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Shahdol: 'कंगारू मदर केयर' तकनीक से 900 ग्राम की नवजात को मिला जीवनदान, 45 दिन बाद स्वस्थ होकर लौटी घर
Sat, 19 Jul 2025 11:45 AM IST
शहडोल ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल
Published by: शहडोल ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jul 2025 11:45 AM IST
सार
शहडोल जिला अस्पताल में सिर्फ 900 ग्राम वजन की एक नवजात बच्ची को 45 दिन की गहन चिकित्सा देखरेख के बाद जीवनदान मिला है। सात माह में जन्मी यह बच्ची गंभीर हालत में एसएनसीयू में भर्ती की गई थी।
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शहडोल में सात माह की बच्ची को डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शहडोल जिला अस्पताल शहडोल की एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में एक अद्भुत संघर्ष की कहानी सामने आई है, जहां मात्र 900 ग्राम वजन की एक समय से पहले जन्मी बच्ची को चिकित्सकों ने 45 दिनों की अथक मेहनत के बाद जीवनदान दिया। बच्ची का जन्म सातवें महीने में हुआ था और वह गंभीर स्थिति में थी। अब वह स्वस्थ है और परिजनों के साथ घर लौट चुकी है।
मां सुष्मिता सिंह ने बताया कि जब वह अपनी बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचीं, तब उसे बचाने की उम्मीद बेहद कम थी। लेकिन डॉक्टरों की टीम ने उन्हें हिम्मत दी और तत्परता से इलाज शुरू किया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील हथगेल के नेतृत्व में बच्ची को तुरंत एसएनसीयू में भर्ती कर ऑक्सीजन और श्वसन मशीन पर रखा गया, क्योंकि वह खुद से सांस नहीं ले पा रही थी। शुरुआती दिनों में बच्ची को सिरिंज और ट्यूब के जरिए पोषण दिया गया।
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बच्ची की स्थिति बेहद नाजुक थी, इसलिए मां को 'कंगारू मदर केयर' पद्धति का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें मां की गर्माहट नवजात को जरूरी तापमान और सुरक्षा देती है। यह उपचार नवजात की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बेहद कारगर साबित हुआ। हालांकि इलाज के 30वें दिन बच्ची की तबीयत फिर बिगड़ी, लेकिन समय पर उपचार से उसे फिर संभाल लिया गया। इलाज के 45वें दिन बच्ची का वजन बढ़कर 1.380 किलोग्राम हो गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे छुट्टी दे दी।
डॉ. हथगेल ने कहा, “यह मामला हमारे लिए भी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन टीमवर्क, समय पर इलाज और माता-पिता के धैर्य से हमने बच्ची की जिंदगी बचा ली।” इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि चिकित्सा विज्ञान, मातृत्व की ताकत और डॉक्टरों की लगन मिलकर चमत्कार कर सकती है।
क्या है कंगारू मदर केयर तकनीक
कंगारू मदर केयर (केएमसी) में नवजात शिशु को मां की छाती से लगाकर रखा जाता है। इसमें ये सुनिश्चित किया जाता है कि मां की त्वचा से नवजात की त्वचा का संपर्क बने।
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मां सुष्मिता सिंह ने बताया कि जब वह अपनी बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचीं, तब उसे बचाने की उम्मीद बेहद कम थी। लेकिन डॉक्टरों की टीम ने उन्हें हिम्मत दी और तत्परता से इलाज शुरू किया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील हथगेल के नेतृत्व में बच्ची को तुरंत एसएनसीयू में भर्ती कर ऑक्सीजन और श्वसन मशीन पर रखा गया, क्योंकि वह खुद से सांस नहीं ले पा रही थी। शुरुआती दिनों में बच्ची को सिरिंज और ट्यूब के जरिए पोषण दिया गया।
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बच्ची की स्थिति बेहद नाजुक थी, इसलिए मां को 'कंगारू मदर केयर' पद्धति का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें मां की गर्माहट नवजात को जरूरी तापमान और सुरक्षा देती है। यह उपचार नवजात की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बेहद कारगर साबित हुआ। हालांकि इलाज के 30वें दिन बच्ची की तबीयत फिर बिगड़ी, लेकिन समय पर उपचार से उसे फिर संभाल लिया गया। इलाज के 45वें दिन बच्ची का वजन बढ़कर 1.380 किलोग्राम हो गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे छुट्टी दे दी।
डॉ. हथगेल ने कहा, “यह मामला हमारे लिए भी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन टीमवर्क, समय पर इलाज और माता-पिता के धैर्य से हमने बच्ची की जिंदगी बचा ली।” इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि चिकित्सा विज्ञान, मातृत्व की ताकत और डॉक्टरों की लगन मिलकर चमत्कार कर सकती है।
क्या है कंगारू मदर केयर तकनीक
कंगारू मदर केयर (केएमसी) में नवजात शिशु को मां की छाती से लगाकर रखा जाता है। इसमें ये सुनिश्चित किया जाता है कि मां की त्वचा से नवजात की त्वचा का संपर्क बने।
