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MP News: प्रदेश में बाबा साहब अंबेडकर और गांधी जयंती पर भी कैदियों की रिहाई होगी
Fri, 02 Sep 2022 11:51 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 02 Sep 2022 11:51 AM IST
सार
मध्य प्रदेश में अच्छे व्यवहार, आचरण के चलते पूर्व रिहाई का लाभ अब साल में चार बार मिलेगा। सरकार अब 14 अप्रैल बाबा साहब अंबेडकर और 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन भी कैदियों को रिहाई करेगी।
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मध्य प्रदेश का वल्लभ भवन (भोपाल)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में कैदियों की रिहाई की नई नीति बनी है। इसमें 14 अप्रैल बाबा साहब अंबेडकर और 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर भी कैदियों को रिहाई होगी। कैदियों को साल में चार अवसर मिलेंगे।
मध्य प्रदेश में पूर्व में लागू वर्ष 2012 की नीति में साल में दो बार आजीवन कारावास काट रहे बंदियों के रिहाई की नीति के अनुसार लाभ मिल रहा था। इसमें 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी गणतंत्र दिवास पर कैदियों की रिहाई की जाती थी जिला स्तरीय समिति की अनुशंसानुसार जेल मुख्यालय द्वारा कार्यवाही की जाती थी। अब वर्ष में चार बार 15 अगस्त, 26 जनवरी, 14 अप्रैल और 2 अक्टूबर को नवीन नीति के प्रावधान तथा जिला स्तरीय समिति एवं जेल मुख्यालय की अनुशंसा पर राज्य सरकार की अनुमति से की जाएगी।
सरकार ने नई रिहाई नीति में यह सख्त प्रावधान भी किए है कि बच्चियों से दुष्कर्म करने वालों, सामूहिक दुष्कर्म के दोषी, आतंकी और नशीले पदार्थ के अवैध व्यापार के मामले में आजीवन सजा काट रहे बंदियों को अब आखिरी सांस तक जेल में ही रहना होगा।
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मध्य प्रदेश में पूर्व में लागू वर्ष 2012 की नीति में साल में दो बार आजीवन कारावास काट रहे बंदियों के रिहाई की नीति के अनुसार लाभ मिल रहा था। इसमें 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी गणतंत्र दिवास पर कैदियों की रिहाई की जाती थी जिला स्तरीय समिति की अनुशंसानुसार जेल मुख्यालय द्वारा कार्यवाही की जाती थी। अब वर्ष में चार बार 15 अगस्त, 26 जनवरी, 14 अप्रैल और 2 अक्टूबर को नवीन नीति के प्रावधान तथा जिला स्तरीय समिति एवं जेल मुख्यालय की अनुशंसा पर राज्य सरकार की अनुमति से की जाएगी।
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सरकार ने नई रिहाई नीति में यह सख्त प्रावधान भी किए है कि बच्चियों से दुष्कर्म करने वालों, सामूहिक दुष्कर्म के दोषी, आतंकी और नशीले पदार्थ के अवैध व्यापार के मामले में आजीवन सजा काट रहे बंदियों को अब आखिरी सांस तक जेल में ही रहना होगा।
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