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MP पंचायत चुनाव: सरकार सुप्रीम कोर्ट में मॉडिफिकेशन ऑफ ऑर्डर का आवेदन करेगी, सीएम बोले नए सिरे से तथ्य रखेंगे
Thu, 12 May 2022 09:03 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 12 May 2022 09:03 AM IST
सार
MP पंचायत चुनाव: सरकार सुप्रीम कोर्ट में मॉडिफिकेशन ऑफ ऑर्डर का आवेदन करेगी, सीएम बोले नए सिरे से तथ्य रखेंगे
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शिवराज सिंह चौहान दिल्ली में तुषार मेहता से चर्चा करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। विदेश यात्रा रद्द करने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह के साथ दिल्ली पहुंचे और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वकीलों की टीम से चर्चा की। सीएम ने कहा कि हम मॉडिफिकेशन ऑफ ऑर्डर के लिए कोर्ट से आवेदन करेंगे। नए सिरे से कोर्ट के सामने तथ्य रखेंगे।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और सरकार सदैव से यह प्रयत्न करती है कि हम समाज के हर वर्ग को न्याय दें। सामाजिक न्याय सामाजिक समरसता के साथ। इसलिए हमने सदैव प्रयास किया कि ओबीसी को भी उसके अधिकार मिलने चाहिए। मध्य प्रदेश में पाप कांग्रेस ने किया। पंचायत चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई थी, लेकिन कांग्रेस के कार्यकर्ता कोर्ट गए। और उसके कारण बाद में स्थिति यह आई कि ओबीसी के आरक्षण के बाद चुनाव करा लिए जाएं। आज हम अपनी पूरी टीम के साथ गृह एवं विधि मंत्री और नगरीय विकास मंत्री विधि विशेषज्ञों से मिले। एडवोकेट्स की टीम से मिले। प्रमुख रूप से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ भी बैठे। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के साथ भी बातचीत की। सभी बिन्दुओं पर चर्चा की। जिसके बाद हमने यह तय किया है कि हम मॉडिफिकेशन के लिए फिर से सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और ओबीसी आरक्षण के साथ चुनाव कराने के तथ्य फिर एक बार कोर्ट के सामने रखेंगे, हम विश्वास करते है कि ओबीसी को न्याय दिलाने में हम सफल होंगे।
बता दें सुप्रीम कोर्ट में सरकार मॉडिफिकेशन ऑफ ऑर्डर के लिए आवेदन करेगी। इस बीच यदि सुप्रीम कोर्ट कोई नया आदेश नहीं देता है तो फिर राज्य निर्वाचन आयोग बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराएगा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया था कि पंचायत और नगरीय निकायों के चुनावों में ओबीसी आरक्षण के बिना ही 15 दिन के भीतर चुनाव की अधिसूचना जारी की जाए।
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इधर, राज्य निर्वाचन आयोग ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश में चुनाव कराने को लेकर बैठक की। इसमें चुनाव आयुक्त ने साफ कर दिया कि 24 मई से पहले दोनों चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी जाएगी और किसी भी स्थिति में जून में चुनाव करा दिए जाएंगे। प्रदेश सरकार लगातार ओबीसी आरक्षण के साथ ही चुनाव कराने की बात कर रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आरक्षण को लेकर बीजेपी सरकार से कोई उम्मीद नहीं होने की बात कहते हुए निकाय चुनाव में 27 प्रतिशत टिकट ओबीसी को देने का वादा किया है। इस पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी 27 प्रतिशत से अधिक टिकट ओबीसी वर्ग के कार्यकर्ताओं को देने की बात कही है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी दिल्ली में मुलाकात की। हालांकि इस मुलाकात को सौजन्य भेंट बताया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि प्रदेश के ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को तलब किया है।
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और सरकार सदैव से यह प्रयत्न करती है कि हम समाज के हर वर्ग को न्याय दें। सामाजिक न्याय सामाजिक समरसता के साथ। इसलिए हमने सदैव प्रयास किया कि ओबीसी को भी उसके अधिकार मिलने चाहिए। मध्य प्रदेश में पाप कांग्रेस ने किया। पंचायत चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई थी, लेकिन कांग्रेस के कार्यकर्ता कोर्ट गए। और उसके कारण बाद में स्थिति यह आई कि ओबीसी के आरक्षण के बाद चुनाव करा लिए जाएं। आज हम अपनी पूरी टीम के साथ गृह एवं विधि मंत्री और नगरीय विकास मंत्री विधि विशेषज्ञों से मिले। एडवोकेट्स की टीम से मिले। प्रमुख रूप से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ भी बैठे। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के साथ भी बातचीत की। सभी बिन्दुओं पर चर्चा की। जिसके बाद हमने यह तय किया है कि हम मॉडिफिकेशन के लिए फिर से सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और ओबीसी आरक्षण के साथ चुनाव कराने के तथ्य फिर एक बार कोर्ट के सामने रखेंगे, हम विश्वास करते है कि ओबीसी को न्याय दिलाने में हम सफल होंगे।
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बता दें सुप्रीम कोर्ट में सरकार मॉडिफिकेशन ऑफ ऑर्डर के लिए आवेदन करेगी। इस बीच यदि सुप्रीम कोर्ट कोई नया आदेश नहीं देता है तो फिर राज्य निर्वाचन आयोग बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराएगा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया था कि पंचायत और नगरीय निकायों के चुनावों में ओबीसी आरक्षण के बिना ही 15 दिन के भीतर चुनाव की अधिसूचना जारी की जाए।
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इधर, राज्य निर्वाचन आयोग ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश में चुनाव कराने को लेकर बैठक की। इसमें चुनाव आयुक्त ने साफ कर दिया कि 24 मई से पहले दोनों चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी जाएगी और किसी भी स्थिति में जून में चुनाव करा दिए जाएंगे। प्रदेश सरकार लगातार ओबीसी आरक्षण के साथ ही चुनाव कराने की बात कर रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आरक्षण को लेकर बीजेपी सरकार से कोई उम्मीद नहीं होने की बात कहते हुए निकाय चुनाव में 27 प्रतिशत टिकट ओबीसी को देने का वादा किया है। इस पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी 27 प्रतिशत से अधिक टिकट ओबीसी वर्ग के कार्यकर्ताओं को देने की बात कही है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी दिल्ली में मुलाकात की। हालांकि इस मुलाकात को सौजन्य भेंट बताया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि प्रदेश के ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को तलब किया है।
