा घर आयो... व एकताल द्रुतलय में स्वरचित बंदिश सुर-नर मुनिजन... की प्रस्तुति दी। उसके पश्यात राग देश एवं राग मिया-मल्हार में सावन के गीत सावन की ऋतु आयी सखी री... की प्रस्तुति दी। पद्मश्री सुमित्रा गुहा ने प्रस्तुति का समापन राग भूपाली ताल कहरवा में शिव भजन हर-हर-हर शंभो नमामि शंकर से किया। आपके साथ तबला संगत अनूप घोष, हारमोनियम संगत दीपक खसरावल, तानपुरा संगत श्रुति श्रीवास्तव ने की।
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श्रावण महोत्सव की दूसरी प्रस्तुति पं. प्रवीण कुमार आर्य द्वारा निर्देशित पखावज त्रिवेणी की हुई। इसमें पं. आर्य के साथ पखावज पर संगत की ऐश्वर्य आर्य व शिष्य छवि जोशी ने की। कार्यक्रम का आरंभ आपके गुरु द्वारा रचित द्वादश ज्योर्तिलिंग परण से किया गया। श्रावण महोत्सव 2023 "शिव संभवम" की पंचम संध्या की अंतिम प्रस्तुति उज्जैन की कथक नृत्यांगना माधुरी कोडपे की हुई। माधुरी कोडपे ने अपनी कथक नृत्य प्रस्तुति का प्रारंभ एक ताल में निबद्ध आदि देव-महादेव हे दयानिधे... से किया। तत्पश्चात शुद्ध कथक में ताल-धमार में उठान, ठाठ, आमद, चक्रदार तोडे, चक्रदार परण, परमेलु, गत निकास आदि का अद्भूत समावेश किया। साथ ही शिव कवित्त एवं जुगलबंदी की शानदार प्रस्तुति दी | कोडपे ने प्रस्तुति समापन मराठी भाषा में देवदत्त भिगारकर द्वारा रचित अभंग माझे विठ्ठल-रखुमाई कर कटेवरी उभे विटेवरी वास पंढरपुरी... से किया। आपके साथ साथी कलाकार के रूप में हारमोनियम संगत पर नृत्य गुरु डॉ. हरिहरेश्वर पोद्दार, तबला संगत पर भरत बरोट, पखावाज संगत पर प्रखर विजयवर्गीय, सितार संगत पर दीलिप फडके, सारंगी पर जगदीश बरोट, पढंत पर राहुल बने व गायन में निलेश मनोहर व विशाल वाकणकर ने संगत की।
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कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि संत श्री राम शरण दास रामानंद अखाड़ा, अंकपात उज्जैन, कलावती यादव, अध्यक्ष (सभापति) नगर पालिक निगम, उज्जैन, श्याम बंसल अध्यक्ष उज्जैन विकास प्राधिकरण, आयोजक समिति व कलाकारों द्वारा श्री महाकालेश्वर भगवान के समक्ष दीप-प्रज्जवलन कर किया गया। इस दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबन्ध समिति द्वारा संचालित श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के बटुकों द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया। दीपप्रज्वलन के उपरांत गणमान्य अतिथियों का मंदिर प्रबंध समिति सदस्य श्री राम पुजारी द्वारा सम्मान किया गया। गणमान्य अतिथियों द्वारा प्रस्तुति हेतु पधारे कलाकारों का सम्मान किया गया। मंच संचालन दीपक कोडापे द्वारा किया गया। आभार सहायक प्रशासनिक अधिकारी आरके तिवारी ने माना।
