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Sehore Weather: मूसलाधार बारिश से आष्टा में हाहाकार, नदियां उफान पर, बाजार जलमग्न; किसानों की फसलें बर्बाद
Sat, 26 Jul 2025 02:52 PM IST
सीहोर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jul 2025 02:52 PM IST
सार
Sehore Weather: आष्टा में रात दो बजे से हो रही मूसलाधार बारिश ने कहर ढा दिया। नदियां उफान पर हैं और खेतों से लेकर दुकानों तक पानी ही पानी नजर आ रहा है। पुराने बस स्टैंड क्षेत्र की 20 से ज्यादा दुकानों में पानी घुस गया। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से लोगों में गुस्सा है।
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आष्टा में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सीहोर के आष्टा ब्लॉक में शनिवार तड़के शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने नगर और ग्रामीण अंचल को पूरी तरह संकट में डाल दिया। तड़के दो बजे शुरू हुई बारिश सुबह आठ बजे तक लगातार होती रही, जिससे नगर में 39 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इस तेज बारिश ने जहां शहर के प्रमुख बाजारों को जलमग्न कर दिया, वहीं किसानों की खड़ी फसलें पानी में डूब गईं। पार्वती, पपनास, नेवज और दूधी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा और गहरा गया है।
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बाजारों में पानी, व्यापारियों को भारी नुकसान
जानकारी के मुताबिक, नगर के पुराने बस स्टैंड, बुधवारा और परदेसीपुरा क्षेत्र की करीब 20 दुकानों में बारिश का पानी घुस गया। दुकानदार राकेश जैन और इमरान कुरैशी ने नाराजगी जताते हुए बताया कि कुछ ही दिन पहले ऐसी ही स्थिति बनी थी, लेकिन नगर पालिका ने कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया। दुकानों में रखे कपड़े, राशन, और इलेक्ट्रॉनिक सामान पूरी तरह भीग गया है। दुकानदारों का कहना है कि हर साल उन्हें इसी तरह नुकसान उठाना पड़ता है और प्रशासनिक लापरवाही उनके व्यवसाय को लगातार चोट पहुंचा रही है।
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खेतों में जलभराव, फसलें तबाह
ग्राम खमरिया के किसान राम सिंह और कमल सिंह परमार ने बताया कि रातभर की बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है। मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। खेतों में कीचड़ और पानी फैला हुआ है, जिससे भविष्य की खेती भी प्रभावित हो सकती है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश का सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो जाएगी।
‘कोई सुनने वाला नहीं’
स्थानीय नागरिक विनोद पारख और तेज सिंह पाटीदार ने बताया कि नगर पालिका को कई बार बारिश के मौसम में जल निकासी की समस्या को लेकर आवेदन दिए गए, लेकिन न तो जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया, न ही प्रशासन ने कोई कार्रवाई की। उनका कहना है कि ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है। इस साल अब तक कुल 356 मिमी (14 इंच से अधिक) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 406 मिमी वर्षा हो चुकी थी।
नर्मदा का बढ़ता जलस्तर बना नई चिंता
लगातार बारिश के साथ ही बारना और तवा डैम के गेट खोले जाने, साथ ही बरगी बांध से जल छोड़ने के कारण नर्मदा नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। इसे देखते हुए कलेक्टर बालगुरु के. ने नागरिकों से अपील की है कि वे संभावित बाढ़ग्रस्त और जलभराव वाले क्षेत्रों में न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें। प्रशासन और पुलिस को भी अलर्ट कर दिया गया है। उन्होंने सभी पुल, पुलियों और रपटों पर जलभराव की स्थिति बनने पर आवागमन बंद करने तथा जोखिमपूर्ण इलाकों में नागरिकों को रोकने के निर्देश दिए हैं।
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प्रशासनिक लापरवाही या कुदरत की मार?
तेज बारिश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आष्टा नगर हर साल इस जल संकट से क्यों गुजरता है? खराब ड्रेनेज, लचर नगरपालिका प्रबंधन और प्रशासन की अनदेखी ने लोगों की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं तो हर साल यही हालात दोहराए जाएंगे, बारिश राहत नहीं, आफत बनती रहेगी।
