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MP: गणतंत्र दिवस के विशेष अतिथियों में शामिल माली की PM मोदी से गुहार, मेरा 44 दिन का वेतन दिलाने में मदद करें

Fri, 27 Jan 2023 03:20 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, निवाड़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, निवाड़ी Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Fri, 27 Jan 2023 03:20 PM IST
सार

सुखनंदन पिछले दो महीने से इंडिया गेट स्थित बागवानी विभाग में कार्यरत हैं। इससे पहले, वह एक ठेकेदार के तहत आंध्र भवन में कार्यरत थे। इस दौरान वह जिस ठेकेदार के पास काम करते थे, उसने सुखनंदन की 44 दिनों की मजदूरी नहीं दी है।

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The gardener who participated in the Republic Day appealed to PM Modi, help me get my 44 days salary
गणतंत्र दिवस - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश के निवाड़ी जिले के रहने वाले सुखनंदन को इस साल गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने के मौका मिला। पेशे से माली सुखनंदन कर्तव्य पथ पर विशेष आमंत्रित लोगों में शामिल थे। इस साल सेंट्रल विस्टा परियोजना के निर्माण कार्य, इंडिया गेट के आसपास और कर्तव्य पथ के साथ रखरखाव गतिविधियों में लगे कई श्रमिकों और मजदूरों को परेड में भाग लेने के लिए विशेष पास प्रदान किए गए। इसी के तहत सुखनंदन को भी पास मिले थे। उन्होंने 26 जनवरी की परेड सलामी मंच के ठीक सामने से देखी, जहां पीएम मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बैठी थीं। सुखनंदन ने अपने गणतंत्र दिवस के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि जब पीएम करीब आए और उनका हाथ हिलाकर अभिवादन किया तो वह पल रोमांचित करने वाला था। मैं समारोह का हिस्सा बनकर खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहा था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे विशेष मेहमानों के बीच चुना जाएगा। जब उनसे पूछा गया कि वह अगर कुछ पूछने का मौका मिलता तो वह प्रधानमंत्री से क्या पूछते, तो उन्होंने कहा, मेरे आखिरी ठेकेदार ने 44 दिनों के काम के लिए मजदूरी देने से इनकार कर दिया है। मैं पीएम मोदी जी से अनुरोध करूंगा कि मुझे मेरी मजदूरी दिलाने में मदद करें।
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सुखनंदन पिछले दो महीने से इंडिया गेट स्थित बागवानी विभाग में कार्यरत हैं। इससे पहले, वह एक ठेकेदार के तहत आंध्र भवन में कार्यरत थे। इस दौरान वह जिस ठेकेदार के पास काम करते थे, उसने सुखनंदन की 44 दिनों की मजदूरी नहीं दी है, सुखनंदन का कहना है कि मेरे पास रजिस्टर की एक प्रति है, जो साबित करती है कि मैं उन 44 दिनों में उपस्थित था। इसके बावजूद, ठेकेदार मेरा वेतन जारी करने के लिए तैयार नहीं है, जिसका मैं हकदार हूं। अब, मैंने उसका ब्रश कटर भी वापस करने से इनकार कर दिया है, जो मैंने रखा था। मैंने उससे कहा है कि जब तक वह मेरा बकाया नहीं चुकाएगा, मैं ब्रश कटर वापस नहीं करूंगा। वर्तमान में सुखनंदन अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ इंडिया गेट के पास अस्थायी टेंट में रहते हैं।  
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स्थानीय निकाय विभिन्न श्रम-गहन कार्यों को निजी ठेकेदारों को आउटसोर्स करते हैं, जो सरकार द्वारा निर्धारित दर पर भुगतान करने के वादे के साथ मजदूरों को काम पर रखते हैं। कई बार इन श्रमिकों का शोषण किया जाता है और ठेकेदारों द्वारा किसी न किसी बहाने वेतन देने से मना कर दिया जाता है। वे कानूनी व्यवस्था के तहत सहारा नहीं ले सकते क्योंकि उनके पास ऐसा करने के लिए न तो पैसा है और न ही समय और जागरूकता।
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नंदन ने समय पर भुगतान के लिए अपने वर्तमान ठेकेदार की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्थानीय नगर निकायों ने बागवानों की मासिक मजदूरी 14,586 रुपये तय की है। इस दर पर, मेरा कुल बकाया लगभग 21,000 रुपये है, उन्होंने कहा, ठेकेदार ने केवल 6,000 रुपये देने की पेशकश की थी। वह अक्सर मुझे अपने ब्रश कटर लेने के लिए एफआईआर की धमकी देता है। अगर मुझे सरकार से कोई मदद मिलती है तो मैं वास्तव में आभारी रहूंगा।


नंदन के पूर्व ठेकेदार जितेन उपाध्याय से संपर्क करने पर उसने बकाया राशि को लेकर विवाद होने की बात स्वीकार करते हुए मजदूरी नहीं देने की बात स्वीकार की। ठेकेदार ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि उनका बकाया 21,000 रुपये है। साथ ही, ब्रश कटर के अलावा, उन्होंने प्लंबिंग के अन्य उपकरण भी रखे हैं, जिन्हें उन्हें पहले वापस करना होगा।
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