CM Rise School: कमलनाथ का सरकार पर बड़ा हमला, बोले- चुनाव आते ही झूठे सपने दिखाने लगे शिवराज
कमलनाथ ने आरोप लगाया है कि भाजपा की 18 साल की सरकार में मध्यप्रदेश स्कूली शिक्षा के मामले में निरंतर गर्त में गया है। इसके गवाह खुद सरकार के ही आंकड़े हैं। अब चुनावी वर्ष में जनता को गुमराह करने के लिए सीएम राइज स्कूलों के झूठे सपने दिखाए जा रहे हैं।
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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में एक साल का समय बचा है। दोनों ही पार्टियों ने आरोप-प्रत्यारोप तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को प्रदेश में 69 सीएम राइज स्कूलों का भूमिपूजन किया। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। कमलनाथ ने कहा कि भाजपा की 18 वर्ष की सरकार के कार्यकाल में मध्यप्रदेश स्कूली शिक्षा के मामले में निरंतर गर्त में गया है। इसके गवाह खुद सरकारी आंकड़े हैं। अब चुनावी साल में जनता को गुमराह करने के लिए सीएम राइज स्कूल के झूठे सपने दिखाए जा रहे हैं।
कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि देशभर के आंकड़े उठाकर देखे जाएं तो स्कूली शिक्षा में मध्यप्रदेश का नंबर बेहद नीचे है। वहीं, आज चुनावों को देखते हुए जनता को गुमराह करने के लिए उच्चृस्तरीय बुनियादी संरचना वाले व स्मार्ट क्लासेस, डिजिटल लर्निंग, सर्वसुविधा युक्त लैब, पुस्तकालय वाले सीएम राइज विद्यालयों के सपने दिखाए जा रहे हैं। यदि सरकार को शिक्षा के स्तर और स्कूलों की इतनी चिंता है तो क्या कारण है कि उनकी पिछले 18 वर्ष में सरकारी स्कूल खस्ताहाल स्थिति में पहुंच गए हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिये सरकार ने कदम क्यों नहीं उठाए? जो सरकार पिछले 18 वर्षों में प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति नहीं सुधार पाई है, वह आज किस आधार पर इतने बड़े-बड़े सपने दिखा रही है?
36 हजार स्कूलों में बिजली नहीं
कमलनाथ ने पूछा कि मध्यप्रदेश में एक लाख 23 हजार सरकारी स्कूल है। आज भी करीब 36 हजार स्कूलों में बिजली नहीं है। इसी से डिजिटल लर्निंग, स्मार्ट क्लासेस व कम्प्यूटर शिक्षा की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। आज भी मध्यप्रदेश में शिक्षकों के करीब एक लाख पद खाली हैं और पिछले कई वर्षों से शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है। प्रदेश में करीब 18 हजार स्कूल ऐसे हैं जो सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। प्रदेश में 14 हज़ार स्कूल ऐसे हैं, जिनमें पीने के पानी की सुविधा तक नहीं है। प्रदेश में 40 हजार के करीब ऐसे स्कूल हैं जिनके भवन जर्जर हो चुके हैं। इनमें से कई तो आज भी पेड़ों के नीचे चल रहे हैं। कइयों की छत बारिश में टपकती है। कइयों में बारिश का पानी भर जाता है।
18 हजार स्कूलों में शौचालय नहीं
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि प्रदेश में करीब 18 हजार स्कूल ऐसे हैं, जहां शौचालय नहीं हैं। जहां है, वह बदहाल स्थिति में है। हजारों स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग से टॉयलेट नहीं है। 34 हजार के करीब स्कूलों में तो हैंड वॉश तक नहीं है। आठ हज़ार के करीब स्कूलों में लाइब्रेरी नहीं है। 33 हजार स्कूलों में खेल मैदान नहीं है। आज भी हजारों स्कूलों के पास अपना खुद का भवन नहीं है। एक-एक कमरों में स्कूल चल रहे हैं।
