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राजनाथ बोले, 'हिंदी को यूएन की भाषा का दर्जा मिले'

Sun, 13 Sep 2015 09:03 AM IST
Updated Sun, 13 Sep 2015 09:03 AM IST
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Rajnath seek UN to adopt Hindi as there language

विश्व हिंदी सम्मेलन के समापन भाषण में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंदी को निश्चित तौर पर संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि अगर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए 177 राष्ट्रों का समर्थन हासिल किया जा सकता है तो हिंदी के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता। हमें इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोशिश करनी चाहिए। इस मौके पर विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने बताया कि अगला विश्व हिंदी सम्मेलन मॉरीशस में होगा।
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इसके साथ ही गृह मंत्री ने हिंदी को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों से अपने उत्पादों पर हिंदी के साथ ही क्षेत्रीय भाषा और इंग्लिश में भी नाम लिखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वह यह थोप नहीं रहे हैं लेकिन सभी को इस पर विचार करना चाहिए। हमारे नेतृत्व की कमी के कारण हिंदी राष्ट्र भाषा नहीं बन पाई। क्षेत्रीय भाषा पर राजनीति करने वाले नेता भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
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हम आजादी के इतने सालों बाद भी हिंदी को स्थान नहीं दिला पाए हैं। कोई अन्य भाषा हिंदी जितनी वैज्ञानिक नहीं है। हिंदी ने आजादी की लड़ाई में सबको एक किया है। ज्यादा बोले जाने के कारण हिंदी सभी भाषाओं के नजदीक है।

हिंदी भारतीय भाषाओं की बड़ी बहन है। कंपनियां आर्थिक कारणों से हिंदी को बढ़ावा दे रही हैं। हिंदी राजभाषा के साथ-साथ संपर्क की भाषा भी है।

भाषा और साहित्य के बीच बहस पैदा कर समाप्त हुआ सम्मेलन

Rajnath seek UN to adopt Hindi as there language

तीन दिनी 10वां विश्व हिंदी सम्मेलन भाषा और साहित्य के बीच नयी बहस पैदा करके समाप्त हो गया। इस अंतरराष्ट्रीय समागम के बाहर और भीतर विषय से ज्यादा इस बात पर बहस चलती रही कि साहित्य को दूर रखकर क्या किसी भाषा का विस्तार और समृद्धि मुमकिन है।

यूं भारत में यह तीसरा विश्व हिंदी सम्मेलन था, लेकिन केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार के लिहाज से पहला होने के कारण इसको वैचारिक चश्मे से भी देखा गया।

इसके विषय से लेकर आमंत्रित लोगों, प्रतिनिधियों और विचारकों वगैरह पर आलोचकों-समीक्षकों की नजरें जमी रहीं। यही कारण रहा कि अमिताभ बच्चन को बुलाने और हिंदी के नामी साहित्यकारों को दूर रखने के औचित्य पर भी सवाल खड़े किए जाते रहे।

विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह की साहित्यकारों को लेकर सामने आई कथित विवादास्पद टिप्पणी ने आग में घी का काम किया।

उसके बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यह कहकर संशय दूर कर दिया कि यह सम्मेलन भाषा केंद्रित है। लिहाजा तीन दिन के सम्मेलन में पूरी चर्चा का फोकस हिंदी के सरकारीकरण और उसकी शुद्धता पर रहा।

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