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Navratri 2023: 24 देवियों में से एक हैं नगर कोट की महारानी, इनकी आराधना के बिना अधूरे हैं शक्तिधामों के दर्शन

Mon, 27 Mar 2023 08:37 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Mon, 27 Mar 2023 08:37 AM IST
सार

नौ मातिृकाओं में से 7वीं देवी नगर कोट की माता हैं। हालांकि यह मंदिर उज्जैन शहर की उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित है। इस मंदिर में एक जलकुंड है, जो कि परमारकालीन माना जाता है।

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History and Importance of Nagarkot Mata Temple Ujjain
नगरकोट की माता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सम्राट विक्रमादित्य के काल में उज्जैन के माता मंदिरों का विशेष महत्व रहा है। इन्हीं में से एक है नगर कोट माता का मंदिर। स्कंद पुराण के अवंतिका क्षेत्र महात्म्य में इसका उल्लेख मिलता है। स्कंद पुराण के अनुसार, 24 देवियों में से एक है नगर कोट माता का मंदिर। गोर्धन सागर के पास स्थित मंदिर में माता की मूर्ति भव्य और मनोहारी है।
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मंदिर में है परमारकालीन कुंड
स्कंद पुराण के अवंति खंड में वर्णित नौ मातिृकाओं में से 7वीं देवी नगर कोट की माता हैं। हालांकि यह मंदिर उज्जैन शहर की उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित है। इस मंदिर में एक जलकुंड है, जो कि परमारकालीन माना जाता है। मंदिर में एक अन्य गुप्त कालीन मंदिर भी है, जो कि शिवपुत्र कार्तिकेय का है। ऐसी मान्यता है कि उज्जैन में नवरात्रि में अन्य माता मंदिर के दर्शन नगरकोट की रानी माता के बगैर अधूरे माने जाते हैं। इस मंदिर मे प्रतिदिन श्रद्धालुओं का तांता लगता है। नवरात्र में यहां सुबह से लेकर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। 
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माता के दर्शन करने उमड़ रही भीड़
मंदिर में सुबह और शाम के समय भव्य आरती होती है, तो नगाड़ों, घंटियों की गूंज से वातावरण आच्छादित हो उठता है। माता के दर्शन करने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। माता के दर्शन से श्रद्धालु अभिभूत हो जाते हैं। 
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क्यों कहा जाता है नगरकोट माता
नगरकोट की रानी प्राचीन उज्जयिनी के दक्षिण-पश्चिम कोने की सुरक्षा देवी हैं। राजा विक्रमादित्य और राजा भर्तृहरि की अनेक कथाएं इस स्थान से जुड़ी हुई हैं। यह स्थान नाथ संप्रदाय की परंपरा से जुड़ा है। यह स्थान नगर के प्राचीन कच्चे परकोटे पर स्थित है। इसलिए इसे नगर कोट की रानी कहा जाता है।
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