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Sahastra Chandi Navkundiya Yagya: उज्जैन में हो रहा अति दुर्लभ नवकुंडीय यज्ञ, 5 लाख से अधिक आहुतियां दी जाएंगी
Tue, 09 Jan 2024 07:41 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 09 Jan 2024 07:41 PM IST
सार
उज्जैन में अति दुर्लभ सहस्त्र चंडी नवकुंडीय यज्ञ हो रहा है। इस यज्ञ को 80 ब्राह्मण कर रहे हैं। इसमें पांच लाख से अधिक आहुतियां दी जाएंगी।
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नवकुंडीय यज्ञ शुरू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उज्जैन के राम जानकी मंदिर खाकी अखाड़ा मंगलनाथ रोड खाक चौक पर आयोजित सहस्त्र चंडी नवकुंडीय यज्ञ में नौ दिन में दुर्गा सप्तशती के 1000 पाठ होंगे। यहां 80 ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ किया जा रहा है, जिसमें पांच लाख से अधिक आहुतियां डाली जाएंगी।
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ज्योतिषाचार्य पंडित चंदन श्यामनारायण व्यास ने बताया कि सहस्त्र चंडी यज्ञ का विशेष महत्व है। वहीं यज्ञ शाला की परिक्रमा का भी विशेष महत्व है। दूर-दूर से लोग यज्ञ दर्शन एवं यज्ञशाला की परिक्रमा करने हेतु आ रहे हैं। यज्ञशाला की परिक्रमा करने से अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है। खाकी अखाड़े के श्रीमहंत अर्जुन दास महाराज ने बताया कि ‘गुरू पंचामृत द्वादश पुष्प अमृत महोत्सव में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ, श्रीरामार्चन महायज्ञ (पूजन), सहस्त्रचंडी नवकुंडीय महायज्ञ, नवकुंडात्मक नवदिवसीय सहस्त्रचंडी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।
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महंत अर्जुनदास खाकी गुरु रामदुलारेदासबमहाराज, अखिल भारतीय पंच रामानंदीय खाकी अखाड़ा, उज्जैन बैठक, श्रीराम जानकी मंदिर खाकी अखाड़ा मंगलनाथ रोड खाक चौक उज्जैन, लंबे हनुमान मंदिर गिरनार तलेटी जूनागढ़ गुजराती द्वारा आयोजित इस महोत्सव में यज्ञ किया जा रहा है।
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श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा का भी हो रहा आयोजन
महोत्सव में चल रही श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा में आचार्य डॉ. रामानंद दास महाराज ने भगवान कपिल द्वारा मां को दिए उपदेश की कथा सुनाई। कथा के चतुर्थ दिवस पुरेजनोपाख्यान, प्रियव्रत, जड़भरत अजामिल एवं प्रहलाद चरित्र भी समझाया। महाराज ने कहा कि जो जिस चीज का अधिकारी नहीं है, उसे नहीं देना चाहिए, जिसे जिसकी समझ नहीं उसे वो दोगे तो वह उसका दुरुपयोग करेगा या उपयोग नहीं करेगा। संसार के सभी प्राणी मनु की संतान हैं, इसलिए हम सब मनुष्य हैं। मनु लिखने के बाद ही मनुष्य बनेगा या मानव बनेगा। शरीर भगवान ने कृपा कर दिया है तो भजन करें, परिवार समाज के लिए उपयोग करें, इसका नाश होना ही है, इसे दिन रात सजाकर सहेजकर रखना व्यर्थ है।
