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MP News: प्रदेश में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू की दस्तक, रीवा की सुअरों के सैंपल में वायरस की पुष्टि
Sat, 20 Aug 2022 11:48 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 20 Aug 2022 11:48 AM IST
सार
मध्य प्रदेश में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है। भोपाल स्थित उच्च सुरक्षा पशु अनुसंधान प्रयोगशाला में रीवा की सुअरों के 10 सैंपल में अफ्रीकन स्वाइप फ्लू वायरल की पुष्टि हुई है। हालांकि अभी पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी कोई जानकारी होने से मना कर रहे है।
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सुअर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है। भोपाल स्थित उच्च सुरक्षा पशु अनुसंधान प्रयोगशाला में रीवा की सुअरों के 10 सैंपल में अफ्रीकन स्वाइप फ्लू वायरल की पुष्टि हुई है। हालांकि अभी पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी कोई जानकारी होने से मना कर रहे है।
भोपाल स्थित उच्च सुरक्षा पशु अनुसंधान प्रयोगशाला के सूत्रों के मुताबिक रीवा में सुअरों के बीमार होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद सूअरों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। सैंपल की जांच में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू वायरल मिला है। इस वायरस को कंट्रोल करने के लिए एक किलोमीटर के दायरे में मौजूद सूअरों को मार दिया जाता है। ताकि बीमारी से दूसरे सूअर को संक्रमित होने से बचाया जा सके। इस बीमारी में बुखार, दस्त, उल्टी, कान और पेट में लाल चकत्ते दिखाई देते हैं।
लंपी स्किन डिसीज के मामले भी बढ़ रहे
इसके पहले प्रदेश के पशुओं में लंपी स्किन डिसीज के मामले मिल चुके है इस बीमारी से पशुओं के शरीर पर गठाने होने के साथ ही बुखार और सर्दी जुकाम होता है। इससे संक्रमित पशुओं की मौत का खतरा भी बढ़ जाता है।
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भोपाल स्थित उच्च सुरक्षा पशु अनुसंधान प्रयोगशाला के सूत्रों के मुताबिक रीवा में सुअरों के बीमार होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद सूअरों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। सैंपल की जांच में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू वायरल मिला है। इस वायरस को कंट्रोल करने के लिए एक किलोमीटर के दायरे में मौजूद सूअरों को मार दिया जाता है। ताकि बीमारी से दूसरे सूअर को संक्रमित होने से बचाया जा सके। इस बीमारी में बुखार, दस्त, उल्टी, कान और पेट में लाल चकत्ते दिखाई देते हैं।
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लंपी स्किन डिसीज के मामले भी बढ़ रहे
इसके पहले प्रदेश के पशुओं में लंपी स्किन डिसीज के मामले मिल चुके है इस बीमारी से पशुओं के शरीर पर गठाने होने के साथ ही बुखार और सर्दी जुकाम होता है। इससे संक्रमित पशुओं की मौत का खतरा भी बढ़ जाता है।
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