व्यापमः गवर्नर के जवाब बढ़ाएंगे शिवराज की मुश्किलें
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व्यापम घोटाले की सीबीआई जांच मंजूर होने के बाद सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भले ही राहत महसूस करने का दावा किया हो लेकिन एक पेंच ऐसा है जिसकी वजह से उनकी दिक्कतों का वजन अभी कम नहीं हुआ है।
भाजपा और शिवराज के नजदीकी लोगों को अब यह डर सता रहा है कि राज्यपाल रामनरेश यादव सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए जाने वाले जवाब में कहीं ऐसे सवालों अथवा मुद्दों का जिक्र न कर दें, जिनसे बवाल खड़ा हो जाए।
यदि ऐसा हुआ तो वाकई मुख्यमंत्री शिवराज एवं भाजपा के लिए नई मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। लिहाजा भाजपा की नजर राज्यपाल के रुख पर जम गई है।
तो पार्टी और नेतृत्व के सामने आ सकती हैं मुश्किल
राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि राज्यपाल के इस्तीफा देने या उन्हें हटाए जाने से ज्यादा सत्तारूढ़ भाजपा की चिंता इस बात को लेकर है कि महामहिम अपने जवाब में क्या लिखते हैं।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री और उनके निकटस्थ लोगों के बारे में लगे आरोपों को गवर्नर ने दोहरा दिया तो पार्टी और नेतृत्व के सामने सचमुच मुश्किल पैदा होगी।
दरअसल राज्यपाल के मुद्दे पर भाजपा की प्रदेश इकाई पहले दिन से ही एहतियात बरतती रही है। फरवरी में जब उनका नाम एफआईआर में आया था तब भी पार्टी ने इस्तीफे की मांग नहीं की थी। राज्य व केंद्र की सरकारों पर उनके साथ सहानुभूति दिखाने का आरोप भी लगता रहा है।
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश इकाई ने इस मामले में केंद्रीय नेतृत्व से मशविरा किया था, जिसके बाद उसे मौन रहने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि व्यापम घोटाले में राज्यपाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है और एफआईआर रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र व राज्य सरकार के अलावा राज्यपाल को चार हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
