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Navratri 2023: मरीह माता मंदिर में महाष्टमी पर होगी महानिशा आरती, हर दिन हो रहे दिव्य रूपों में श्रृंगार

Tue, 17 Oct 2023 07:28 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Tue, 17 Oct 2023 07:28 AM IST
सार

Navratri 2023: सीहोर के प्रसिद्ध मरीह माता मंदिर में धूमधाम से नवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता की पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं। वहीं महाअष्टमी पर मंदिर में महानिशा आरती की जाएगी। 

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Navratri 2023: Mahanisha Aarti will be held on Mahashtami in Marih Mata temple,
मरीह माता मंदिर, सीहोर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीहोर में हर साल की तरह इस साल भी शहर के विश्रामघाट स्थित प्रसिद्ध मरीह माता मंदिर में शक्ति की साधना और उपासना के शारदीय नवरात्र का पर्व आस्था और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यहां पर अल सुबह श्रद्धालुओं के द्वारा हवन पूजन का आयोजन किया जाता है। वहीं प्रतिदिन विशेष श्रृंगार किया जा रहा है। वहीं महाष्टमी पर महानिशा आरती का आयोजन रात्रि बारह बजे किया जाएगा। मंगलवार को मां चंद्रघंटा की आराधना की जाएगी।
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सोमवार को शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मंदिर के व्यवस्थापक रोहित मेवाड़ा, ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश शर्मा, मनोज दीक्षित मामा सहित अन्य ने मां ब्रह्मचारिणी माता की पूर्ण विधि-विधान से पूजा अर्चना की। इस मौके पर पंडित शर्मा ने बताया कि देवी माँ या निर्मल चेतना स्वयं को सभी रूपों में प्रत्यक्ष करती है,और सभी नाम ग्रहण करती है। माँ दुर्गा के नौ रूप और हर नाम में एक दैवीय शक्ति को पहचानना ही नवरात्रि मनाना है। असीम आनन्द और हर्षोल्लास के नौ दिनों का उचित समापन बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक पर्व दशहरा मनाने के साथ होता है। नवरात्रि पर्व की 9 रातें देवी माँ के 9 विभिन्न रूपों को को समर्पित हैं जिसे नवदुर्गा भी कहा जाता है।
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उन्होंने बताया कि शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। 16 अक्तूबर को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की गई। ये मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप और नौ शक्तियों में से दूसरी शक्ति हैं। मां दुर्गा का यह स्वरूप ज्योर्तिमय है। ब्रह्मा की इच्छाशक्ति और तपस्विनी का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। साथ ही कुंडली में मंगल ग्रह से जुड़े सारे दोषों से मुक्ति मिल जाती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सभी कार्य पूरे होते हैं, रुकावटें दूर होती हैं और विजय की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जीवन से हर तरह की परेशानियां भी खत्म होती हैं।
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