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आज दिन-रात बराबर: वेधशाला में लाइव देखी जा सकती है ग्रहों की चाल, जानिए कैसे होती है खगोलीय गणना

Thu, 23 Sep 2021 03:43 PM IST
प्रशांत कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: प्रशांत कुमार झा Updated Thu, 23 Sep 2021 03:43 PM IST
सार

जयपुर के महाराज सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने देश के 5 शहरों में वेधशालाओं का निर्माण कराया। उज्जैन की वेधशाला 1719 को बनाई गई। यह सभी में प्रमुख है। इन वेधशालाओं में राजा जयसिंह ने 8 साल तक ग्रह-नक्षत्रों के वेध लेकर ज्योतिष गणित के कई प्रमुख यंत्रों में संशोधन किया। 

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Today day and night are equal 12 hours day and 12 hours night seen live in vedshala in ujjain
आज दिन और रात एक समान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन काल गणना की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। खगोलशास्त्रियों की मान्यता है कि यह उज्जैन नगरी पृथ्वी और आकाश की सापेक्षता में ठीक मध्य में स्थित है। कालगणना के शास्त्र के लिए इसकी यह स्थिति सदा उपयोगी रही है। इसलिए इसे पूर्व से ग्रीनविच के रूप में भी जाना जाता है।  यहां लगे प्राचीन यंत्रों के माध्यम से ग्रहों की चाल, सूर्य और चंद्र ग्रहण और सूर्य की चाल से समय की गणना की जाती है। इसी भौगोलिक स्थिति के कारण इसे कालगणना का केंद्र बिंदु कहा जाता है । यहां लगे प्राचीन यंत्रों के माध्यम से ग्रहों की चाल, सूर्य और चंद्र ग्रहण और सूर्य की चाल से समय की गणना की जाती है। हर साल आज ही के दिन यानी 23 सितंबर को दिन व रात बराबर होते हैं। 

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दरअसल, आज से सूर्य उत्तर से दक्षिणी गोलार्ध में प्रवेश कर जाएगा और फिर दिन छोटे और रातें बड़ी होने लगेंगी। आज के दिन नवग्रहों में प्रमुख ग्रह सूर्य विषुवत रेखा पर लंबवत रहता है। इसे शरद संपात कहते हैं। उज्जैन में जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि सूर्य के दक्षिणी गोलार्ध में प्रवेश के कारण अब उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और रातें बड़ी होने लगेंगी। ऐसा 22 दिसंबर तक चलेगा।
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उज्जैन की वेधशाला सभी में प्रमुख
जयपुर के महाराज सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने देश के 5 शहरों में वेधशालाओं का निर्माण कराया। उज्जैन की वेधशाला 1719 को बनाई गई। यह सभी में प्रमुख है। इन वेधशालाओं में राजा जयसिंह ने 8 साल तक ग्रह-नक्षत्रों के वेध लेकर ज्योतिष गणित के कई प्रमुख यंत्रों में संशोधन किया। यहां मूल रूप से ईंटों और पत्थर से निर्मित वेधशाला की इमारतें और यंत्र आज भी जीवंत हैं।
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सूर्य की स्थिति देखने के लिए इस यंत्र का करें इस्तेमाल
शंकु यंत्र के माध्यम से हम सूर्य की स्थिति को देख सकते हैं। इसी शंकु की परछाई से सूर्य की स्थिति को देखा जाता है। शंकु की छाया से गोल सतह पर 7 रेखाएं खींची गई हैं, जो 12 राशियों में सूर्य की स्थिति को प्रदर्शित करती हैं। बीच वाली सीधी रेखा भू-मध्य रेखा या विषुवत रेखा कहलाती है। 21 मार्च और 23 सितंबर को सूर्य जब भू-मध्य रेखा पर होता है, तो शंकु (कोन) की छाया पूरे दिन इस रेखा पर दिखती होती है। इस दिन सूर्य की क्रांति शून्य डिग्री होती है। दिन और रात बराबर होते हैं, अर्थात 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात होती है।

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