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एक विवाह ऐसा भी: लिवइन में रह रहे प्रेमी जोड़े ने संविधान को साक्षी मानकर रचाई शादी, सात फेरे भी अनूठे
Mon, 12 Jun 2023 07:33 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 12 Jun 2023 07:33 PM IST
सार
नवजोड़े का कहना है कि संविधान के विवाह एक्ट के अनुसार संविधान को साक्षी मानकर ही हम दोनों ने मित्रों के साथ बाबा साहेब की जन्म स्थली महू पहुंचकर उनकी प्रतिमा के समक्ष वरमाला की और जीवन भर साथ रहने की संविधान की किताब को हाथों में लेकर शपथ ग्रहण की।
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नवजोड़े ने संविधान को साक्षी मानकर शादी की।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सीहोर में संविधान को साक्षी मानकर शादी करने का मामला सामने आया है। एक युवक ने लिव इन रिलेशनशिप में रह रही लड़की से बाकायदा शादी कर ली। दोनों ने जन्मस्थली महू पहुंचकर बाबा साहेब की प्रतिमा के सात फेरे लिए।
दूल्हा बने युवक राजेश पिता अमर सिंह मालवीय निवासी ग्राम सेमलीखुर्द तहसील जिला सीहेार ने बताया कि हम दोनों युवा हैं। प्रियंका मालवीय निवासी मुख्तार नगर तहसील श्यामपुर जिला सीहोर लंबे समय से मेरे साथ प्रेमपूर्वक रह रही थीं। संविधान के विवाह एक्ट के अनुसार संविधान को साक्षी मानकर ही हम दोनों ने मित्रों के साथ बाबा साहेब की जन्म स्थली महू पहुंचकर उनकी प्रतिमा के समक्ष वरमाला की और जीवन भर साथ रहने की संविधान की किताब को हाथों में लेकर शपथ ग्रहण की। यह शादी रूढ़ीवादी समाज को अच्छा संदेश देने के लिए की गई है।
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दुल्हन बनी प्रियंका मालवीय ने कहा कि संविधान में मेरी अटूट आस्था है। बाबा साहेब ने हमें अनेक अधिकार दिए हैं, जिसमें बिना लाखों रुपये खर्च कर भी शादी की जा सकती है। हमारी शादी संविधान को साक्षी मानकर के बाबा साहेब की प्रतिमा के समक्ष हुई है। यह मेरे लिए गर्व की बात है। युवक युवती परिजनों की सहमति से शांति पूर्वक बिना खर्च के बाबा साहेब को साक्षी मानकर विवाह संपन्न करा सकते हैं।
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दूल्हा बने युवक राजेश पिता अमर सिंह मालवीय निवासी ग्राम सेमलीखुर्द तहसील जिला सीहेार ने बताया कि हम दोनों युवा हैं। प्रियंका मालवीय निवासी मुख्तार नगर तहसील श्यामपुर जिला सीहोर लंबे समय से मेरे साथ प्रेमपूर्वक रह रही थीं। संविधान के विवाह एक्ट के अनुसार संविधान को साक्षी मानकर ही हम दोनों ने मित्रों के साथ बाबा साहेब की जन्म स्थली महू पहुंचकर उनकी प्रतिमा के समक्ष वरमाला की और जीवन भर साथ रहने की संविधान की किताब को हाथों में लेकर शपथ ग्रहण की। यह शादी रूढ़ीवादी समाज को अच्छा संदेश देने के लिए की गई है।
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दुल्हन बनी प्रियंका मालवीय ने कहा कि संविधान में मेरी अटूट आस्था है। बाबा साहेब ने हमें अनेक अधिकार दिए हैं, जिसमें बिना लाखों रुपये खर्च कर भी शादी की जा सकती है। हमारी शादी संविधान को साक्षी मानकर के बाबा साहेब की प्रतिमा के समक्ष हुई है। यह मेरे लिए गर्व की बात है। युवक युवती परिजनों की सहमति से शांति पूर्वक बिना खर्च के बाबा साहेब को साक्षी मानकर विवाह संपन्न करा सकते हैं।
