{"_id":"6661300444f92452d90a65f8","slug":"after-the-demolition-of-nath-fort-mp-bunty-sahu-reached-shahdol-and-paid-obeisance-at-mothers-court-he-offered-prayers-at-kankali-mata-temple-and-took-blessings-of-mother-shahdol-news-c-1-1-noi1220-1769359-2024-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahdol News: नाथ का किला ढहाने के बाद शहडोल में माई के दरबार पहुंचे बंटी साहू, पूजा अर्चना कर लिया आशीर्वाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahdol News: नाथ का किला ढहाने के बाद शहडोल में माई के दरबार पहुंचे बंटी साहू, पूजा अर्चना कर लिया आशीर्वाद
सार
शहडोल में कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को हराने के बाद नवनिर्वाचित भाजपा सांसद बंटी विवेक साहू शहडोल जिले में कंकाली माता मंदिर पहुंचे। वहां पूजा-अर्चना की और माता का आशीर्वाद लिया।
विज्ञापन
छिंदवाड़ा के नवनिर्वाचित सांसद बंटी विवेक साहू ने शहडोल में कंकाली माता मंदिर में पूजा-अर्चना की।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छिंदवाड़ा में बड़ा उलटफेर करने के बाद भाजपा के नवनिर्वाचित सांसद बंटी विवेक साहू शहडोल पहुंचे। उन्होंने कंकाली माता मंदिर में दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना भी की।
विज्ञापन
चार जून को आए लोकसभा नतीजों में बंटी साहू ने छिंदवाड़ा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ को मात दी है। मध्य प्रदेश में भाजपा ने 29 में से 29 सीटों पर जीत हासिल की और इतिहास रचा है। 2019 में छिंदवाड़ा सीट को छोड़कर भाजपा 28 सीटों पर विजयी परचम फहराने में कामयाब हुई थी। इस बार छिंदवाड़ा का गढ़ भी ध्वस्त हो गया।
विज्ञापन
छिंदवाड़ा से भाजपा के नवनिर्वाचित सांसद बंटी विवेक साहू ने अपनी जीत के बाद शहडोल जिले में स्थित कंकाली माता मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने माता का आशीर्वाद लिया। सुबह-सुबह ही उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना भी की। फिर माता के द्वार पर मत्था टेकने के बाद लौट गए। ऐसा माना जाता है कि कंकाली माता के दर्शन करने मात्र से ही हर मनोकामना पूर्ण होती है। यहां लोग अपनी अर्जी लगाने दूर-दूर से पहुंचते हैं।
विज्ञापन
इतिहासकार रामनाथ परमार बताते हैं कि नवमी-दशमी शताब्दी में कलचुरी नरेशों ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। पहले यह 64 योगिनी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध था। राजा युवराज देव प्रथम और राजा कर्ण देव के आचार्य ने यहां 64 योगिनियों की स्थापना कराई थी। पहले यहां समय-समय पर तांत्रिक इकट्ठा हुआ करते थे। कालांतर में जब मंदिर ध्वस्त हो गया तो 64 योगिनियों की प्रतिमाएं खंडित हो गई। लगभग 20 प्रतिमाएं धुबेला म्यूजियम में स्थापित की गई हैं। पांच प्रतिमाएं कोलकाता म्यूजियम में रखी हैं। बाकी बची हुई मूर्तियां यहीं पर स्थापित हैं।
