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Hanuman Jayanti: प्रेत-बाधाओं से मुक्ति दिलाते हैं बाबा गुमानदेव हनुमान, आंगन में विराजित है अष्ट चिरंजीवी
Wed, 05 Apr 2023 05:09 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: अरविंद कुमार
Updated Wed, 05 Apr 2023 05:09 PM IST
सार
धार्मिक नगरी उज्जैन वैसे तो अनेक चमत्कारों से भरी नगरी है। यहां एक और बाबा महाकाल के सेनापति कालभैरव प्रतिदिन मदिरा पान करते हैं। वहीं बाबा महाकाल और मां हरसिद्धि के दरबार में होने वाले चमत्कारों से भी कोई अनभिज्ञ नहीं है।
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बाबा गुमानदेव हनुमान मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उज्जैन नगरी में एक हनुमान मंदिर ऐसा भी है, जहां पर भगवान के दर्शन और उनकी आरती में शामिल होने से ही प्रेत-बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है। यह अति प्राचीन मंदिर अत्यंत सिद्ध है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग हनुमान चालीसा का पाठ करने पहुंचते हैं और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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पिपलीनाका क्षेत्र में बाबा गुमानदेव हनुमान का ऐसा ही एक प्रसिद्ध मंदिर है, जो कि अतिप्राचीन और सिद्ध है। यहां भगवान के दर्शन पूजन करने से ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। मंदिर के पुजारी पंडित चंदन श्यामनारायण व्यास ने बताया कि बाबा गुमानदेव के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर अति प्राचीन है। हजारों वर्ष पूर्व मंदिर की खुदाई के समय मिले कुछ अवशेषों से इस बात की पुष्टि हुई थी कि यह मंदिर लगभग 4000 साल पुराना है। इस मंदिर का उल्लेख अवंतीखंड में कुमारेश्वर हनुमान के रूप में भी मिलता है।
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पंडित चंदन श्यामनारायण व्यास ने बताया, कई साल पहले जगड़िया गुजरात से गुमानदेव जी को आमंत्रित कर उज्जैन लाया गया था। उसके बाद से गुमानदेव हनुमान यही विराजमान हैं। मंदिर में प्रति मंगलवार को विशेष आरती की जाती है, जिससे प्रेत बाधा से ग्रसित जातकों को मुक्ति मिलती है। गुमानदेव हनुमान के बारे में पंडित ने व्यास ने बताया, गुमान अर्थात घमंड बाबा गुमानदेव हनुमान घमंड का नाश करने वाले देवता भी कहा जाता है। गुमानदेव की प्रतिमा अति प्राचीन एवं चमत्कारी है। पूर्व में बाबा गुमानदेव के वृद्ध स्वरूप का दर्शन श्रद्धालुजनों को मंदिर में होता था। लेकिन साल 2004 में बाबा गुमानदेव हनुमान जी ने प्राकृतिक रूप से अपना वृद्ध स्वरूप त्याग कर बाल स्वरूप धारण कर लिया था, जिसके दर्शन आज भी श्रद्धालुओं को मंदिर में होते हैं।
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गुमानदेव हनुमान के आंगन में विराजित है अष्ट चिरंजीवी...
बाबा गुमानदेव के आंगन में अष्ट चिरंजीवी का यह एक ऐसा मंदिर है। जहां अष्ट चिरंजीवी यानी जो देवता अमर हैं उनकी अष्टधातु से निर्मित प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर के पुजारी पंडित चंदन श्यामनारायण व्यास ने बताया, मंदिर में अष्ट चिरंजीवियों के दिव्य दर्शन होते हैं। यहां बाबा गुमानदेव के साथ महर्षि मारकंडेय, भगवान परशुराम, महर्षि कृपाचार्य, महाराजा विभीषण, महर्षि वेदव्यास, महाराजा बली और महर्षि अश्वत्थामा की अति दिव्य प्रतिमाएं मंदिर में विराजित हैं। वैसे तो अष्ट चिरंजीवियों के दर्शन करने मात्र से जीवन सुखमय आरोग्यवान बनता है, लेकिन जन्मदिवस के दिन अष्ट चिरंजीवियों का दर्शन करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।
जन्म और महाआरती का होगा आयोजन...
बाबा गुमानदेव हनुमान के दरबार में इन दिनों हनुमान जयंती महोत्सव की धूम मची हुई है। मंदिर में वैसे तो प्रतिदिन कई आयोजन हो रहे हैं, लेकिन छह अप्रैल को हनुमान जयंती के अवसर पर सुबह नौ बजे जन्म आरती और दोपहर में हवन एवं पूणार्हुति के साथ रात्रि 8:30 बजे महाआरती का आयोजन भी होगा।
