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Ujjain News: 14 तक ही बजेगी शादी की शहनाई, फिर होगी मलमास की शुरूआत, नहीं होंगे मांगलिक कार्य
Thu, 05 Dec 2024 10:51 AM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2024 10:51 AM IST
सार
मलमास की शुरुआत साल 2024 के आखिरी महीने 15 दिसंबर को हो रही है। यह मास 14 जनवरी 2025 को समाप्त होगा। सूर्य के धनु राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करने पर मलमास का समापन होगा।
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बस अब 15 तक सुनाई देगी शादी की शहनाई और फिर शुरू हो जाएगा मलमास
विस्तार
मलमास को अशुभ और अशुद्ध महीना माना जाता है। इस दौरान विवाह आदि जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। सूर्य द्वारा बृहस्पति की राशि धनु या मीन राशि में प्रवेश करने पर मलमास या खरमास लगता है। 15 दिसंबर से मलमास की शुरुआत होगी।
श्री मातंगी ज्योतिष केंद्र के ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्ण शंकर व्यास के अनुसार मलमास की शुरुआत साल 2024 के आखिरी महीने 15 दिसंबर को हो रही है। यह मास 14 जनवरी 2025 को समाप्त होगा। सूर्य द्वारा धनु राशि से निकलकर जब दूसरी राशि में प्रवेश किया जाएगा, तब मलमास समाप्त हो जाएगा।
ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्ण शंकर व्यास ने बताया कि मलमास में नया घर खरीदना या गृह प्रवेश करना मना है। नए व्यापार की शुरुआत न करें। शादी, मुंडन, जनेऊ, सगाई आदि कार्य भी नहीं किए जाते। 16 संस्कारों वाले कार्य करने की मनाही होती है।
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मलमास के दौरान क्या करना चाहिए?
ज्योतिर्विद पं. अजय व्यास के अनुसार मलमास में प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करें। पक्षियों और पशुओं की सेवा करें। भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा करें। जप, तप और दान का भी खास महत्व है। गंगा या अन्य पवित्र नदी में स्नान करना जरूरी है। मलमास के गुरुवार को केले का दान करें।
साल में दो बार आता है मलमास
पं. अजय व्यास के अनुसार मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सूर्य अपने सात घोड़ों के रथ पर बैठकर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। इस परिक्रमा के दौरान सूर्य का रथ एक क्षण के लिए भी नहीं रुकता। लेकिन निरंतर चलते रहने और सूर्य की गर्मी से घोड़े प्यास और थकान से व्याकुल हो जाते हैं। घोड़ों की इस दयनीय दशा को देखकर सूर्य देव उन्हें विश्राम देने और उनकी प्यास बुझाने के लिए रथ रुकवाने का विचार करते हैं।
लेकिन, उन्हें अपनी प्रतिज्ञा का स्मरण हो आता है कि वे अपनी इस अनवरत चलने वाली यात्रा में कभी विश्राम नहीं करेंगे। विचार करते हुए सूर्य देव का रथ आगे बढ़ रहा था। तभी सूर्य को एक तालाब के पास दो खर (गधे) दिखाई दिए। उनके मन में विचार आया कि जब तक उनके रथ के घोड़े पानी पीकर विश्राम करते हैं, तब तक इन दोनों खरों को रथ में जोतकर यात्रा जारी रखी जाए। सूर्य के आदेश पर उनके सारथि अरुण ने खरों को रथ में जोत दिया। खर अपनी मंद गति से सूर्य के रथ को लेकर परिक्रमा पथ पर आगे बढ़ गए।
पं. व्यास ने बताया कि मंद गति से रथ चलने के कारण सूर्य का तेज भी मंद होने लगा। सूर्य के रथ को खरों द्वारा खींचने के कारण ही इसे खरमास कहा गया। खरमास साल में दो बार आता है। एक, जब सूर्य धनु राशि में होता है और दूसरा, जब सूर्य मीन राशि में होता है। इस दौरान सूर्य का पूरा प्रभाव यानी तेज पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध पर नहीं पड़ता। सूर्य की इस कमजोर स्थिति के कारण ही पृथ्वी पर गृह-प्रवेश, नया घर बनाने, नया वाहन, मुंडन, विवाह आदि मांगलिक और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। किसी नए कार्य की शुरुआत नहीं की जाती।
खरमास और मलमास में अंतर
इस मास में सूर्य और बृहस्पति की आराधना विशेष फलदायी होती है। गरुड़ पुराण के अनुसार खरमास में प्राण त्यागने पर सद्गति नहीं मिलती। इसलिए महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह ने अपने प्राण खरमास में नहीं त्यागे थे। उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था। ध्यान देने की बात है कि खरमास और मलमास में अंतर है। सूर्य के धनु और मीन राशि में आने पर खरमास होता है, और यह साल में दो बार आता है।
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श्री मातंगी ज्योतिष केंद्र के ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्ण शंकर व्यास के अनुसार मलमास की शुरुआत साल 2024 के आखिरी महीने 15 दिसंबर को हो रही है। यह मास 14 जनवरी 2025 को समाप्त होगा। सूर्य द्वारा धनु राशि से निकलकर जब दूसरी राशि में प्रवेश किया जाएगा, तब मलमास समाप्त हो जाएगा।
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ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्ण शंकर व्यास ने बताया कि मलमास में नया घर खरीदना या गृह प्रवेश करना मना है। नए व्यापार की शुरुआत न करें। शादी, मुंडन, जनेऊ, सगाई आदि कार्य भी नहीं किए जाते। 16 संस्कारों वाले कार्य करने की मनाही होती है।
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मलमास के दौरान क्या करना चाहिए?
ज्योतिर्विद पं. अजय व्यास के अनुसार मलमास में प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करें। पक्षियों और पशुओं की सेवा करें। भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा करें। जप, तप और दान का भी खास महत्व है। गंगा या अन्य पवित्र नदी में स्नान करना जरूरी है। मलमास के गुरुवार को केले का दान करें।
साल में दो बार आता है मलमास
पं. अजय व्यास के अनुसार मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सूर्य अपने सात घोड़ों के रथ पर बैठकर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। इस परिक्रमा के दौरान सूर्य का रथ एक क्षण के लिए भी नहीं रुकता। लेकिन निरंतर चलते रहने और सूर्य की गर्मी से घोड़े प्यास और थकान से व्याकुल हो जाते हैं। घोड़ों की इस दयनीय दशा को देखकर सूर्य देव उन्हें विश्राम देने और उनकी प्यास बुझाने के लिए रथ रुकवाने का विचार करते हैं।
लेकिन, उन्हें अपनी प्रतिज्ञा का स्मरण हो आता है कि वे अपनी इस अनवरत चलने वाली यात्रा में कभी विश्राम नहीं करेंगे। विचार करते हुए सूर्य देव का रथ आगे बढ़ रहा था। तभी सूर्य को एक तालाब के पास दो खर (गधे) दिखाई दिए। उनके मन में विचार आया कि जब तक उनके रथ के घोड़े पानी पीकर विश्राम करते हैं, तब तक इन दोनों खरों को रथ में जोतकर यात्रा जारी रखी जाए। सूर्य के आदेश पर उनके सारथि अरुण ने खरों को रथ में जोत दिया। खर अपनी मंद गति से सूर्य के रथ को लेकर परिक्रमा पथ पर आगे बढ़ गए।
पं. व्यास ने बताया कि मंद गति से रथ चलने के कारण सूर्य का तेज भी मंद होने लगा। सूर्य के रथ को खरों द्वारा खींचने के कारण ही इसे खरमास कहा गया। खरमास साल में दो बार आता है। एक, जब सूर्य धनु राशि में होता है और दूसरा, जब सूर्य मीन राशि में होता है। इस दौरान सूर्य का पूरा प्रभाव यानी तेज पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध पर नहीं पड़ता। सूर्य की इस कमजोर स्थिति के कारण ही पृथ्वी पर गृह-प्रवेश, नया घर बनाने, नया वाहन, मुंडन, विवाह आदि मांगलिक और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। किसी नए कार्य की शुरुआत नहीं की जाती।
खरमास और मलमास में अंतर
इस मास में सूर्य और बृहस्पति की आराधना विशेष फलदायी होती है। गरुड़ पुराण के अनुसार खरमास में प्राण त्यागने पर सद्गति नहीं मिलती। इसलिए महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह ने अपने प्राण खरमास में नहीं त्यागे थे। उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था। ध्यान देने की बात है कि खरमास और मलमास में अंतर है। सूर्य के धनु और मीन राशि में आने पर खरमास होता है, और यह साल में दो बार आता है।

ज्योतिर्विद पं. अजय व्यास
