रेप पीड़ितों को सुलह की सलाह न दें जज
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सुप्रीम कोर्ट ने रेप पीड़ितों से सुलह के मुद्दे पर सख्ती दिखाते हुए जजों से सुलह की सलाह देने से बचने को कहा है।
कोर्ट ने कहा ऐसा कहके जघन्य अपराध को हल्के में लेने की भूल नहीं करनी चाहिए। जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने मध्य प्रदेश के एक अटेंम्प्ट टू रेप मामले की सुनवाई के दौरान यह बात कही।
इस मामले में आरोपी ने नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार वालों से सुलह की अर्जी दी थी,जिसे निचली अदालत के जज ने खारिज कर दिया था और आरोपी को पांच साल की कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने राहत देते हुए आरोपी की सजा को कम कर दिया था।
इस केस को राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को फिर से मामले की सुनवाई करने का आदेश दिया है।
मद्रास कोर्ट ने दी थी सलाह
इससे पूर्व अपनी तरह का अनूठा फैसला सुनाते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने एक रेपिस्ट को पीड़िता से सुलह के लिए बेल दे दी थी।
सूत्रों के अनुसार नाबालिग रेप पीड़िता के माता-पिता नही हैं और वह अब एक बच्चे को जन्म दे चुकी है। लेकिन पीड़िता ने इस मामले में सुलह के लिए इंकार कर दिया था।
साथ ही सामाजिक संगठनों ने रेप केस में सुलह के खिलाफ आवाज भी उठायी थी।
