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पुलिस को पूर्व पुलिसकर्मी की धमकी: क्रोध अनियंत्रित होने पर हो सकता है मानव वध... मारे जा सकते हैं पुलिसकर्मी!
Fri, 12 Nov 2021 05:33 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Fri, 12 Nov 2021 05:33 PM IST
सार
देवास में एक पूर्व आरक्षक ने पुलिस को धमकी दी कि अगर कोतवाली थाने में खड़ी उसकी बाइक नहीं छोड़ी गई तो पुलिसकर्मियों की जान जा सकती है। हालांकि, बाद में उसने दूसरा आवेदन देकर पहले पर कार्रवाई न करने का आग्रह किया।
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मध्य प्रदेश पुलिस(लोगो)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्यप्रदेश की देवास पुलिस के पास एक ऐसा आवेदन पहुंचा, जिसे पढ़कर हर कोई स्तब्ध रह गया। इस आवेदन में धमकीभरे लहजे में लिखा गया कि क्रोध अनियंत्रित होने पर मानव वध भी हो सकता है। कई बेगुनाह पुलिसकर्मी व नागरिक मारे जा सकते हैं।
ये आवेदन देने वाला पुलिस विभाग का पूर्व आरक्षक है। इसका नाम मोहन सिंह पिता विक्रम सिंह है, जो देवास में रहता है। वह एसएएफ में आरक्षक था। 2019 में ड्यूटी के दौरान शराब पीने और गैरहाजिर रहने के कारण उसे बर्खास्त कर दिया गया था। अप्रैल में उस पर शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले में कार्रवाई हुई थी।
देवास एसपी के नाम लिखे आवेदन में मोहन सिंह ने लिखा कि मेरी बाइक 6 अप्रैल 2021 से कोतवाली में खड़ी है। भारतीय संविधान के तहत सभी नियमों का पालन करते हुए अथक प्रयास करने के बाद भी प्रार्थी न्याय से वंचित है। बाइक बेवजह खड़ी है। प्रार्थी पुलिस विभाग का पूर्व आरक्षक है। विभाग के सभी प्रकार के हथियार खोलना, जोड़ना, चलाना, शिकारी पोजिशन, स्टैंड अप प्रशिक्षण जानता है। रुस्तमजी पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय इंदौर में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। यदि बाइक नहीं लौटाई गई तो विभाग के सरकारी हथियार ऑटोमेटिक राइफल, इंसास, एसएलआर, पिस्टल, थ्री नॉट थ्री या हैंड ग्रेनेड में से किसी एक का उपयोग करते हुए बाइक छुड़ाने के लिए बाध्य हूं। इसमें कई पुलिसकर्मी व आम नागरिक मारे जा सकते हैं। आवेदन एसपी कार्यालय में आवक-जावक शाखा में दिया गया है।
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दूसरे आवेदन के जरिए पहला वापस लिया
मोहन सिंह को बाद में समझ आया कि उसने क्या लिख दिया है तो उसने दूसरा आवेदन लिखा। कोतवाली थाना प्रभारी को लिखे आवेदन में उसने कहा कि गुस्से में आकर जो पहला आवेदन दिया था, उस पर कोई कार्रवाई न की जाए। मेरा दिमाग अभी ठीक से काम नहीं कर रहा है।
वाहन नहीं छुड़ाया था, इसलिए थाने में खड़ा है
डीएसपी किरण शर्मा ने बताया कि मोहन सिंह को शराब पीने और गैर हाजिर रहने के कारण 2019 में बर्खास्त किया गया था। शराब पीकर वाहन चलाने के मामले में उस पर कार्रवाई हुई थी। कोर्ट में चालान पेश किया था। आरोपी ने खुद की जमानत करवा ली लेकिन वाहन नहीं छुड़ाया।
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ये आवेदन देने वाला पुलिस विभाग का पूर्व आरक्षक है। इसका नाम मोहन सिंह पिता विक्रम सिंह है, जो देवास में रहता है। वह एसएएफ में आरक्षक था। 2019 में ड्यूटी के दौरान शराब पीने और गैरहाजिर रहने के कारण उसे बर्खास्त कर दिया गया था। अप्रैल में उस पर शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले में कार्रवाई हुई थी।
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देवास एसपी के नाम लिखे आवेदन में मोहन सिंह ने लिखा कि मेरी बाइक 6 अप्रैल 2021 से कोतवाली में खड़ी है। भारतीय संविधान के तहत सभी नियमों का पालन करते हुए अथक प्रयास करने के बाद भी प्रार्थी न्याय से वंचित है। बाइक बेवजह खड़ी है। प्रार्थी पुलिस विभाग का पूर्व आरक्षक है। विभाग के सभी प्रकार के हथियार खोलना, जोड़ना, चलाना, शिकारी पोजिशन, स्टैंड अप प्रशिक्षण जानता है। रुस्तमजी पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय इंदौर में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। यदि बाइक नहीं लौटाई गई तो विभाग के सरकारी हथियार ऑटोमेटिक राइफल, इंसास, एसएलआर, पिस्टल, थ्री नॉट थ्री या हैंड ग्रेनेड में से किसी एक का उपयोग करते हुए बाइक छुड़ाने के लिए बाध्य हूं। इसमें कई पुलिसकर्मी व आम नागरिक मारे जा सकते हैं। आवेदन एसपी कार्यालय में आवक-जावक शाखा में दिया गया है।
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दूसरे आवेदन के जरिए पहला वापस लिया
मोहन सिंह को बाद में समझ आया कि उसने क्या लिख दिया है तो उसने दूसरा आवेदन लिखा। कोतवाली थाना प्रभारी को लिखे आवेदन में उसने कहा कि गुस्से में आकर जो पहला आवेदन दिया था, उस पर कोई कार्रवाई न की जाए। मेरा दिमाग अभी ठीक से काम नहीं कर रहा है।
वाहन नहीं छुड़ाया था, इसलिए थाने में खड़ा है
डीएसपी किरण शर्मा ने बताया कि मोहन सिंह को शराब पीने और गैर हाजिर रहने के कारण 2019 में बर्खास्त किया गया था। शराब पीकर वाहन चलाने के मामले में उस पर कार्रवाई हुई थी। कोर्ट में चालान पेश किया था। आरोपी ने खुद की जमानत करवा ली लेकिन वाहन नहीं छुड़ाया।
