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Ujjain news: हे भोलेनाथ! जिसे मोदी ने कहा अलौकिक,उस महाकाल लोक को देखने आई भीड़ तो अफसरों ने डाल दिए ताले

Mon, 10 Apr 2023 08:36 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Mon, 10 Apr 2023 08:36 PM IST
सार

पुणे से  मां को डॉ. सुनीता अरसू उज्जैन लेकर आई है। उन्होंने महाकाल मंदिर के दर्शन कर लिए, लेकिन महाकाल लोक की तरफ जाने  नहीं दिया। सुनीता कहती है मां की ख्वाईश थी महाकाल लोक देखने की, लेकिन मुझे अफसोस रहेगा कि उन्हें मैं महाकाल लोक नहीं दिखा पाई।
 

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O Bholenath! When the crowd came to see the Mahakal Lok, which Modi called supernatural, the officers put lock
महाकाल काॅरिडोर का रास्ता सूना है इन दिनों। - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

३५० करोड़ के महाकाल लोक की व्यवस्था ने भीड़ के आगे घुटने टेक दिये। गुड फ्राइडे, राम नवमी, विकेंड की छुट्टियां प्लान कर देशभर के कई हिस्सों से पर्यटक उज्जैन पहुंच रहे है, लेकिन उन्हे महाकाल लोक के बजाए गेट पर बड़ा ताला देखने को मिल रहा है। जिस महाकाल लोक को लोकार्पण के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलौकिक बताया। देशवासियों से उसे देखने का आग्रह किया अौर जब भीड़ जुटी तो अफसरों ने उसी लोक पर ताले डाल दिए। वजह बताई जा रही है कि उज्जैन में प्रदीप मिश्रा की कथा चल रही है, इसलिए लोक में लोग नहीं घुम सकते है।

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मां को महाकाल लोक नहीं दिखा पाने का अफसोस रहेगा
पुणे से अपनी मां को डॉ. सुनीता अरसू उज्जैन लेकर आई है। उन्होंने महाकाल मंदिर के दर्शन तो कर लिए, लेकिन महाकाल लोक की तरफ सुरक्षागार्डों ने जाने नहीं दिया। सुनीता कहती है मां की ख्वाईश थी महाकाल लोक देखने की, लेकिन मुझे अफसोस रहेगा कि उन्हें मैं महाकाल लोक नहीं दिखा पाई।
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पहले पता होता तो नहीं बनाते उज्जैन का टूर
नासिक से आए केतन लुंकड़ ने कहा कि मैं ग्रुप के साथ आया हुं। उसमें बच्चे भी है। हमने सोचा था कि दिनभर उज्जैन घुमेंगे और रात को महाकाल लोक को निहारेंगे। सुना है कि रात को बहुत सुंदर नजर आता है, लेकिन उसे देखने का हमें शायद ही मौका मिले। ११ अप्रैल तक उसे बंद रखा गया है। हमें पहले पता होता तो फिर उज्जैन का टूर बाद में प्लान करते।

जिनकी वजह से रोक, उन्होंने कथा में कहा मंदिर से लोगों को मत भगाओ
प्रदीप मिश्रा ने उज्जैन में कथा के दौरान मंदिर की व्यवस्था पर कटाक्ष किया और कहा कि भक्तों को महाकाल के दर्शन जरुर करने दे, उन्हें धक्का न मारे। महाकाल सब देख रहे है। उल्लेखनीय है कि प्रदीप मिश्रा की कथा का हवाला देकर ही मंदिर प्रशासन ने महाकाल लोक और मंदिर की दर्शन व्यवस्था बदली है।

दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा महाकाल दर्शन के लिए
उज्जैन में चल रही प्रदीप मिश्रा की कथा की वजह से मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था में भी बदलाव किया। इस कारण भक्तों को दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। चारधाम मंदिर के सामने से भक्तों को प्रवेश दिया जा रहा है। विक्रम टीले के पास बेरिकेड लगा कर भक्तों को रोका जा रहा है। दो दिन से शीघ्र दर्शन व्यवस्था की ऑफ लाइन दर्शन व्यवस्था भी बंद कर दी गई। इससे भी भक्त परेशान नजर आए।

लोकार्पण के समय दावा- ३० हजार लोग एक बार में देख सकते है महाकाल लोक
जब महाकाल लोक का लोकार्पण हुआ था तो अफसरों ने दावा किया था कि महाकाल लोक के आगम और निर्गम के गेट बड़े और ज्यादा गेट होने के कारण एक बार में ३० हजार से ज्यादा लोग महाकाल लोक दर्शन कर सकते है। शुरूआत में एक लाख से ज्यादा लोग उज्जैन में महाकाल लोक देखने आए थे, लेकिन अब अफसर प्रवेश बंद कर लोगों को निराश कर रहे है।

पुलिस प्रशासन ने योजना बनाई

महाकाल लोक में लोगों को नहीं जाने देने के मुद्दे पर मंदिर प्रशासक संदीप सोनी से सीधी बात की। उन्होंने यह जवाब दिए।
-मंदिर की दर्शन व्यवस्था क्यों बदली?
-४ अप्रैल से प्रदीप मिश्रा की कथा प्रारंभ हुई है। उसमें बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद जताई गई थी। पुलिस प्रशासन ने योजना बनाई थी कि लोगों को लाइन में ही लेकर आए और लाइन के द्वारा ही दर्शन के बाद मंदिर के बाहर भेजे, ताकि समस्या का सामना नहीं करना पड़े।



नई व्यवस्था और भक्तों के लिए परेशानी भरी साबित हो रही। उन्हें ज्यादा चलना पड़ रहा है।

-हमने दर्शन के लिए एक मार्ग बनाया गया। जो चारधाम से शुरु होता है। यहां से रुद्र सागर, त्रिवेणी,महाकाल लोक, मानसरोवर से मंदिर के दर्शन कराए जा रहे है। इस रुट पर टेंट, सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है। लोग ३० से ३५ मिनट में मंदिर के दर्शन कर पा रहे है।

महाकाल लोक क्यों बंद किया गया?

इस व्यवस्था में लोग त्रिवेणी के बाद महाकाल लोक से ही मंदिर में आ रहे है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि महाकाल लोक बंद है। बस भक्त कतार तोड़कर इधर-उधर नहीं जा सकते है।

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