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MP News: दिग्विजय सिंह ने वित्त विभाग के दो IAS पर लगाया 250 करोड़ के घोटालों का आरोप, EOW से शिकायत
Wed, 29 Nov 2023 09:31 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Wed, 29 Nov 2023 09:31 PM IST
सार
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने वित्त विभाग के दो आईएएस अधिकारी पर 250 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने इसकी ईओडब्ल्यू को शिकायत की है।
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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना के तीन दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने प्रदेश सरकार के दो आईएएस अधिकारियों पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने वित्त विभाग के अधिकारी आईएएस अजीत केसरी और ज्ञानेश्वर पाटिल की ईओडब्ल्यू से शिकायत की है। इसके साथ उन्होंने दोनों की वॉट्सएप चैट और आडियो सीडी भी उपलब्ध कराई है।
दिग्विजय सिंह बोले-प्राथमिकी दर्ज करें
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने ईओडब्ल्यू के डीजी को दी शिकायत में लिखा कि उनको दो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की शिकायत मिली है। एमपी में वित्त विभाग के दो आईएएस अधिकारियों ने 250 करोड़ का घोटाला किया है। उन्होंने शिकायत के साथ दिए दस्तावेज और ऑडियो सीडी के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की।
यह है मामला
शिकायत के अनुसार राज्य मंत्रालय में लागू आईएफएमएस सिस्टम का काम एक चहेती फर्म को देने के लिए वित्त विभाग के अधिकारियों ने वित्त मंत्री को विश्वास में लेकर ढाई सौ करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इसके लिए टेंडर में मनमानी शर्तें डालते हुए टीसीएस जैसी टाटा समूह की कंपनी को बाहर किया गया। इसके बाद टेरा टेक्नॉलाजी लिमिटेड गुडगांव को ठेका देने की कार्यवाही शुरू कर दी गई। शिकायत के अनुसार इस घोटाले में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के साथ-साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव अजीत केसरी की भूमिका को भी संदिग्ध बताया गया है। इसके अलावा एक अन्य आईएएस ज्ञानेश्वर पाटिल पर कंपनी के प्रतिनिधियों से मिलीभगत कर घोटाले में शामिल होने का आरोप है। पहले यह टेंडर 200 करोड़ रुपये का था, जिसे एजेंसी तय होने के दौरान बढ़ाकर 247 करोड़ रुपये कर दिया गया।
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50 करोड़ रुपये का लेन देन
पूरे टेंडर घोटाले में करीब 50 करोड़ रुपये का लेन-देन का आरोप है। शिकायत में रिश्वत की रकम विभिन्न माध्यमों से संबंधित अधिकारियों और मंत्री को देने की बात कही गई है। एसीएस वित्त अजीत केसरी, ज्ञानेश्वर पाटिल, आयुक्त कोष एवं लेखा और टेरा टेक्नॉलाजी लिमिटेड गुडगांव से काम लेने वाले आंध्र प्रदेश की कंपनी पिक्सल वाइड सॉल्यूशन के डायरेक्टर प्रित्युश रेड्डी के लिए काम करने वाले ग्वालियर निवासी देवेश अग्रवाल के बीच विभिन्न अवसरों पर वाट्सएप पर हुई चेटिंग पत्र शिकायत के साथ दिए गए हैं।
यह है ऑडियो में...
पत्र के साथ सीडी में संलग्न ऑडियो में वित्त विभाग के शीर्ष अधिकारी हैदराबाद स्थित कंपनी के डायरेक्टर से डील पूरी करने की चर्चा कर रहे हैं। इस बातचीत में डील पूरी न होने पर टाटा कंपनी की टीसीएस को आगे काम देने की बात भी कही जा रही है। चर्चा के दौरान किसी पवन नामक व्यक्ति का नाम लेनदेन में बार-बार आ रहा था। आरोप है कि करीब पचास करोड़ रुपये का लेन देन करने के बाद वित्त विभाग के अधिकारियों ने आचार संहिता लगने के कुछ दिन पूर्व गुडगांव की कंपनी को वर्क ऑर्डर दिया गया, जो बाद में हैदराबाद की कंपनी को सौंपा गया।
शर्तें कंपनी के अनुकूल बनाई
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वित्त विभाग के अधिकारियों ने इस टेंडर प्रक्रिया की शर्तों को इस कंपनी के अनुकूल बनाया था, ताकि अन्य कंपनी टेंडर में भाग ही न ले सके। चुनावी साल में और चुनाव घोषित होने के कुछ दिन पूर्व घटित इस हाई प्रोफाइल घोटाले में आर्थिक अनियमितता, भ्रष्टाचार का प्रकरण दर्ज कर समस्त संबंधित दस्तावेज जब्त किए जाना चाहिए और आरोपी अधिकारियों और कंपनी के प्रतिनिधियों और दलालों के बीच हुई बातचीत का रिकॉर्ड मोबाइल कंपनियों से लेकर कार्रवाई की जाना चाहिए।
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दिग्विजय सिंह बोले-प्राथमिकी दर्ज करें
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने ईओडब्ल्यू के डीजी को दी शिकायत में लिखा कि उनको दो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की शिकायत मिली है। एमपी में वित्त विभाग के दो आईएएस अधिकारियों ने 250 करोड़ का घोटाला किया है। उन्होंने शिकायत के साथ दिए दस्तावेज और ऑडियो सीडी के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की।
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यह है मामला
शिकायत के अनुसार राज्य मंत्रालय में लागू आईएफएमएस सिस्टम का काम एक चहेती फर्म को देने के लिए वित्त विभाग के अधिकारियों ने वित्त मंत्री को विश्वास में लेकर ढाई सौ करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इसके लिए टेंडर में मनमानी शर्तें डालते हुए टीसीएस जैसी टाटा समूह की कंपनी को बाहर किया गया। इसके बाद टेरा टेक्नॉलाजी लिमिटेड गुडगांव को ठेका देने की कार्यवाही शुरू कर दी गई। शिकायत के अनुसार इस घोटाले में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के साथ-साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव अजीत केसरी की भूमिका को भी संदिग्ध बताया गया है। इसके अलावा एक अन्य आईएएस ज्ञानेश्वर पाटिल पर कंपनी के प्रतिनिधियों से मिलीभगत कर घोटाले में शामिल होने का आरोप है। पहले यह टेंडर 200 करोड़ रुपये का था, जिसे एजेंसी तय होने के दौरान बढ़ाकर 247 करोड़ रुपये कर दिया गया।
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50 करोड़ रुपये का लेन देन
पूरे टेंडर घोटाले में करीब 50 करोड़ रुपये का लेन-देन का आरोप है। शिकायत में रिश्वत की रकम विभिन्न माध्यमों से संबंधित अधिकारियों और मंत्री को देने की बात कही गई है। एसीएस वित्त अजीत केसरी, ज्ञानेश्वर पाटिल, आयुक्त कोष एवं लेखा और टेरा टेक्नॉलाजी लिमिटेड गुडगांव से काम लेने वाले आंध्र प्रदेश की कंपनी पिक्सल वाइड सॉल्यूशन के डायरेक्टर प्रित्युश रेड्डी के लिए काम करने वाले ग्वालियर निवासी देवेश अग्रवाल के बीच विभिन्न अवसरों पर वाट्सएप पर हुई चेटिंग पत्र शिकायत के साथ दिए गए हैं।
यह है ऑडियो में...
पत्र के साथ सीडी में संलग्न ऑडियो में वित्त विभाग के शीर्ष अधिकारी हैदराबाद स्थित कंपनी के डायरेक्टर से डील पूरी करने की चर्चा कर रहे हैं। इस बातचीत में डील पूरी न होने पर टाटा कंपनी की टीसीएस को आगे काम देने की बात भी कही जा रही है। चर्चा के दौरान किसी पवन नामक व्यक्ति का नाम लेनदेन में बार-बार आ रहा था। आरोप है कि करीब पचास करोड़ रुपये का लेन देन करने के बाद वित्त विभाग के अधिकारियों ने आचार संहिता लगने के कुछ दिन पूर्व गुडगांव की कंपनी को वर्क ऑर्डर दिया गया, जो बाद में हैदराबाद की कंपनी को सौंपा गया।
शर्तें कंपनी के अनुकूल बनाई
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वित्त विभाग के अधिकारियों ने इस टेंडर प्रक्रिया की शर्तों को इस कंपनी के अनुकूल बनाया था, ताकि अन्य कंपनी टेंडर में भाग ही न ले सके। चुनावी साल में और चुनाव घोषित होने के कुछ दिन पूर्व घटित इस हाई प्रोफाइल घोटाले में आर्थिक अनियमितता, भ्रष्टाचार का प्रकरण दर्ज कर समस्त संबंधित दस्तावेज जब्त किए जाना चाहिए और आरोपी अधिकारियों और कंपनी के प्रतिनिधियों और दलालों के बीच हुई बातचीत का रिकॉर्ड मोबाइल कंपनियों से लेकर कार्रवाई की जाना चाहिए।
