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Shardiya Navratri: लकवा लगने के बाद भी कलकत्ता से दमोह आकर मूर्ति बना रहे हलदार, 36 साल से निभा रहे यह परंपरा

Sun, 25 Sep 2022 01:42 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: अरविंद कुमार Updated Sun, 25 Sep 2022 01:42 PM IST
सार

नवरात्र में परंपरा के मुताबिक देवी प्रतिमाओं की स्थापना होती है। यह एक परंपरा ही है कि प्रतिमाओं की स्थापना पीढ़ी दर पीढ़ी चलती जाती है। दमोह जिले की ऐसी ही परंपरा को निभाने के लिए कलकत्ता के प्रसिद्ध मूर्तिकार एक हाथ में लकवा लगने के बाद भी यहां पहुंचे हैं।

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Shardiya Navratri Even after being paralyzed sculptors of Calcutta are making idols in Damoh
मूर्तिकार असित हलदार - फोटो : Social Media

कलकत्ता के प्रसिद्ध कलाकार बीते 36 साल से दमोह जिले में आकर देवी प्रतिमाओं का निर्माण करते आ रहे हैं। इस साल भी यह परंपरा न टूटे, इसलिए वह एक हाथ के काम न करने के बाद भी 1200 किमी का सफर तय कर दमोह पहुंचे हैं और देवी प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं।



कलकत्ता निवासी मूर्तिकार असित हलदार (60) बताते हैं, यह केवल बंगाल की काली मां का आर्शीवाद ही है। जो एक हाथ में लकवा लगने के बाद भी आज वे देवी प्रतिमा का निर्माण कर उनकी सेवा कर रहे हैं।

हलदार ने बताया, फरवरी 2020 में उन्हे बाएं हाथ में लकवा लग गया। कुछ दिन बिस्तर पर रहे। हाथ से काम करने का प्रयास किया, लेकिन हाथ ने काम नहीं किया। इसी दौरान 23 मार्च से पूरे देश में कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन लग गया, जिसके बाद उन्हें लगा कि शायद अब देवी प्रतिमाओं का निर्माण नहीं कर पाएंगे। उनका सफर यहीं खत्म हो जाएगा।


इसी बीच दमोह के बजरिया निवासी मिश्रा परिवार से उनके पास बुलावा आया और उन्होंने दमोह आने का निवेदन किया। दमोह आने का बुलावा आते ही हलदार के मन में ख्याल आया कि वह दमोह जिले की परंपरा को 36 साल से निभाते आ रहे हैं और यदि दमोह नहीं जाएंगे तो यह परंपरा टूट जाएगी। उन्होंने अपने सात कारीगरों को साथ लिया और दमोह पहुंचे।

ऐसे शुरू हुआ था सफर
हलदार ने बताया कि साल 1986 में कलकत्ता निवासी उनके पहचान के एक व्यक्ति दमोह के इलाहाबाद बैंक में मैनेजर थे। उस समय दमोह के राय चौराहा निवासी स्वर्गीय छोटेलाल राय की मैनेजर से दोस्ती थी। मैनेजर अक्सर बंगाल की देवी प्रतिमाओं को बनाने वाले मूर्तिकार हलदार के बारे में बताते थे।

इसे सुनकर एक दिन राय ने बैंक मैनेजर से कहा कि आप जब भी कलकत्ता जाओ तो मूर्तिकार हलदार से दमोह आने का आग्रह जरूर करना। कुछ दिन बाद मैनेजर कलकत्ता आए तो उन्होंने दमोह आने का निमंत्रण दिया।

उसी साल मूर्तिकार हलदार अपने कुछ साथियों के साथ दमोह पहुंचे और छोटेलाल राय ने अपने यहां उन्हें रोककर देवी प्रतिमा बनाने वाली जगह उपलब्ध कराई। तब से लेकर आज तक यह सिलसिला जारी रहा।


राय के निधन के बाद उनके बेटे बस आपरेटर शंकर राय और उनके परिवार के लोगों ने वही मान-सम्मान दिया, जो उनके पिता देते थे। राय चौराहा पर कुछ जगह की कमी होने के कारण हलदार चार साल पहले बजरिया 7 में स्वर्गीय डॉ. रवि मिश्रा के कहने पर उनके घर के पास बने संकट मोचन मंदिर परिसर में आकर प्रतिमाओं का निर्माण करने लगे।

बड़े आकार की बनाई है प्रतिमाएं
असित हलदार ने बताया कि इस साल कोरोना का कोई सरकारी नियम शासन की ओर से नहीं है। इसलिए छोटी प्रतिमाओं से काफी बड़ी प्रतिमाओं का निर्माण किया गया है, जिनकी स्थापना पूरे जिले में होगी। छोटी, बड़ी मिलाकर करीब 250 प्रतिमाओं का निर्माण उनके द्वारा किया गया है।

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