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कारसेवकों की गुहार: बाबरी मस्जिद ढहाने में हमारा महत्वपूर्ण योगदान, मूर्ति स्थापना में हमें भी मौका मिले

Fri, 12 Jan 2024 10:42 AM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अरविंद कुमार Updated Fri, 12 Jan 2024 10:42 AM IST
सार

कारसेवकों ने सरकार से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि बाबरी मस्जिद ढहाने में हमारा महत्वपूर्ण योगदान था। रामलला मूर्ति स्थापना में हमें भी आने का मौका मिले।

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Karsevaks in Ujjain requested to go to the installation of Ramlala idol
कारसेवकों की सरकार से गुहार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साल 1992 में बाबरी मस्जिद को ढहाने में हमारा भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसलिए मूर्ति स्थापना में हमें भी मौका मिले। ऐसी ही गुहार मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के तराना में रहने वाले कारसेवकों ने सरकार से लगाई है।

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उनका कहना है कि छह दिसंबर 1992 को पूरे भारत से कारसेवक अयोध्या में स्थित बाबरी मस्जिद का ढांचा ढहाने पहुंचे थे। उस वक्त उज्जैन के तराना से हिन्दू सिंह गुर्जर, ईश्वर सिंह गुर्जर समेत 200 से अधिक लोगों ने कार सेवा में हिस्सा लिया था और बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराकर रामलला को सुरक्षित वहां से हटाकर समीप में स्थित नीम के पेड़ के नीचे स्थापित किया था। अब जब रामलला का भव्य मंदिर बन रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ 22 जनवरी को इसका उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर एक बार फिर तराना से सभी कारसेवक उदघाटन समारोह में हिस्सा लेने पहुंचेंगे। लेकिन उनकी मांग है कि उन्हें भी इस आयोजन में शामिल होने का मौका दिया जाए। 
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हिन्दू सिंह गुर्जर ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि दिसंबर 1992 को अयोध्या कार सेवक पहुंचे थे और लगातार 10 दिन वहां प्रवचन में हिस्सा लेकर सरयू नदी के किनारे बालू रेत लेकर रामलला के मंदिर पहुंचे थे और बाबरी मस्जिद की तीन दीवारों को फांदते हुए मुख्य द्वार तक पहुंचे थे। जहां रामलला विराजित थे। वहां पहुंचने पर गार्ड ने रामलला के बाबरी मस्जिद के मलबे में दब जाने की आशंका जताते हुए उनको वहां से बाहर निकालने के लिए कहा, तब हमने रामलला को वहां से सुरक्षित उठाकर समीप में स्थित नीम के पेड़ के नीचे स्थापित किया।
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इस दौरान रामलला के पास रखा हुआ कलश जिसमें से हमने पानी पीया। कारसेवक बाबरी मस्जिद के ढांचे पर पहुंचे और उसे ढहाया और इस दौरान मुझे और मेरे साथी को चोट आई और हमें फैजाबाद के अस्पताल में भर्ती करवाया गया  था। जहां हमारा इलाज किया गया। इसके बाद वहां के स्थानीय प्रशासन ने हमें फिर ढांचे के पास छोड़ दिया। रामलला का भव्य मंदिर अब बन गया है और जनवरी में इसका उद्घाटन किया जाना है। हम सभी कार सेवक एक बार पुनः रामलला के दर्शन के लिए अधिक से अधिक संख्या में वहां पहुंचेंगे।

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