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MP: ओंकारेश्वर बांध के 23 गेटों में से 21 गेट 35.5 मीटर तक खोलें गए, नर्मदा नदी उफान पर; प्रशासन हुआ अलर्ट
Thu, 04 Sep 2025 04:52 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा/ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा/ओंकारेश्वर
Published by: तरुणेंद्र चतुर्वेदी
Updated Thu, 04 Sep 2025 04:52 PM IST
सार
एमपी समेत देश के कई राज्यों में हो रही बारिश के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है। वहीं, नर्मदा नदी पर बने इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। गुरुवार को इंदिरा सागर बांध के 12 गेट खोले गए।
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सावधान: इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में लगातार हो रही तेज बारिश के चलते नर्मदा नदी पर बने इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। गुरुवार को इंदिरा सागर बांध के 12 गेट खोले गए, वहीं ओंकारेश्वर बांध से 21 गेटों के जरिए कुल 35.5 मीटर ऊंचाई तक खोले गए एवं10,533 क्यूमेक्स पानी नर्मदा नदी में छोड़ा गया।
दोनों ही बांधों का जलभराव क्षमता से ऊपर
नर्मदा नदी का जलस्तर वर्तमान में खतरे के निशान से केवल डेढ़ मीटर नीचे है। दोनों ही बांधों का जलभराव क्षमता से ऊपर पहुंच चुका है, जिसके चलते गेट खोलकर पानी निकाला जा रहा है। यह इस वर्ष का मात्र दो दिन में पांचवां अवसर है जब बांध प्रबंधन को गेट खोलने पड़े हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नर्मदा नदी के ऊपरी हिस्सों से कितनी अधिक मात्रा में पानी आ रहा है।
खतरे की स्थिति
लगातार हो रही वर्षा और ऊपरी क्षेत्रों से आ रहे प्रवाह के कारण नर्मदा नदी उफान पर है। ओंकारेश्वर से आगे खंडवा और खरगोन जिले में बसे नर्मदा किनारे के गांवों और कस्बों के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण बन गई है।
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यदि वर्षा का सिलसिला जारी रहा और गेटों की संख्या व ऊंचाई और बढ़ाई गई तो नदी का जलस्तर और ऊपर जा सकता है। वर्तमान में नर्मदा नदी का जल स्तर 162,500 तक पहुंच गया है। अगर नदी का जलस्तर 163.980 पर पहुंचा तो खतरे के निशान को पार कर जाएगा।
प्रशासन की तैयारी
गंभीर हालात को देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन टीम लगातार निगरानी कर रही है। दोनों जिलों (खंडवा और खरगोन) के पुलिस अधीक्षकों ने सभी थानों को निर्देश दिए हैं कि नर्मदा किनारे जहां-जहां जनसमूह एकत्रित होता है, वहां सुरक्षा बल तैनात रहें।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड और स्थानीय गोताखोरों को भी तैयार रखा गया है। ग्राम पंचायत, नगर पंचायत और नगर पालिकाओं को सख्त आदेश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की घटना या दुर्घटना न हो।
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जनता से अपील
प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि लोग नर्मदा नदी के किनारे न जाएं। लगातार गेट खुलने से जलस्तर कभी भी अचानक बढ़ सकता है। सावधानी बरतना ही सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है। नर्मदा के उफान और बांधों की लगातार जलनिकासी ने पूरे नर्मदा तट क्षेत्र को अलर्ट पर ला दिया है। आने वाले समय में नदी का जलस्तर किस ओर करवट लेगा, यह वर्षा पर निर्भर करेगा।
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दोनों ही बांधों का जलभराव क्षमता से ऊपर
नर्मदा नदी का जलस्तर वर्तमान में खतरे के निशान से केवल डेढ़ मीटर नीचे है। दोनों ही बांधों का जलभराव क्षमता से ऊपर पहुंच चुका है, जिसके चलते गेट खोलकर पानी निकाला जा रहा है। यह इस वर्ष का मात्र दो दिन में पांचवां अवसर है जब बांध प्रबंधन को गेट खोलने पड़े हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नर्मदा नदी के ऊपरी हिस्सों से कितनी अधिक मात्रा में पानी आ रहा है।
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खतरे की स्थिति
लगातार हो रही वर्षा और ऊपरी क्षेत्रों से आ रहे प्रवाह के कारण नर्मदा नदी उफान पर है। ओंकारेश्वर से आगे खंडवा और खरगोन जिले में बसे नर्मदा किनारे के गांवों और कस्बों के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण बन गई है।
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यदि वर्षा का सिलसिला जारी रहा और गेटों की संख्या व ऊंचाई और बढ़ाई गई तो नदी का जलस्तर और ऊपर जा सकता है। वर्तमान में नर्मदा नदी का जल स्तर 162,500 तक पहुंच गया है। अगर नदी का जलस्तर 163.980 पर पहुंचा तो खतरे के निशान को पार कर जाएगा।
प्रशासन की तैयारी
गंभीर हालात को देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन टीम लगातार निगरानी कर रही है। दोनों जिलों (खंडवा और खरगोन) के पुलिस अधीक्षकों ने सभी थानों को निर्देश दिए हैं कि नर्मदा किनारे जहां-जहां जनसमूह एकत्रित होता है, वहां सुरक्षा बल तैनात रहें।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड और स्थानीय गोताखोरों को भी तैयार रखा गया है। ग्राम पंचायत, नगर पंचायत और नगर पालिकाओं को सख्त आदेश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की घटना या दुर्घटना न हो।
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जनता से अपील
प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि लोग नर्मदा नदी के किनारे न जाएं। लगातार गेट खुलने से जलस्तर कभी भी अचानक बढ़ सकता है। सावधानी बरतना ही सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है। नर्मदा के उफान और बांधों की लगातार जलनिकासी ने पूरे नर्मदा तट क्षेत्र को अलर्ट पर ला दिया है। आने वाले समय में नदी का जलस्तर किस ओर करवट लेगा, यह वर्षा पर निर्भर करेगा।
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