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शिवराज बोले: मध्यप्रदेश में तीन प्रकार के अधिकारी, इनमें से एक को काम रोकने में मजा आता है
Thu, 14 Oct 2021 09:45 AM IST
अजय सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल।
Published by: अजय सिंह
Updated Thu, 14 Oct 2021 09:45 AM IST
सार
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह बात संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा मध्यप्रदेश के चयनित 38 विद्यार्थियों के सम्मान में भोपाल में आयोजित कार्यक्रम सफलता के मंत्र में कही।
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शिवराज सिंह चौहान
- फोटो : @ChouhanShivraj
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विस्तार
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तीन प्रकार के अधिकारी होते हैं, जिनमें से एक वे अधिकारी होते हैं जिन्हें काम रोकने में मजा आता है। मुख्य्मंत्री ने कहा कि ऐसे अधिकारी नियम कानून का हवाला देकर काम को ऐसे अटकाते हैं कि काम निकलवाने में ही लोगों को पसीना आ जाता है।
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सीएम शिवराज ने कहा कि मुझे मुख्यमंत्री बने 15 साल हो गए। मैं अफसरों को जानता हूं कि कौन कैसा होता है। तीन तरह के होते हैं। एक वो होते हैं जो रूटीन का काम करते रहते हैं कि कौन ज्यादा चक्कर में पडे़। जितना (काम) आ जाए, कर करा लो। दूसरे वो होते हैं जिन्हें काम रोकने में मजा आता है। होने नहीं देना। नियम कानून का हवाला देकर ऐसे (काम) अटकाते हैं कि (काम) निकलवाने में ही लोगों को पसीना आ जाता है। और तीसरे ऐसे होते हैं जो समस्या होने या नियम प्रक्रिया न होने पर भी उसमें से भी रास्ता निकालकर वांछित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए फैसले देते हैं। हम हैं तो करने से लिए हैं।
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चौहान ने कहा कि एक जिलाधिकारी अगर चाहे तो पूरे जिले को बदल कर रख सकते हैं। कई अधिकारियों ने विकास एवं लोगों का भला कर इतिहास रचा है। उन्होंने कहा कि नियम से रास्ते निकालकर लोगों का भला किया जा सकता है।
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यूपीएससी में चयनित विद्यार्थियों से चौहान ने कहा, ‘सिविल सर्विसेज धन कमाने का नहीं, प्रदेश और देश बनाने का करियर है। इसमें आपको लोगों की जिंदगी बदलने का अवसर मिलता है। हमें समस्या का समाधान निकालने के लिए काम करना चाहिए। जहां चाह है, वहां राह है।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के लिए ललक ऐसी कि कई अधिकारियों ने प्रतिमान स्थापित किए हैं। उन्हें अब लोग देवता की तरह पूजते हैं। एक नहीं, अनेक अफसर ऐसे हुए, जिन्होंने लोगों की जिंदगी बदलने का काम किया। मेरे बच्चों, तुम भी ऐसे ही काम करना, जिससे गरीबों की जिंदगी बदले और प्रदेश का नवनिर्माण हो।
चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश से प्रतिवर्ष औसत रूप से 15 से 20 विद्यार्थी यूपीएससी की परीक्षा में चुने जाते हैं। प्रदेश में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा में 38 विद्यार्थी चयनित हुए हैं। यह प्रदेश के लिए गौरव पूर्ण उपलब्धि है। चयनित विद्यार्थियों का सम्मान होने से अन्य विद्यार्थी भी इस तरह की सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा ग्रहण करेंगे।
