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मकर संक्रांति: आने वाले वर्षों में 16-17 जनवरी को मनेगा पर्व, सूर्य की गति में अंतर से लगातार बदल रही तारीख
Mon, 15 Jan 2024 10:10 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, उज्जैन
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, उज्जैन
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 15 Jan 2024 10:10 PM IST
सार
सूर्य हर साल करीब 4 कला की देरी से मकर रेखा में आता है। साल दर साल ये 4-4 कला बढ़ती जाती है। यही कारण है कि मकर संक्रांति कुछ वर्षों से 14 की बजाय 15 जनवरी को मनाई जा रही है।
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Makar Sankranti
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मकर संक्रांति ही एकमात्र ऐसा त्योहार है जो कि सूर्य की गति के आधार पर पूरे देशभर में मनाया जाता है। इस गति में जब भी बढ़ोतरी होती है तो इसका असर पर्व मनाने की तारीख पर भी पड़ता है। पूर्व में जब स्वामी विवेकानंद जी का जन्म हुआ था मकर संक्रांति पर्व उस दिन कैलेंडर के अनुसार 12 जनवरी को था, लेकिन कुछ वर्षों में सूर्य की गति में बड़े अंतर के कारण अब यह पर्व 14-15 जनवरी को मनाया जाने लगा है। लेकिन आने वाले वर्षों में यह पर्व और भी आगे की तारीखों की और बढ़ेगा यानी कि कुछ वर्षों में मकर संक्रांति पर्व 16-17 जनवरी को मनाया जाएगा।
यह कहना है उज्जैन शासकीय वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त का। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति पर्व हमेशा ही सूर्य की गति के आधार पर मनाया जाता है। आपको याद होगा कि उत्तरायण और दक्षिणायण सूर्य की गति को दर्शाते हैं। 6 महीने सूर्य उत्तरायण और 6 महीने दक्षिणायण रहता है। 15 जनवरी से सूर्य के उत्तरायण होने की शुरुआत होती है। आपने बताया कि पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की गति में हर वर्ष 4 कला का अंतर रहता है। यह अंतर प्रतिवर्ष बढ़ता जाता है यही कारण है कि तिथि तो उसी दिन आती है, लेकिन मकर संक्रांति की तारीख में बदलाव हो जाता है। आपने बताया कि सूर्य हर साल करीब 4 कला की देरी से मकर रेखा में आता है। साल दर साल ये 4-4 कला बढ़ती जाती है। यही कारण है कि मकर संक्रांति कुछ वर्षों से 14 की बजाय 15 जनवरी को मनाई जा रही है। अगर इसी तरह ही साल दर साल कला बढ़ती रही तो भविष्य में मकर संक्रांति 16-17 जनवरी को मनाई जाने लगेगी।
पहले 12 जनवरी को आती थी मकर संक्रांति
शासकीय वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि पुराने समय मे 12 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाती थी। स्वामी विवेकानंद का जब जन्म हुआ था, उस दिन 12 जनवरी ही थी। लेकिन अब ये पर्व 14-15 जनवरी को आने लगा है। जिसकी तारीखों में अब धीरे-धीरे और भी बदलाव आएगा और यह पर्व आने वाले समय में 16-17 जनवरी को मनाया जाएगा।
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हर साल 4 मिनट का बढ़ता है अंतर
डॉ. राजेंद्र प्रसाद गुप्त ने बताया कि सूर्य के उत्तर की ओर आने का पर्व ही मकर संक्रांति कहलाता है। इस दौरान सूर्य कर्क से मकर रेखा की ओर बढ़ता है। चूंकि मकर संक्रांति पर्व सूर्य की गणना के अनुसार चलता है इसीलिए यह हमेशा निर्धारित दिनांक पर ही आता है लेकिन इसमें भी कई वर्षों में परिवर्तन जरूर आता है। आपने यह भी बताया कि पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की गति में प्रतिवर्ष 4 मिनट का अंतर बढ़ रहा है। यही कारण है कि पूर्व में यह त्यौहार 14 जनवरी को मनाया जाता था, जो कि वर्तमान में 15 जनवरी को मनाया जाने लगा है। जैसे-जैसे यह प्रतिवर्ष का 4 मिनट का अंतर बढ़ेगा वैसे ही मकर संक्रांति पर्व मनाने की तारीख आगे बढ़ती जाएगी।
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यह कहना है उज्जैन शासकीय वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त का। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति पर्व हमेशा ही सूर्य की गति के आधार पर मनाया जाता है। आपको याद होगा कि उत्तरायण और दक्षिणायण सूर्य की गति को दर्शाते हैं। 6 महीने सूर्य उत्तरायण और 6 महीने दक्षिणायण रहता है। 15 जनवरी से सूर्य के उत्तरायण होने की शुरुआत होती है। आपने बताया कि पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की गति में हर वर्ष 4 कला का अंतर रहता है। यह अंतर प्रतिवर्ष बढ़ता जाता है यही कारण है कि तिथि तो उसी दिन आती है, लेकिन मकर संक्रांति की तारीख में बदलाव हो जाता है। आपने बताया कि सूर्य हर साल करीब 4 कला की देरी से मकर रेखा में आता है। साल दर साल ये 4-4 कला बढ़ती जाती है। यही कारण है कि मकर संक्रांति कुछ वर्षों से 14 की बजाय 15 जनवरी को मनाई जा रही है। अगर इसी तरह ही साल दर साल कला बढ़ती रही तो भविष्य में मकर संक्रांति 16-17 जनवरी को मनाई जाने लगेगी।
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पहले 12 जनवरी को आती थी मकर संक्रांति
शासकीय वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि पुराने समय मे 12 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाती थी। स्वामी विवेकानंद का जब जन्म हुआ था, उस दिन 12 जनवरी ही थी। लेकिन अब ये पर्व 14-15 जनवरी को आने लगा है। जिसकी तारीखों में अब धीरे-धीरे और भी बदलाव आएगा और यह पर्व आने वाले समय में 16-17 जनवरी को मनाया जाएगा।
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हर साल 4 मिनट का बढ़ता है अंतर
डॉ. राजेंद्र प्रसाद गुप्त ने बताया कि सूर्य के उत्तर की ओर आने का पर्व ही मकर संक्रांति कहलाता है। इस दौरान सूर्य कर्क से मकर रेखा की ओर बढ़ता है। चूंकि मकर संक्रांति पर्व सूर्य की गणना के अनुसार चलता है इसीलिए यह हमेशा निर्धारित दिनांक पर ही आता है लेकिन इसमें भी कई वर्षों में परिवर्तन जरूर आता है। आपने यह भी बताया कि पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की गति में प्रतिवर्ष 4 मिनट का अंतर बढ़ रहा है। यही कारण है कि पूर्व में यह त्यौहार 14 जनवरी को मनाया जाता था, जो कि वर्तमान में 15 जनवरी को मनाया जाने लगा है। जैसे-जैसे यह प्रतिवर्ष का 4 मिनट का अंतर बढ़ेगा वैसे ही मकर संक्रांति पर्व मनाने की तारीख आगे बढ़ती जाएगी।
