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MP High Court: डबल रेट में खरीदे सोलर पैनल, सरकार ने नहीं दी जांच की अनुमति, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Thu, 16 Jun 2022 07:52 AM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 16 Jun 2022 07:52 AM IST
सार

विंध्य विकास प्राधिकरण ने लाइट विहिन गांव में सोलर पैनल खरीदी के लिए साल 2018 में निविदा आमंत्रित की थी। प्राधिकरण द्वारा 16 हजार रुपये का सोलर पैनल 32 हजार रुपये में खरीदा गया। सरकार ने दस महीने बाद भी जांच के लिए अनुमति नहीं दी। अब मामला हाईकोर्ट में है। 

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MP High Court: Solar panels purchased at double rate, government did not allow investigation, High Court sought answer
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विंध्य विकास प्राधिकरण द्वारा लाइट विहिन गांव को रोशन करने के लिए दोगने रेट पर सोलर पैनल खरीदे जाने के मामले की जांच की अनुमति नहीं दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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याचिकाकर्ता वीरेन्द्र सिंह परिहार की तरफ से दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि विंध्य विकास प्राधिकरण ने लाइट विहिन गांव में सोलर पैनल खरीदी के लिए साल 2018 में निविदा आमंत्रित की थी। प्राधिकरण द्वारा 16 हजार रुपये का सोलर पैनल 32 हजार रुपये में खरीदा गया। प्राधिकरण द्वारा सोलर पैनल के लिए 1 करोड़ 25 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। कुछ सोलर पैनल घर में लगाए गए तो कुछ गायब हो गए। जिसकी शिकायत उन्होंने ईओडब्ल्यू में दस्तावेजों के साथ की थी। ईओडब्ल्यू ने शिकायत को संबंधित मंत्रालय भिजवा दिया था। मंत्रालय ने संभागायुक्त को प्रकरण की जांच के निर्देश दिए थे। संभागायुक्त द्वारा जांच के लिए गठित कमेटी ने आरोप को सही पाया था।
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ईओडब्ल्यू ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए जांच के लिए धारा 17 (ए) के तहत 5 अगस्त 2021 पत्र लिखा था। नियम अनुसार जांच के संबंध में सरकार को तीन माह में निर्णय लेना है। विषेष परिस्थितियों में एक माह के अतिरिक्त समय का प्रावधान है। याचिका में कहा गया था कि भ्रष्टाचार के तथ्य होने के बाद भी सरकार ने लगभग दस माह में ईओडब्ल्यू को जांच की अनुमति नहीं दी। याचिका में राज्य सरकार, ईओडब्ल्यू, संभागायुक्त रीवा, विंध्य विकास प्राधिकारण के पूर्व चेयरमैन सुभाष सिंह, तत्कालीन सीईओ आरके शुक्ला व ठेकेदार कंपनी को अनावेदक बनाया गया था। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा ने पैरवी की। 
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