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Sehore: पत्नी-सास की हत्या करने वाले आरोपी को दोहरे आजीवन कारावास की सजा, बच्चों की जिम्मेदारी सरकार उठाएगी
Mon, 01 May 2023 07:44 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Mon, 01 May 2023 07:44 PM IST
सार
सीहोर जिले में पत्नी और सास की हत्या करने वाले आरोपी को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही कोर्ट ने अपनी स्पष्ट टिप्पणी में कहा, अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी सरकारी उठाएगी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सीहोर में जघन्य एवं सनसनीखेज अपराध में पत्नी और सास की हत्या करने वाले आरोपी को न्यायालय ने दोहरे आजीवन कारावास से दंडित किया गया। यह फैसला तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश अभिलाष जैन ने सुनाया। मामले में अभियुक्त राजमल राठौर पिता कुंवर जी राठौर निवासी फ्रीगंज, बिलकिसगंज जिला सीहोर को धारा-302 भादवि में आजीवन कारावास और कुल चार हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। कोर्ट ने अपनी स्पष्ट टिप्पणी में कहा, मामले में माता के मृत होने तथा पिता को सजा होने पर तीन संतानों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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मीडिया सेल प्रभारी केदार सिंह कौरव ने बताया, फरियादी जितेन्द्र चौधरी की बहन सुमन बाई उसे गेहूं लेने के लिए कुछ दिनों से अपने घर बुला रही थी। फरियादी पांच मई 2020 को अपने चचेरे भाई विनोद चौधरी के साथ सुबह के करीब आठ बजे अपनी बहन सुमन बाई (मृतिका) के घर फ्रीगंज बिलकिसगंज गेहूं लेने के लिए गया तो देखा कि घर का दरवाजा बाहर से बंद था। दरवाजा खोला तो बाहर वाले रूम में उसकी बहन चटाई पर पड़ी हुई थी और भांजी सिया व भांजा राम पास में ही बैठे हुए थे। जब फरियादी ने बहन सुमन बाई को आवाज लगाकर जगाया तो उसकी बहन नहीं बोली।
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भांजी सिया ने बताया कि मम्मी और नानी को रात में पापा ने मारा था। जब अन्दर वाले रूम में जाकर देखा तो उसकी मां लीलाबाई खाट पर चित पड़ी थी और उसके बाएं तरफ गर्दन पर गहरा घाव था। खाट के नीचे जमीन पर खून पड़ा हुआ था और उसकी मौत हो चुकी थी। फिर बाहर वाले रूम में आकर अपनी बहन सुमनबाई को पास से देखा तो सुमनबाई के गर्दन पर नीला निशान था तथा सुमन बाई भी मृत पड़ी थी। रात में फरियादी के जीजा राजमल ने मेरी मां लीलाबाई और बहन सुमनबाई की हत्या कर दी। उसके बाद 100 नम्बर पर फोन लगाकर पुलिस को बुलाया तथा अपने चचेरे भाई विनोद के साथ थाने पर रिपोर्ट लेख कराई।
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फरियादी की सूचना पर थाना बिलकिसगंज में मर्ग पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई और आरोपी को पुलिस अभिरक्षा में लिया। तब आरोपी ने हत्या करना स्वीकार किया। उसके बाद शव परीक्षण और जांच में धारा-302 भादवि का अपराध घटित होना पाया, जिस पर सम्पूर्ण विवेचना उपरांत अभियोग-पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। न्यायालय ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य, अंतिम बहस के दौरान अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए आरोपी को दोष सिद्ध किया गया। शासन की ओर से मामले में पैरवी जिला अभियोजन अधिकारी अनिल कुमार बादल ने की गई। मामले का अनुसंधान एसआई केजी शुक्ला ने किया।
कोर्ट ने कहा- अनाथ संतानों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सरकार की होगी...
न्यायाधीश की ओर से मामले में स्पष्ट टिप्पणी करते हुए यह लेख किया गया है कि मृतिका की तीन संताने हैं और उन संतानों की मां की हत्या हो चुकी है। पिता को दोहरा आजीवन कारावास हुआ है। ऐसी स्थिति में संतानों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सरकार की है। न्यायाधीश द्वारा नालसा स्कीम Compensation Scheme for Women Victims/Survivors of Sexual Assault/Other Crimes-2018 के तहत संतानों के भरण पोषण के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण सीहोर को मामला रेफर किया है। स्कीम के तहत न्यूनतम पांच लाख रुपये और अधिकतम 10 लाख रुपये का प्रावधान है।
