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Omkareshwar: ओंकारेश्वर बस स्टैंड में अव्यवस्थाओं से श्रद्धालुओं को हो रही परेशानियां, व्यवस्थित संचालन की उठी
Sun, 29 Sep 2024 09:56 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 29 Sep 2024 09:56 PM IST
सार
अगर प्रशासन इंदौर सरवटे बस स्टैंड की तर्ज पर ओंकारेश्वर बस स्टैंड का संचालन व्यवस्थित करता है, तो आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सकेगा और ओंकारेश्वर की छवि में सुधार होगा।
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ओंकारेश्वर में बस स्टैंड की अव्यवस्थाओं का मुद्दा कई बार उठ चुका है।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में चौथे स्थान पर आता है, यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं का आवागमन है। इसके बावजूद, नगर के एकमात्र बस स्टैंड की बदहाल स्थिति और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यहां आने वाले यात्रियों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
ओंकारेश्वर का लोकेंद्र सिंह बस स्टैंड, जो 2016 सिंहस्थ के दौरान चार करोड़ की लागत से बनाया गया था, आज प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अव्यवस्था का केंद्र बन गया है। नगर परिषद ओंकारेश्वर को बस स्टैंड के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन अब यहां की स्थिति काफी बिगड़ चुकी है। इंदौर, उज्जैन, खंडवा, धार, और अन्य प्रमुख शहरों के लिए बसें बिना किसी निश्चित क्रम के खड़ी होती हैं, जिससे यात्रियों को बस का पता लगाना कठिन हो जाता है।
टेंपो स्टैंड की अव्यवस्था और यातायात बाधाएं
बस स्टैंड पर तीन पहिया वाहन (टेंपो) की भी कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं है, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। जब भी बसें स्टैंड पर पहुंचती हैं, तो टेंपो चालकों की भीड़ यात्रियों को अपनी ओर खींचने में लग जाती है। इससे आए दिन विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जो कभी भी किसी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
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जनप्रतिनिधियों द्वारा मांगी गई सुविधाएं
ओंकारेश्वर विकास संघर्ष समिति के पदाधिकारियों, जैसे विजय जैन, ललित दुबे, जयप्रकाश पुरोहित, और अन्य जनप्रतिनिधियों ने बस स्टैंड की अव्यवस्थाओं के बारे में कई बार आवाज उठाई है। हाल ही में डिप्टी कलेक्टर काशीराम बडोले और नगर परिषद सीएमओ संजय गीते की उपस्थिति में एक बैठक आयोजित की गई थी, जहां जनप्रतिनिधियों ने बस स्टैंड की सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग रखी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी व्यवस्थाएं ठीक कर दी जाएंगी, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि
महाकाल लोक के बनने के बाद ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 10 हजार श्रद्धालु ओंकारेश्वर आते थे, अब यह संख्या 50 हजार तक पहुंच गई है। इसके बावजूद, बस स्टैंड पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव और यातायात की अव्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई है।
समाधान की मांग
समिति के सदस्यों ने प्रशासन से मांग की है कि बसों को उनके निर्धारित प्लेटफॉर्म पर खड़ा करने की व्यवस्था की जाए, ताकि यात्रियों को पता चल सके कि कौन सी बस किस रूट पर जाएगी। इसके अलावा, टेंपो चालकों पर भी नियंत्रण रखने की आवश्यकता है ताकि टेंपो और बसों के बीच होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। अगर प्रशासन इंदौर सरवटे बस स्टैंड की तर्ज पर ओंकारेश्वर बस स्टैंड का संचालन व्यवस्थित करता है, तो आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सकेगा और ओंकारेश्वर की छवि में सुधार होगा।
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ओंकारेश्वर का लोकेंद्र सिंह बस स्टैंड, जो 2016 सिंहस्थ के दौरान चार करोड़ की लागत से बनाया गया था, आज प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अव्यवस्था का केंद्र बन गया है। नगर परिषद ओंकारेश्वर को बस स्टैंड के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन अब यहां की स्थिति काफी बिगड़ चुकी है। इंदौर, उज्जैन, खंडवा, धार, और अन्य प्रमुख शहरों के लिए बसें बिना किसी निश्चित क्रम के खड़ी होती हैं, जिससे यात्रियों को बस का पता लगाना कठिन हो जाता है।
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टेंपो स्टैंड की अव्यवस्था और यातायात बाधाएं
बस स्टैंड पर तीन पहिया वाहन (टेंपो) की भी कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं है, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। जब भी बसें स्टैंड पर पहुंचती हैं, तो टेंपो चालकों की भीड़ यात्रियों को अपनी ओर खींचने में लग जाती है। इससे आए दिन विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जो कभी भी किसी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
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जनप्रतिनिधियों द्वारा मांगी गई सुविधाएं
ओंकारेश्वर विकास संघर्ष समिति के पदाधिकारियों, जैसे विजय जैन, ललित दुबे, जयप्रकाश पुरोहित, और अन्य जनप्रतिनिधियों ने बस स्टैंड की अव्यवस्थाओं के बारे में कई बार आवाज उठाई है। हाल ही में डिप्टी कलेक्टर काशीराम बडोले और नगर परिषद सीएमओ संजय गीते की उपस्थिति में एक बैठक आयोजित की गई थी, जहां जनप्रतिनिधियों ने बस स्टैंड की सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग रखी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी व्यवस्थाएं ठीक कर दी जाएंगी, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि
महाकाल लोक के बनने के बाद ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 10 हजार श्रद्धालु ओंकारेश्वर आते थे, अब यह संख्या 50 हजार तक पहुंच गई है। इसके बावजूद, बस स्टैंड पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव और यातायात की अव्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई है।
समाधान की मांग
समिति के सदस्यों ने प्रशासन से मांग की है कि बसों को उनके निर्धारित प्लेटफॉर्म पर खड़ा करने की व्यवस्था की जाए, ताकि यात्रियों को पता चल सके कि कौन सी बस किस रूट पर जाएगी। इसके अलावा, टेंपो चालकों पर भी नियंत्रण रखने की आवश्यकता है ताकि टेंपो और बसों के बीच होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। अगर प्रशासन इंदौर सरवटे बस स्टैंड की तर्ज पर ओंकारेश्वर बस स्टैंड का संचालन व्यवस्थित करता है, तो आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सकेगा और ओंकारेश्वर की छवि में सुधार होगा।
