संघ नेताओं को पुलिस ने दी क्लीन चिट
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मध्य प्रदेश पुलिस ने व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) घोटाले में संघ नेताओं सुदर्शन और सुरेश सोनी को क्लीन चिट दे दी है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में इन दोनों नेताओं का नाम नहीं है।
इस मामले में कांग्रेस द्वारा खुद का नाम घसीटे जाने पर सोनी ने कहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची जा रही है। पूर्व भाजपा नेता गोविंदाचार्य के बयान ने प्रदेश के सियासी हलकों सनसनी ही फैला दी कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान संघ नेताओं के नामों के जरिए मामले से ध्यान बंटाने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस मुख्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि पूर्व परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी की हार्ड डिस्क से ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है, जिसमें संघ नेताओं का नाम आता हो। बयान में कहा गया है कि सुदर्शन का निधन अक्तूबर में हो गया था और नापतौल अधिकारी की परीक्षा नवंबर में हुई।
पुलिस की क्लीन चिट हाईकोर्ट की अवमानना
हालांकि पुलिस ने यह नहीं बताया कि नापतौल अधिकारी के जिस पद पर मिहिर कुमार के नाम की सिफारिश की गई थी, उसके आवेदन का विज्ञापन सुदर्शन की मृत्यु से पहले जारी हुआ था।
पुलिस के इस बयान से यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि उसने संघ नेताओं के बचाव में बयान जारी क्यों किया, जबकि वह सरकार में नहीं हैं। कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया का कहना है कि पुलिस की क्लीन चिट हाईकोर्ट की अवमानना है क्योंकि जब तक अदालत का फैसला नहीं आता, पुलिस क्लीन चिट नहीं दे सकती।
म.प्र. लोकसेवा आयोग (एमपीपीएससी) की 2008 में हुई बहुत सारी भर्तियां सवालों के घेरे में हैं। एसटीएफ ने एमपीपीएससी की 2008 की परीक्षा को जांच के दायरे में ले लिया है। उधर आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने आरोप लगाए हैं कि 2006 में एमपीपीएससी के अध्यक्ष प्रदीप जोशी की नियुक्ति आरएसएस के प्रमुख प्रचारक की सिफारिश पर हुई थी।
