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आदिवासी वोटबैंक पर नजर: शिवराज के जनजातीय सम्मेलन के जवाब में कांग्रेस करेगी जबलपुर में सम्मेलन, कमलनाथ शामिल होंगे
Wed, 10 Nov 2021 11:45 AM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Wed, 10 Nov 2021 11:45 AM IST
सार
जनजातीय गौरव दिवस (15 नवंबर) पर मध्यप्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टियां आदिवासी वोटबैंक को लुभाने की कोशिश करने को तैयार हैं। भोपाल में सरकार ने महासम्मेलन रखा है तो जबलपुर में कांग्रेस ने भी बड़े सम्मेलन की तैयारियां तेज कर दी हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल में आयोजित जनजातीय महासम्मेलन में भाग लेने वाले हैं।
- फोटो : Twitter@ Bjp4india
विस्तार
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बिरसा मुंडा की जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस (15 नवंबर) पर मध्यप्रदेश की दोनों पार्टियां आदिवासी वोटबैंक को लुभाने की कोशिश करने को तैयार हैं। भोपाल में जनजातीय गौरव दिवस पर महासम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत करेंगे। वहीं, अब जबलपुर में कांग्रेस ने जनजातीय महासम्मेलन की तैयारियां तेज कर दी हैं। इसमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ शामिल होंगे।
राज्य सरकार ने जनजातीय गौरव दिवस को धूमधाम से मनाने की तैयारी की है। इसके लिए 15 नवंबर को राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। पहले यह ऐच्छिक अवकाश होता था। सरकार ने पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित किए हैं। राजधानी में ढाई लाख आदिवासियों को लाने की तैयारी की गई है।
2023 चुनावों की तैयारी
जनजातीय महासम्मेलन को भाजपा की 2023 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के तौर पर देखा जा रहा है। मध्यप्रदेश में आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) वर्ग के लिए 47 सीटें हैं। इसके अलावा सामान्य वर्ग की 31 सीटें ऐसी हैं, जहां आदिवासी वोटर निर्णायक हैं। 2018 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को बहुमत नहीं मिल सका था तो कहीं न कहीं उसका कारण आदिवासी सीटों पर होल्ड गंवाना था। रिजर्व 47 सीटों में 2013 में भाजपा के पास 32 सीटें थी, जो 2018 में घटकर 16 रह गई थीं।
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जनजातीय योजनाओं की घोषणा
जनजातीय गौरव दिवस पर भोपाल के जंबूरी मैदान में मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री भाग ले रहे हैं। प्रधानमंत्री इस दौरान जनजातीय वर्ग के लिए बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। साथ ही जनजातीय समुदाय के लिए संचालित योजनाओं को दोहरा सकते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके संबद्ध संगठन जनजातीय इलाकों में लंबे समय से सक्रिय हैं। इसका भी लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है। पिछले चुनावों में जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) जैसे संगठनों ने भी भाजपा को परेशान किया था। भाजपा इस आयोजन के जरिए उसका प्रभाव कम करने का प्रयास करेगी।
जबलपुर में कांग्रेस का जनजातीय सम्मेलन
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मंगलवार को हुई बैठक में तय किया गया कि कांग्रेस 15 नवंबर को ही जबलपुर में जनजातीय सम्मेलन करेगी। इसमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ शामिल होंगे। जबलपुर में आदिवासी सम्मेलन कर कांग्रेस जनजातीय समुदाय में अपनी ताकत दिखाना चाहती है। सम्मेलन की जिम्मेदारी तरुण भनोट को सौंपी गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है मध्यप्रदेश की राजनीति में आदिवासी
2011 की जनगणना के मुताबिक मध्यप्रदेश में 43 आदिवासी समूह हैं। प्रदेश में आदिवासियों की आबादी 2 करोड़ से ज्यादा है, जो 230 में से 84 विधानसभा सीटों पर असर डालती हैं। इनमें सबसे ज्यादा आबादी भील-भिलाला करीब 60 लाख, तो गोंड की आबादी करीब 50 लाख है। कोल 11 लाख, तो कोरकू और सहरिया करीब छह-छह लाख हैं। करीब 10 साल बाद ये आंकड़े काफी हद तक बदल चुके हैं।
राज्य सरकार ने जनजातीय गौरव दिवस को धूमधाम से मनाने की तैयारी की है। इसके लिए 15 नवंबर को राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। पहले यह ऐच्छिक अवकाश होता था। सरकार ने पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित किए हैं। राजधानी में ढाई लाख आदिवासियों को लाने की तैयारी की गई है।
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2023 चुनावों की तैयारी
जनजातीय महासम्मेलन को भाजपा की 2023 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के तौर पर देखा जा रहा है। मध्यप्रदेश में आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) वर्ग के लिए 47 सीटें हैं। इसके अलावा सामान्य वर्ग की 31 सीटें ऐसी हैं, जहां आदिवासी वोटर निर्णायक हैं। 2018 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को बहुमत नहीं मिल सका था तो कहीं न कहीं उसका कारण आदिवासी सीटों पर होल्ड गंवाना था। रिजर्व 47 सीटों में 2013 में भाजपा के पास 32 सीटें थी, जो 2018 में घटकर 16 रह गई थीं।
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जनजातीय योजनाओं की घोषणा
जनजातीय गौरव दिवस पर भोपाल के जंबूरी मैदान में मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री भाग ले रहे हैं। प्रधानमंत्री इस दौरान जनजातीय वर्ग के लिए बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। साथ ही जनजातीय समुदाय के लिए संचालित योजनाओं को दोहरा सकते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके संबद्ध संगठन जनजातीय इलाकों में लंबे समय से सक्रिय हैं। इसका भी लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है। पिछले चुनावों में जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) जैसे संगठनों ने भी भाजपा को परेशान किया था। भाजपा इस आयोजन के जरिए उसका प्रभाव कम करने का प्रयास करेगी।
जबलपुर में कांग्रेस का जनजातीय सम्मेलन
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मंगलवार को हुई बैठक में तय किया गया कि कांग्रेस 15 नवंबर को ही जबलपुर में जनजातीय सम्मेलन करेगी। इसमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ शामिल होंगे। जबलपुर में आदिवासी सम्मेलन कर कांग्रेस जनजातीय समुदाय में अपनी ताकत दिखाना चाहती है। सम्मेलन की जिम्मेदारी तरुण भनोट को सौंपी गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है मध्यप्रदेश की राजनीति में आदिवासी
2011 की जनगणना के मुताबिक मध्यप्रदेश में 43 आदिवासी समूह हैं। प्रदेश में आदिवासियों की आबादी 2 करोड़ से ज्यादा है, जो 230 में से 84 विधानसभा सीटों पर असर डालती हैं। इनमें सबसे ज्यादा आबादी भील-भिलाला करीब 60 लाख, तो गोंड की आबादी करीब 50 लाख है। कोल 11 लाख, तो कोरकू और सहरिया करीब छह-छह लाख हैं। करीब 10 साल बाद ये आंकड़े काफी हद तक बदल चुके हैं।
