दमोह जिला अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल: शव वाहन का इंतजार करते रहे परिजन, आखिर ऑटो से ले जाना पड़ा शव
दमोह जिला अस्पताल में मृतक के परिजनों को करीब दो घंटे बारिश में शव वाहन का इंतजार करना पड़ा। वाहन नहीं पहुंचने पर परिजन निजी ऑटो से शव पीएम हाउस ले गए। मामले में अस्पताल प्रबंधन ने जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही।
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किसी परिवार में मौत का दुख पहले ही असहनीय होता है। ऐसे में अंतिम प्रक्रिया के लिए शव ले जाने के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़े तो परिजनों की परेशानी और बढ़ जाती है। दमोह जिला अस्पताल में शनिवार को ऐसा ही मामला सामने आया। मृतक के परिजनों का आरोप है कि वे करीब दो घंटे तक बारिश में शव वाहन का इंतजार करते रहे, लेकिन वाहन नहीं पहुंचा। आखिरकार उन्हें निजी ऑटो की व्यवस्था कर शव को पोस्टमार्टम हाउस ले जाना पड़ा। इस दौरान शव ऑटो से आधा बाहर लटकता हुआ नजर आया।
दो शव वाहन, फिर भी नहीं मिली सुविधा
जानकारी के अनुसार प्रिंस राय पिता दीपक राय की अज्ञात कारणों से तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। परिजन उसे उपचार के लिए दमोह लेकर पहुंचे थे। परिजनों के मुताबिक, रास्ते में ही प्रिंस ने दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को जिला अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखवा दिया गया।
शनिवार को पोस्टमार्टम के लिए शव को पीएम हाउस ले जाने के लिए परिजनों ने शव वाहन से संपर्क किया। उनका कहना है कि करीब दो घंटे तक वे बारिश के बीच शव वाहन का इंतजार करते रहे, लेकिन वाहन उपलब्ध नहीं हुआ। इसके बाद निजी ऑटो की व्यवस्था कर शव को पीएम हाउस ले जाना पड़ा। ऑटो से शव ले जाने के दौरान उसका एक हिस्सा बाहर लटकता हुआ दिखाई दिया।
तीन पायलट की ड्यूटी, फिर भी क्यों नहीं पहुंचा वाहन?
जिला अस्पताल में प्रशासन की ओर से दो शव वाहन उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। इनके संचालन के लिए तीन पायलट नियुक्त हैं। जानकारी के अनुसार दो पायलट सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक और एक पायलट रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक ड्यूटी करता है। इसके बावजूद परिजनों को समय पर शव वाहन नहीं मिलने से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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एक पायलट सागर में, दूसरे ने कहा- नहीं मिला इवेंट
परिजनों के अनुसार शव वाहन के लिए संपर्क करने पर संतोष पुरी से बातचीत हुई। उन्होंने खुद के सागर में होने की जानकारी दी। वहीं दूसरे पायलट रूपेश रजक कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे। परिजनों के मुताबिक, रूपेश ने बताया कि उन्हें इस संबंध में कोई इवेंट नहीं मिला था और जानकारी मिलने के बाद वे तत्काल मौके पर पहुंचे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शव वाहन के लिए पायलट की ड्यूटी निर्धारित है, तो सूचना मिलने के बावजूद वाहन समय पर क्यों नहीं पहुंचा?
अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल
जिला अस्पताल में मरीजों और मृतकों के परिजनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं। लेकिन शव वाहन जैसी जरूरी सुविधा के लिए परिजनों को बारिश में करीब दो घंटे इंतजार करना पड़ा। इससे अस्पताल की व्यवस्था और सूचना तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक के चाचा राजू राय ने जिम्मेदारों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं मृतक के दादा विजय राय के अनुसार प्रिंस की तबीयत गैस बनने के बाद बिगड़ी थी और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई थी।
प्रबंधन बोला- जांच के बाद होगी कार्रवाई
जिला अस्पताल प्रबंधक डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह ने मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि शव वाहन समय पर क्यों नहीं पहुंचा और इस मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
