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कंप्यूटर बाबा समेत पांच संतों को मंत्री का दर्जा देकर विवादों में शिवराज, हाईकोर्ट में याचिका दाखिल
राजेश चतुर्वेदी, भोपाल
Updated Wed, 04 Apr 2018 09:58 PM IST
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Madhya Pradesh
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कंप्यूटर बाबा समेत पांच संतों को राज्य मंत्री का दर्जा देकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नए विवाद में फंस गए हैं। सरकार के फैसले के खिलाफ अब हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दाखिल कर दी गई है। वहीं कांग्रेस ने भी इस फैसले पर सवाल उठाते कहा है कि बाबाओं को मंत्री का दर्जा देना शिवराज सरकार की कमजोरी को दिखाता है।
बता दें कि कंप्यूटर बाबा के साथ इंदौर के भय्यू महाराज, अमरकंटक (नर्मदा उद्गम) के हरिहरानंदजी, डिंडोरी के नर्मदानंदजी और पंडित योगेंद्र महंत को राज्य मंत्री पद का दर्जा देने वाला आदेश राज्य सरकार की ओर से मंगलवार को जारी किया गया। इस फैसले के बाद से सरकार और मुख्यमंत्री के फैसले पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। रामबहादुर शर्मा नाम के एक व्यक्ति की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने राज्य मंत्री की संवैधानिकता को लेकर याचिका लगाई है। सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
इतना ही नहीं फैसले के कारण बाबाओं के रुख में भी अचानक बदलाव आया है। कल तक जिन पांचों संतों ने शिवराज सिंह चौहान द्वारा पिछले साल नर्मदा किनारे लगाए गए पौधों और अन्य विकास कार्यों की ‘पोल’ खोलने के लिए ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया था अब मंत्री पद की हैसियत मिलने के बाद इन्होंने अपनी पूर्व की घोषणा से कदम पीछे खींच लिए हैं। अब ये सभी बाबा जनजागरण करने की बात कर रहे हैं।
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नर्मदा सेवा यात्रा कार्यक्रम को बताया था महाघोटाला
बीते 28 मार्च को इंदौर के गोम्मटगिरि स्थित कालिका आश्रम में संतों की एक बैठक में एक अप्रैल से 15 मई तक ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ निकालने का निर्णय लिया गया था। यह भी तय हुआ था कि इस यात्रा के दौरान उन छह करोड़ 67 लाख पौधों की गिनती का काम होगा जो मुख्यमंत्री चौहान की नर्मदा सेवा यात्रा कार्यक्रम के तहत गत वर्ष दो जुलाई को लगाए गए थे। इन बाबाओं ने इस सरकारी मेगा शो को महाघोटाला करार दिया था।
...और एक बैठक के बाद सरकार ने ले लिया फैसला
यह भी चर्चा है कि संत समाज द्वारा ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ के ऐलान के बाद सरकार के स्तर पर हलचल हुई और उसके प्रबंधकों ने 31 मार्च को मुख्यमंत्री शिवराज के साथ कंप्यूटर बाबा सहित तमाम संतों की बैठक करा दी। इसके बाद ही सरकार ने विभिन्न चिह्नित क्षेत्रों, खासकर नर्मदा किनारे के इलाकों में पौधरोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता सहित अन्य विषयों पर जनजागरण के लिए एक कमेटी गठित कर दी और इन बाबाओं को उसका सदस्य बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा दे डाला।
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बता दें कि कंप्यूटर बाबा के साथ इंदौर के भय्यू महाराज, अमरकंटक (नर्मदा उद्गम) के हरिहरानंदजी, डिंडोरी के नर्मदानंदजी और पंडित योगेंद्र महंत को राज्य मंत्री पद का दर्जा देने वाला आदेश राज्य सरकार की ओर से मंगलवार को जारी किया गया। इस फैसले के बाद से सरकार और मुख्यमंत्री के फैसले पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। रामबहादुर शर्मा नाम के एक व्यक्ति की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने राज्य मंत्री की संवैधानिकता को लेकर याचिका लगाई है। सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
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इतना ही नहीं फैसले के कारण बाबाओं के रुख में भी अचानक बदलाव आया है। कल तक जिन पांचों संतों ने शिवराज सिंह चौहान द्वारा पिछले साल नर्मदा किनारे लगाए गए पौधों और अन्य विकास कार्यों की ‘पोल’ खोलने के लिए ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया था अब मंत्री पद की हैसियत मिलने के बाद इन्होंने अपनी पूर्व की घोषणा से कदम पीछे खींच लिए हैं। अब ये सभी बाबा जनजागरण करने की बात कर रहे हैं।
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नर्मदा सेवा यात्रा कार्यक्रम को बताया था महाघोटाला
बीते 28 मार्च को इंदौर के गोम्मटगिरि स्थित कालिका आश्रम में संतों की एक बैठक में एक अप्रैल से 15 मई तक ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ निकालने का निर्णय लिया गया था। यह भी तय हुआ था कि इस यात्रा के दौरान उन छह करोड़ 67 लाख पौधों की गिनती का काम होगा जो मुख्यमंत्री चौहान की नर्मदा सेवा यात्रा कार्यक्रम के तहत गत वर्ष दो जुलाई को लगाए गए थे। इन बाबाओं ने इस सरकारी मेगा शो को महाघोटाला करार दिया था।
...और एक बैठक के बाद सरकार ने ले लिया फैसला
यह भी चर्चा है कि संत समाज द्वारा ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ के ऐलान के बाद सरकार के स्तर पर हलचल हुई और उसके प्रबंधकों ने 31 मार्च को मुख्यमंत्री शिवराज के साथ कंप्यूटर बाबा सहित तमाम संतों की बैठक करा दी। इसके बाद ही सरकार ने विभिन्न चिह्नित क्षेत्रों, खासकर नर्मदा किनारे के इलाकों में पौधरोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता सहित अन्य विषयों पर जनजागरण के लिए एक कमेटी गठित कर दी और इन बाबाओं को उसका सदस्य बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा दे डाला।
वीडियो जारी कर लोगों से की थी यात्रा में भागीदार बनने की अपील
सरकार के ऐलान से पहले कंप्यूटर बाबा व योगेंद्र महंत ने वीडियो जारी कर एक अपील की थी जिसमें उन्होंने आम लोगों से ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ में भागीदार बनने का आग्रह किया था। इस अपील में कंप्यूटर बाबा ने नर्मदा किनारे बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत उत्खनन को उजागर करने का दावा किया था। साथ ही बड़ी संख्या में गौ हत्या को भी उजागर करने की बात कही थी।
ये सुविधाएं मिलेंगी
राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद बाबाओं को वे तमाम सुविधाएं मिलेंगी जो मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य को हासिल होती हैं। इनमें वेतन भत्ते से लेकर वाहन, बंगला, पीए और तमाम सुख सुविधाएं शामिल हैं।
- 7500 रुपये मासिक वेतन
- लाल बत्ती वाला एक वाहन, इसके लिए हर माह 1 हजार किमी यात्रा के लिए डीजल, ड्राइवर
- आवास के लिए 15 हजार रुपये मासिक भत्ता
- सत्कार भत्ता तीन हजार रुपये मासिक
- स्टाफ मिलेगा और अपना पीए रखने की पात्रता
- मोबाइल का बिल
- टीए डीए
भय्यू महाराज ने राज्य मंत्री वाली सुविधाएं लेने से इनकार किया
इस बीच इंदौर के भय्यू महाराज ने एक राज्य मंत्री को मिलने वाली तमाम सुविधाएं लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह समिति के सदस्य होने के नाते अपना दायित्व तो निभाएंगे लेकिन इसके एवज में कोई सुख सुविधा या वेतन भत्ते आदि नहीं लेंगे।
चुनाव जीतने के लिए धार्मिक नेताओं का सहारा : कांग्रेस
कांग्रेस नेता राज बब्बर ने पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने के फैसले को लेकर बुधवार को शिवराज सिंह चौहान सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को विधानसभा चुनाव में जीत के लिए बाबाओं पर भरोसा करना पड़ रहा है। वह सोचते हैं कि बाबाओं पर भरोसा कर वे चुनाव जीत सकेंगे लेकिन यह असंभव है।’
‘भारतीय संस्कृति ने हमेशा संतों का सम्मान किया है। यह पद ठगों को नहीं सम्मानित संतों को दिया गया है। मैं शिवराज सिंह चौहान की सराहना करती हूं और इस फैसले का विरोध करने पर कांग्रेस की निंदा करती हूं।’
- उमा भारती (केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता)
ये सुविधाएं मिलेंगी
राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद बाबाओं को वे तमाम सुविधाएं मिलेंगी जो मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य को हासिल होती हैं। इनमें वेतन भत्ते से लेकर वाहन, बंगला, पीए और तमाम सुख सुविधाएं शामिल हैं।
- 7500 रुपये मासिक वेतन
- लाल बत्ती वाला एक वाहन, इसके लिए हर माह 1 हजार किमी यात्रा के लिए डीजल, ड्राइवर
- आवास के लिए 15 हजार रुपये मासिक भत्ता
- सत्कार भत्ता तीन हजार रुपये मासिक
- स्टाफ मिलेगा और अपना पीए रखने की पात्रता
- मोबाइल का बिल
- टीए डीए
भय्यू महाराज ने राज्य मंत्री वाली सुविधाएं लेने से इनकार किया
इस बीच इंदौर के भय्यू महाराज ने एक राज्य मंत्री को मिलने वाली तमाम सुविधाएं लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह समिति के सदस्य होने के नाते अपना दायित्व तो निभाएंगे लेकिन इसके एवज में कोई सुख सुविधा या वेतन भत्ते आदि नहीं लेंगे।
चुनाव जीतने के लिए धार्मिक नेताओं का सहारा : कांग्रेस
कांग्रेस नेता राज बब्बर ने पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने के फैसले को लेकर बुधवार को शिवराज सिंह चौहान सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को विधानसभा चुनाव में जीत के लिए बाबाओं पर भरोसा करना पड़ रहा है। वह सोचते हैं कि बाबाओं पर भरोसा कर वे चुनाव जीत सकेंगे लेकिन यह असंभव है।’
‘भारतीय संस्कृति ने हमेशा संतों का सम्मान किया है। यह पद ठगों को नहीं सम्मानित संतों को दिया गया है। मैं शिवराज सिंह चौहान की सराहना करती हूं और इस फैसले का विरोध करने पर कांग्रेस की निंदा करती हूं।’
- उमा भारती (केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता)
