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MP News: उज्जैन में पकड़ाया BPL राशन कार्ड बनाने का फर्जीवाड़ा, तहसीलदार की सील-साइन भी नकली, होगी एफआईआर

Wed, 26 Apr 2023 06:57 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 26 Apr 2023 06:57 PM IST
सार

उज्जैन में फर्जी तरीके से बीपीएल राशन कार्ड बनाने का मामला सामने आया है। एसडीएम की जांच में मामले का खुलासा हुआ। अब जल्द ही दोषियों के खिलाफ पुलिस एफआईआर करवाई जाएगी। 

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MP News: Fraud of making BPL ration card caught in Ujjain, Tehsildar's seal-sign is also fake
उज्जैन के माकड़ोन में गलत तरीके से बीपीएल कार्ड बना दिए गए। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उज्जैन जिले के ग्राम माकड़ोन बीपीएल राशन कार्ड के नाम पर ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें इस पूरी प्रक्रिया का कहीं भी पालन नहीं किया गया। दो महीने में माकड़ोन तहसील के लगभग आधा दर्जन गांव के सैकड़ों लोगों के राशन कार्ड बना दिए गए। इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब हितग्राहियों की संख्या अचानक बढ़ने पर एसडीएम ने जांच करवाई। इसमें पता चला कि माकड़ोन तहसील के गांव में 2 माह में जो राशन कार्ड जारी किए गए हैंं, वे सभी फर्जी हैं क्योंकि इन राशन कार्ड पर लगी तहसीलदार की सील और हस्ताक्षर ही नकली हैं। 
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एसडीएम एकता जायसवाल ने बताया कि मुझे 20 अप्रैल को यह शिकायत मिली थी कि माकड़ोन तहसील के ग्राम खेड़ाचितावलिया, पचोला, गुंदलडिया, कतवारिया में मार्च और अप्रैल में सैकड़ों लोगों के बीपीएल राशन कार्ड बनाए गए हैं। एक माह में बीपीएल राशन कार्ड धारकों में सैकड़ों ग्रामवासियों की बढ़ोतरी होने पर जब मेरे द्वारा इस मामले में जांच की गई तो पता चला कि जो भी बीपीएल राशन कार्ड बनाए गए हैं उसमें शासन की प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया गया है। जिस पर मैंने इस पूरे मामले की सूक्ष्मता से जांच करने के निर्देश तहसीलदार अनिरुद्ध पाराशर को दिए थे। 
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इसमें इस बात का खुलासा हुआ कि मार्च 2023 और अप्रैल 2023 में जो बीपीएल कार्ड जारी हुए हैं, वे फर्जी है और इस पर तहसीलदार के हस्ताक्षर हैं वे फर्जी तरीके से बनाए गए हैं और सील भी नकली लगी हुई है। बताया जाता है कि अब इस पूरे मामले मे हुए फर्जीवाड़े में जल्द ही पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी और यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि आखिर बीपीएल राशन कार्ड का यह फर्जीवाड़ा कौन कर रहा था इसके पीछे कौन लोग हैं और उन्होंने यह फर्जी बीपीएल राशन कार्ड बनाने के नाम पर कितने लोगों को ठगकर उनसे कितनी राशि वसूली।
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उज्जैन में फर्जी बीपीएल कार्ड बनाने का मामला सामने आया है। - फोटो : सोशल मीडिया

एक ही परिवार में बन गए तीन लोगों के राशन कार्ड
तहसीलदार अनिरुद्ध पाराशर ने अपनी जांच के दौरान पाया गया कि माकड़ोन तहसील के ग्राम खेड़ा चितावलिया, पचोला , गुंदलडिया , कतवारिया में मार्च और अप्रैल 2023 में सबसे अधिक बीपीएल राशन कार्ड बनाए गए, जिसमें सबसे अधिक बीपीएल गांव खेड़ाचितावलिया के मिले। ग्राम खेड़ा चिता बलिया की स्थिति यह थी कि यहां एक ही परिवार के तीन व्यक्तियों की बीपीएल राशन कार्ड बना दिए गए थे।

ऐसे पकड़ाया बीपीएल राशन कार्ड का फर्जीवाड़ा
बताया जाता है कि मार्च और अप्रैल में सैकड़ों की संख्या में बीपीएल राशन कार्ड धारकों की संख्या में हुई बढ़ोतरी को लेकर एसडीएम एकता जायसवाल ने तहसीलदार अनिरुद्ध पाराशर को जांच के लिए निर्देशित किया था। साथ ही उन्होंने जनपद पंचायत की बीपीएल शाखा में पदस्थ अमित दीक्षित से चर्चा भी की थी। इसमें पता चला कि बीपीएल राशन कार्ड बनाने में सबसे अधिक गड़बड़ी जनपद पंचायत में ही हुई है। बीपीएल के आदेशों की जांच की उसमें प्रथम दृष्टया उन्हें फर्जीवाड़े की शंका हुई। उनके द्वारा जनपद पंचायत की बीपीएल शाखा से रिकॉर्ड जब्त कर उसकी जांच की गई। जिसमें इस बात का खुलासा हुआ कि जनपद पंचायत सीईओ डॉली श्रीवास्तव को बीपीएल राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं थी इसीलिए जिस भी व्यक्ति ने उन्हें न्यायालय का एक आदेश बताते हुए आवेदन प्रस्तुत किए उन्होंने मार्क करके बीपीएल शाखा में भेज दिया गया था। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि दिए जा रहे आदेश फर्जी हैं इस पूरे फर्जीवाड़े पर एसडीएम एकता जायसवाल ने जनपद को निर्देशित किया एवं पत्र भी जारी किया कि कोई भी आदेश जो न्यायालय से जारी होता है, वह न्यायालय के आदेश से संबंधित को भेजा जाता है। प्रत्यक्ष रूप से इस प्रकार के आदेश प्राप्त कर उसे बीपीएल मान लेना एक गंभीर त्रुटि है। 

लोक सेवा में नहीं हुआ एक भी आवेदन
फर्जी बीपीएल राशन कार्ड के इस मामले में जांच के दौरान पता चला कि मार्च और अप्रैल में जो भी राशन कार्ड जारी किए गए उसमें एक भी मामला ऐसा नहीं था जिसका आवेदन लोक सेवा में लगाया गया हो। सभी ने तहसीलदार और पटवारी से रिपोर्ट बनवाने की बजाय सीधे जनपद में ही आवेदन कर दिए।

 
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