ओबीसी आरक्षण विवाद: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी रिजल्ट नहीं, सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों ने भेजा नोटिस
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण विवाद के बीच सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं होने पर मुख्य सचिव समेत अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा है। उम्मीदवारों ने रोके गए 13 प्रतिशत पदों के परिणाम घोषित करने की मांग की है।
विस्तार
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण विवाद में उच्च न्यायालय के निर्णय पर अमल न होने के विरोध में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों ने मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को कानूनी सूचना पत्र भेजा है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों की ओर से यह कदम उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी परिणाम जारी न करने पर उठाया गया है। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने उम्मीदवारों की ओर से इस विधिक सूचना पत्र को भेजे जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं कर रही है।
अदालती आदेश का पालन न करने का आरोप
कानूनी सूचना पत्र में राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। उच्च न्यायालय में सामान्य वर्ग की पैरवी करने वाले अधिवक्ता ने बताया कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की कई परीक्षाओं में 13 प्रतिशत पदों को लंबित रखा गया है। अदालत से स्पष्ट आदेश प्राप्त होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर इन रोके गए परिणामों को घोषित नहीं किया जा रहा है। इस स्थिति से प्रभावित अभ्यर्थियों ने शासन के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को वैधानिक नोटिस जारी किया है। मुख्य सचिव के अलावा सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग को भी इस नोटिस की प्रति प्रेषित की गई है।
पढ़ें: र्नब कमजोर, फिर भी एमपी में क्यों हो रही बारिश?: कई जिलों में आज तेज हवाओं के साथ बरसात का अलर्ट, गिरा तापमान
रोके गए पदों के परिणाम का मामला
यह कानूनी विवाद मुख्य रूप से उन प्रतियोगी अभ्यर्थियों से संबंधित है जो लोक सेवा आयोग की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के अंतर्गत साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। 13 प्रतिशत श्रेणी के तहत साक्षात्कार देने के उपरांत भी इन अभ्यर्थियों के परिणाम आयोग द्वारा रोक कर रखे गए हैं। लंबे समय से परिणाम घोषित न होने के कारण उम्मीदवारों के मन में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। उच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का पालन कराने के लिए अभ्यर्थियों ने प्रशासनिक अधिकारियों से अविलंब कदम उठाने का अनुरोध किया है।
आरक्षण संबंधी फैसला और वर्तमान स्थिति
उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने 9 अक्तूबर को जारी आदेश में 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण संबंधी अधिनियम को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इसके साथ ही लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य चयन एजेंसियों को निर्देश दिए गए थे कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सिर्फ 14 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण के आधार पर ही परिणाम जारी करें। अदालत ने होल्ड किए गए 13 प्रतिशत पद अनारक्षित श्रेणी को देने के आदेश दिए थे और इस पर अमल करने के लिए कहा था। सर्वोच्च न्यायालय में केस दायर करने की कवायद के बीच अब उम्मीदवारों ने यह कानूनी नोटिस भेजा है।
