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MP News: चार साल में 32 शावकों सहित 85 बाघों की मौत, विधानसभा में सरकार ने दी जानकारी
Thu, 23 Dec 2021 12:23 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Thu, 23 Dec 2021 12:23 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में पिछले चार साल में 32 शावकों सहित 85 बाघों की मौत हुई है। प्रदेश के वन मंत्री विजय शाह ने विधानसभा जबलपुर के कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया के प्रश्न पर यह जानकारी दी।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में अलग-अलग कारणों से पिछले चार साल में 32 शावकों सहित 85 बाघों की मौत हुई है। जबलपुर (पूर्व) के विधायक लखन घनघोरिया के सवाल के जवाब में प्रदेश के वन मंत्री कुंवर विजय शाह ने लिखित में यह जानकारी मध्य प्रदेश विधानसभा में दी है।
कांग्रेस विधायक ने पूछा था कि राज्य में 2018-19 से 2021-22 के बीच चार साल में कितने बाघों की मौत हुई है। विधायक ने यह भी पूछा था कि अलग-अलग रिजर्व से कितनी बाघ बाहर निकले हैं। इस पर शाह ने बताया कि फॉरेस्ट कॉरिडोर में बाघों का मूवमेंट सामान्य बात है। बाघ खाने, साथी, बेहतर आवास और नए इलाकों की तलाश में अन्य कॉरिडोर में मूवमेंट करते हैं। मंत्री ने सदन में यह भी बताया कि राज्य सरकार ने 2018-19 में बाघों के संरक्षण, सुरक्षा और निगरानी में 283 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 2019-20 में 220 करोड़ और 2020-21 और 2021-22 में क्रमशः 264 करोड़ और 128 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
2021 में 38 बाघों की मौत
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी (NTCA) की रिपोर्ट बताती है कि 2012 से 2020 के बीच मध्य प्रदेश में 202 बाघों की मौत हुई है। NTCA की वेबसाइट पर उपलब्ध डेटा कहता है कि इस साल जनवरी से दिसंबर तक 38 बाघों की मौत हुई है। मध्य प्रदेश ने 526 बाघों के साथ 2018 की बाघ गणना में टाइगर स्टेट होने का दर्जा एक बार फिर हासिल कर लिया है। यहां कर्नाटक के मुकाबले दो बाघ ज्यादा मिले थे। इससे पहले 2010 में मध्य प्रदेश ने टाइगर स्टेट का तमगा कर्नाटक को खो दिया था। उस समय पन्ना टाइगर रिजर्व में कथित शिकार की वजह से बाघों की संख्या में मध्य प्रदेश पिछड़ गया था।
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कांग्रेस विधायक ने पूछा था कि राज्य में 2018-19 से 2021-22 के बीच चार साल में कितने बाघों की मौत हुई है। विधायक ने यह भी पूछा था कि अलग-अलग रिजर्व से कितनी बाघ बाहर निकले हैं। इस पर शाह ने बताया कि फॉरेस्ट कॉरिडोर में बाघों का मूवमेंट सामान्य बात है। बाघ खाने, साथी, बेहतर आवास और नए इलाकों की तलाश में अन्य कॉरिडोर में मूवमेंट करते हैं। मंत्री ने सदन में यह भी बताया कि राज्य सरकार ने 2018-19 में बाघों के संरक्षण, सुरक्षा और निगरानी में 283 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 2019-20 में 220 करोड़ और 2020-21 और 2021-22 में क्रमशः 264 करोड़ और 128 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
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2021 में 38 बाघों की मौत
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी (NTCA) की रिपोर्ट बताती है कि 2012 से 2020 के बीच मध्य प्रदेश में 202 बाघों की मौत हुई है। NTCA की वेबसाइट पर उपलब्ध डेटा कहता है कि इस साल जनवरी से दिसंबर तक 38 बाघों की मौत हुई है। मध्य प्रदेश ने 526 बाघों के साथ 2018 की बाघ गणना में टाइगर स्टेट होने का दर्जा एक बार फिर हासिल कर लिया है। यहां कर्नाटक के मुकाबले दो बाघ ज्यादा मिले थे। इससे पहले 2010 में मध्य प्रदेश ने टाइगर स्टेट का तमगा कर्नाटक को खो दिया था। उस समय पन्ना टाइगर रिजर्व में कथित शिकार की वजह से बाघों की संख्या में मध्य प्रदेश पिछड़ गया था।
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