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MP Panchayat chunav: हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों पर रोक से किया इनकार, सुप्रीम कोर्ट जाएगी कांग्रेस
Thu, 09 Dec 2021 02:28 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Thu, 09 Dec 2021 02:28 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 40 मिनट सुनवाई के बाद पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। याचिका में राज्य सरकार के अध्यादेश को चुनौती दी गई है। कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील विवेक तनखा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाएंगे।
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बिहार पंचायत चुनाव परिणाम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। 40 मिनट चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस भेजा है। चार हफ्ते में याचिकाओं पर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी। वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता विवेक कृष्ण तनखा ने कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाएंगे।
चीफ जस्टिस रवि कुमार मलिमठ और जस्टिस विजय शुक्ला की बेंच ने गुरुवार को इस संबंध में दाखिल पांच याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाएं भोपाल के मनमोहन नायर, गाडरवारा के संदीप पटेल समेत अन्य लोगों ने लगाई है। इसमें मध्य प्रदेश में जनवरी-फरवरी 2022 में होने वाले पंचायत चुनावों को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने पुराने आरक्षण के आधार पर चुनाव कराने के संबंध में अध्यादेश जारी किया है। यह अध्यादेश कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के समय जारी हुए आरक्षण को निरस्त करते हुए लागू किया गया है। यह अध्यादेश पंचायत चुनाव एक्ट का उल्लंघन करता है।
रोटेशन व्यवस्था के खिलाफ है अध्यादेश
याचिका में कहा गया था कि पंचायत कानून में रोटेशन व्यवस्था की गई है। अध्यादेश रोटेशन व्यवस्था के खिलाफ है। 2018 में निवाडी जिला बना था। बिना सीमांकन किये नए जिले में पंचायत चुनाव नहीं कराया जा सकता है। जिला पंचायत, जनपद पंचायत के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद भी रोटेशन प्रक्रिया के तहत निर्धारित होने चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से विवेक तनखा,पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर और हिमांशु मिश्रा ने पैरवी की।
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तनखा ने कहा- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
वरिष्ठ वकील विवेक कृष्ण तन्खा ने कहा कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने पंचायत चुनाव पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। बेंच का कहना था कि इससे पहले ग्वालियर बेंच ने पंचायत चुनाव संबंधित याचिका पर रोक लगाने की अंतरित राहत से इंकार कर दिया था। ग्वालियर बेंच ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायिक अनुशासन की वजह से दूसरी बेंच इस मामले में अलग नजरिया नहीं ले सकती है। इस वजह से हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
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चीफ जस्टिस रवि कुमार मलिमठ और जस्टिस विजय शुक्ला की बेंच ने गुरुवार को इस संबंध में दाखिल पांच याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाएं भोपाल के मनमोहन नायर, गाडरवारा के संदीप पटेल समेत अन्य लोगों ने लगाई है। इसमें मध्य प्रदेश में जनवरी-फरवरी 2022 में होने वाले पंचायत चुनावों को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने पुराने आरक्षण के आधार पर चुनाव कराने के संबंध में अध्यादेश जारी किया है। यह अध्यादेश कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के समय जारी हुए आरक्षण को निरस्त करते हुए लागू किया गया है। यह अध्यादेश पंचायत चुनाव एक्ट का उल्लंघन करता है।
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रोटेशन व्यवस्था के खिलाफ है अध्यादेश
याचिका में कहा गया था कि पंचायत कानून में रोटेशन व्यवस्था की गई है। अध्यादेश रोटेशन व्यवस्था के खिलाफ है। 2018 में निवाडी जिला बना था। बिना सीमांकन किये नए जिले में पंचायत चुनाव नहीं कराया जा सकता है। जिला पंचायत, जनपद पंचायत के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद भी रोटेशन प्रक्रिया के तहत निर्धारित होने चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से विवेक तनखा,पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर और हिमांशु मिश्रा ने पैरवी की।
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तनखा ने कहा- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
वरिष्ठ वकील विवेक कृष्ण तन्खा ने कहा कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने पंचायत चुनाव पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। बेंच का कहना था कि इससे पहले ग्वालियर बेंच ने पंचायत चुनाव संबंधित याचिका पर रोक लगाने की अंतरित राहत से इंकार कर दिया था। ग्वालियर बेंच ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायिक अनुशासन की वजह से दूसरी बेंच इस मामले में अलग नजरिया नहीं ले सकती है। इस वजह से हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
