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Shahdol News: सात दशक बाद भी जवानों की तरह लगा रहे दौड़, सोहगपुर के मोहम्मद यूनुस बने युवाओं के लिए प्रेरणा
Fri, 03 May 2024 05:17 PM IST
शहडोल ब्यूरो
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, शहडोल
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, शहडोल
Published by: शहडोल ब्यूरो
Updated Fri, 03 May 2024 05:17 PM IST
सार
अपने जीवन के सात दशक यानी करीब 71 बरस बाद भी जवानों के साथ कदम से कदम मिलाकर दौड़ने का हौसला रखते हैँ। वह शख्स हैँ सोहागपुर के वार्ड नंबर 3 निवासी 71 वर्षीय यूनुस खान।
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71 की उम्र में युवाओं सा जोश रखते हैं मोहम्मद यूनुस
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
आज के इस आधुनिक युग और भागदौड़ भरी जिंदगी मे खुशहाल जिंदगी के लिए एक स्वस्थ शरीर का होना बेहद जरूरी है, लेकिन इसके लिए एक नियमित व्यायाम की आवश्यकता होती है। प्रायः देखने में यह आता है कि जीवन के 50 वर्ष गुज़ारने के बाद अधिकांश लोग अपनी उम्र ढलती हुईं समझ आराम तलब होना शुरू हो जाते हैँ। लेकिन जिले मे एक ऐसे शख्स भी है जो अपने जीवन के सात दशक यानी करीब 71 बरस बाद भी जवानो के साथ कदम से कदम मिलाकर दौड़ने का हौसला रखते हैँ।
वह शख्स हैँ सोहागपुर के वार्ड नंबर 3 निवासी 71 वर्षीय यूनुस खान। जिनका जन्म 26 नवम्बर 1953 को हुआ। बाल्यकाल से लेकर जवानी तक तो वह एक अच्छे धावक थे ही, लेकिन आज भी उनकी बूढ़ी हड्डियों में वही जोश नजर आ रहा है। उम्र के साथ चेहरे से भले ही वह बुजुर्ग नजर आ रहे हैं, पर आज भी वह जवानो को पछाड़ने का हौसला रखते हैं। वह आज भी एक अच्छे एथलीट हैं। वह 100 मीटर की रेस 14.58 सेकंड में दौड़ते हैं। आज भी वह देश को मेडल दिलाने के लिए दौड़ने की चाह रखते हैँ। यक़ीनन इस उम्र में भी इतनी अच्छी टाइमिंग के साथ दौड़ना यह बहुत ही तारीफे काबिल है। आज की जीवन शैली ऐसी हो गई है कि 70 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लोगों के घुटने काम करना बंद कर देते है। दौड़ना तो दूर कि बात है इस उम्र मे चलने के लिए भी लाठी का सहारा लेना पड़ जाता है। ऐसे बुजुर्ग आज युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
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वह शख्स हैँ सोहागपुर के वार्ड नंबर 3 निवासी 71 वर्षीय यूनुस खान। जिनका जन्म 26 नवम्बर 1953 को हुआ। बाल्यकाल से लेकर जवानी तक तो वह एक अच्छे धावक थे ही, लेकिन आज भी उनकी बूढ़ी हड्डियों में वही जोश नजर आ रहा है। उम्र के साथ चेहरे से भले ही वह बुजुर्ग नजर आ रहे हैं, पर आज भी वह जवानो को पछाड़ने का हौसला रखते हैं। वह आज भी एक अच्छे एथलीट हैं। वह 100 मीटर की रेस 14.58 सेकंड में दौड़ते हैं। आज भी वह देश को मेडल दिलाने के लिए दौड़ने की चाह रखते हैँ। यक़ीनन इस उम्र में भी इतनी अच्छी टाइमिंग के साथ दौड़ना यह बहुत ही तारीफे काबिल है। आज की जीवन शैली ऐसी हो गई है कि 70 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लोगों के घुटने काम करना बंद कर देते है। दौड़ना तो दूर कि बात है इस उम्र मे चलने के लिए भी लाठी का सहारा लेना पड़ जाता है। ऐसे बुजुर्ग आज युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
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