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UPSC Success Story: सबइंस्पेक्टर की बेटी बनी IPS अफसर, टीना डाबी से प्रेरित होकर पाई पहले ही प्रयास में सफलता

Wed, 17 Apr 2024 04:52 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, सतना
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, सतना Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 17 Apr 2024 04:52 PM IST
सार

कोलगवां थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर विजय सिंह की बेटी काजल ने टीना डाबी से इंस्पायर होकर महज 22 साल में यूपीएससी क्रैश किया है। 2015 की यूपीएससी टॉपर टीना डाबी से इंस्पायर हुई हूं। उस समय कक्षा 9वीं की पढ़ाई कर रही थी। इस सपने को वहीं से बुनने  शुरू कर दिए थे। 

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UPSC: Sub Inspector's daughter became IPS officer, inspired by Tina Dabi, got success in the first attempt
कोलगवां थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर विजय सिंह की बेटी काजल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सतना कोलगवां थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर की बेटी ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्रैक की है। 485वीं रैंक हासिल कर आईपीएस में चयन हुआ है। टीना डाबी से प्रेरणा लेकर उन्होंने ये मुकाम हासिल किया है। 
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बता दें कि कोलगवां थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर विजय सिंह की बेटी काजल ने टीना डाबी से इंस्पायर होकर महज 22 साल में यूपीएससी क्रैश किया है। शहर के उतैली स्थित ने स्थित मकान में काजल का पूरा परिवार रहता है। यह मूलतः उत्तर प्रदेश चित्रकूट जिला अंतर्गत मानिकपुर के नजदीक रानीपुर की रहने वाली है। यूपीएससी क्रैश करने वाली काजल दिल्ली में है। पिता विजय सिंह मैहर स्थित शारदा मंदिर चैत्र नवरात्रि में लेकर ड्यूटी करने गए हैं। सबसे बड़ी बेटी इंदौर में रहकर एमपीपीएससी की तैयारी कर रही है। घर में सिर्फ मां मीरा सिंह व छोटा भाई है।
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ऐसे संजोया सपना
काजल कहती हैं कि खुश हूं कि पहले ही अटेम्प्ट में सफलता मिली है। 2015 की यूपीएससी टॉपर टीना डाबी से इंस्पायर हुई हूं। उस समय कक्षा 9वीं की पढ़ाई कर रही थी। इस सपने को वहीं से बुनने  शुरू कर दिए थे। यूपीएससी की तैयारी के लिए प्लेन बीए किया। सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रही। हर दिन 8 से 10 घंटे सेल्फ स्टडी की। जुलाई 2022 में दिल्ली के करोल बाग में कोचिंग ज्वाइन की। 10 माह बाद में 2023 में प्री का पेपर हुआ। काजल ने कहा एक से लेकर 12वीं की पढ़ाई सेंट माइकल स्कूल से की है। 2017 में दसवीं कक्षा में 95% अंक अर्जित किया। 12वीं का गणित समूह में 91 प्रतिशत लाकर माता-पिता का मनोबल जीता।
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(काजल के पिता अभी मैहर में तैनात हैं) 

जब तक सफलता न मिले तब तक हर ना मानें
काजल ने डिग्री कॉलेज में दाखिला लिया। बीए में इतिहास राजनीति विज्ञान व अर्थशास्त्र विषय पर फोकस किया। उसने आर्ट समूह में 81% के साथ ग्रेजुएशन कंप्लीट किया। इसके बाद दिल्ली कोचिंग करने चली गईं साथ ही इग्नू से एमए कर रही हैं। काजल ने कहा कि दिल्ली में कोचिंग में किसी दिन एक या दो क्लास लगे। पर रूम में खुद को 8 से 10 घंटे कैद कर लिया। तैयारी करने वाले लक्ष्य बनाएं जब तक सफलता न मिले तब तक हर ना मानें।

मां ने किया संघर्ष
काजल की मां मीरा सिंह ने बताया कि दो बेटी व एक बेटा को अच्छी शिक्षा देने के लिए कोई सोने चांदी के जेवर नहीं खरीदे। सिर्फ शादी का एक मंगलसूत्र है। पति विजय सिंह कहते हैं कि बेटी तो गहना ही है। यह सफलता की सीढ़ी चढ़ गई है तो फिर गहने ही गहने हैं। बातचीत में कहा कि हमारी विजय सिंह से शादी 1995 में हुई थी। वे पहले छत्तीसगढ़ में थे। बंटवारे के बाद सतना आ गए। मायका रामपुर बघेलान के पंडखुड़ी में है। बेटियों को कक्षा 1 से लेकर पांचवीं तक खुद पढ़ाया है। 
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