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MP News: आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने के नाम पर ठगे थे 25 लाख, पांच साल की सजा
Sat, 25 Feb 2023 04:24 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Sat, 25 Feb 2023 04:24 PM IST
सार
उज्जैन की स्थानीय कोर्ट ने एक ठग को पांच वर्ष की जेल और छह लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामला ऐसा है कि उसने आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपये ठगे थे।
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jail, jail demo
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
उज्जैन में आगर रोड पर स्थित आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई थी। इस मामले में कोर्ट ने प्रदीप कुमार पिता दीनानाथ प्रसाद कुर्मी, निवासी-इंडस सेटेलाइट ग्रीन बी-24, इंदौर और विशाल कुमार उर्फ विक्की पिता सुमन कुमार श्रीवास्तव, निवासी- वसुंधरा वैभव नगर रूम नंबर दो, फर्स्ट फ्लोर, कनाड़िया रोड, इंदौर को पांच-पांच वर्ष का सश्रम कारावास और छह लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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मामले की जानकारी देते हुए उप-संचालक अभियोजन डॉ. साकेत व्यास ने बताया कि मो. हाशिम की पुत्री सानिया को आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी हुई थी। उनकी पुत्री सानिया के मोबाइल पर राकेश नामक व्यक्ति का फोन आया था। उसने छात्रों से डोनेशन लेकर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिलवाने की बात कही। इस पर राकेश ने 25 लाख रुपये डोनेशन, 3.70 लाख रुपये एक साल की फीस और 50 हजार रुपये कॉशन मनी लगना बताया था। यह भी कहा था कि, उज्जैन के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज मे प्रवेश करवा देगा। राकेश के बुलाने पर मोहम्मद हाशिम अपने परिचित बद्रीलाल और अनिल कुमावत, इमदाद बेग के साथ एक अक्टूबर 2013 की सुबह 10.30 बजे आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। यहां आरोपी राकेश ने मो. हासिम को एक व्यक्ति से मिलवाया। वह उन्हें कॉलेज के अंदर ले गया और डॉ. अनिल जैन से मिलवाया। मोहम्मद हाशिम ने डॉ. जैन से एडमिशन का प्रूफ मांगा तो वह नहीं दे सका। एक व्यक्ति खुद को डॉक्टर का सहायक बताता था, उसने ही 25 लाख रुपये लिए थे। पैसे देने के बाद भी इनके बीच बातचीत होती रही। डॉ. अनिल जैन के कहने पर मोहम्मद हाशिम 12 अक्टूबर को 50 हजार रुपये की कॉशन मनी जमा कराने कॉलेज पहुंचा था। रसीद मांगने पर कॉलेज बंद होने का बहाना बना दिया गया। उनसे 16 अक्टूबर को इंटरव्यू के लिए आने को कहा गया। हाशिम ने पैसे वापस मांगे तो डॉ. महाड़िक से मिलाने की बात की गई। इसके बाद सबने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। मोहम्मद हाशिम ने एडमिशन पत्र को देखा तो पता चला कि वह फर्जी है। डायरेक्टर तक का नाम गलत लिखा है। चिमनगंज मंडी पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर चालान पेश किया था। मोहम्मद हाशिम और अन्य लोगों के बयानों से सहमत होकर न्यायालय ने आरोपियों को यह सजा सुनाई है।
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