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एक मंच पर होंगे मोदी, उमा और आडवाणी
जयप्रकाश पाराशर/भोपाल
Updated Wed, 25 Sep 2013 01:39 AM IST
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मध्यप्रदेश में हैट्रिक बनाने की कोशिश में जुटे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी विधानसभा की चुनावी जंग में नरेंद्र मोदी की जरूरत पड़ रही है।
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मोदी बुधवार को भोपाल में पार्टी के पितामह लालकृष्ण आडवाणी और शिवराज के साथ एक मंच से बोलेंगे। पार्टी को आशंका है कि रेवाड़ी रैली की तरह कहीं जनता सिर्फ मोदी को ही सुनने की जिद न कर बैठे।
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खासतौर पर मोदी के साथ आडवाणी की मौजूदगी पर पैदा होने वाली परिस्थिति से पार्टी नेतृत्व कुछ आशंकित है। मोदी को पीएम उम्मीदवार बनाने के फैसले से रूठने वाले आडवाणी का अभी तक तो रैली में शामिल होने का कार्यक्रम तय है।
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इसलिए भाजपा समेत सभी की निगाह एक साथ एक मंच पर आ रहे आडवाणी और मोदी पर टिकी रहेंगी। दरअसल, अब जनता के साथ ही भाजपा के कार्यकर्ता भी सिर्फ मोदी को सुनना चाहते हैं।
मोदी की मौजूदगी में वे दूसरे नेताओं को हूट करने लगे हैं। रेवाड़ी रैली में लोगों के मूड को भांप कर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह को अपना भाषण जल्दी समाप्त करना पड़ा था।
माना जा रहा है कि आगामी रविवार को दिल्ली में प्रस्तावित मोदी की रैली में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली के शामिल नहीं होने की मुख्य वजह लोगों की सिर्फ मोदी को ही सुनने की मांग को ही माना जा रहा है।
सुषमा तो दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और जेटली दिल्ली से ही राष्ट्रीय राजनीति में आए। बहरहाल, भाजपा के प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार घोषित होने के बाद विधानसभा के चुनावी महाभारत में उतरने जा रहे किसी भी प्रदेश में मोदी की यह पहली रैली है।
भोपाल में चुनावी बिगुल बजाने के बाद मोदी अगले रविवार को दिल्ली प्रदेश विधानसभा के चुनावी महासमर के लिए भी शंख बजाएंगे। आडवाणी खेमा शिवराज को मोदी के समकक्ष खड़ा करने की कोशिश करता रहा है।
खुद आडवाणी भी शिवराज के शासन की प्रशंसा करते रहे हैं। शिवराज ने भी चुनाव प्रचार के लिए विकास यात्रा के शुरुआती दौर में पोस्टरों से मोदी को दूर रखा था, लेकिन अब शिवराज को आखिरकार मोदी को अपने यहां बुलाना ही पड़ा।
