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MP News: पीएम पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में पूर्व मंत्री पटेरिया को जमानत नहीं, हाईकोर्ट का कड़ा रुख
Wed, 11 Jan 2023 07:43 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Wed, 11 Jan 2023 07:43 PM IST
सार
जस्टिस द्विवेदी की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो 30 दिन बाद पुनः जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। न्यायिक हिरासत अवधि में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा।
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राजा पटेरिया को हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिल सकी।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने पीएम नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री राजा पटेरिया की जमानत अर्जी खारिज कर दी। हाईकोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी ने अर्जी रद्द करने के साथ कहा कि जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा।
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जस्टिस द्विवेदी की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो 30 दिन बाद पुनः जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। न्यायिक हिरासत अवधि में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा।
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बता दें, प्रधानमंत्री के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी करने तथा अल्पसंख्यकों को धर्म व जाति के नाम पर उकसाने के आरोप में कांग्रेस नेता राजा पटेरिया के विरुद्ध पवई थाने में केस दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने 13 दिसंबर को उन्हें गिरफ्तार किया था। पवई कोर्ट तथा ग्वालियर जिले की विशेष (एमपी-एमएलए) कोर्ट से उनकी जमानत खारिज खारिज हो गई थी। इसके खिलाफ उन्होंने मप्र हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच में दायर उनकी जमानत याचिका को सुनवाई के लिए जबलपुर मुख्य पीठ में स्थानांतरित कर दिया गया था।
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पटेरिया के वकील ने दी थी ये दलीलें
पटेरिया के वकील ने याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया था कि आवेदक के खिलाफ जो धाराएं लगाई गई हैं, उनमें कोई तथ्य नहीं हैं। राजनीति दुर्भावना के कारण उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। जो सीडी पेश की गई है, उसमें छेड़छाड़ की गई है। आवेदक ने जो वक्तव्य दिया था, उसी में मंतव्य भी स्पष्ट कर दिया था। उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया था। वहीं, शासन की ओर से जमानत अर्जी का विरोध किया गया। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
ऐसे भाषण अपराध में वृद्धि की वजह : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि जमानत आवेदन के दौरान भाषण की सीडी का परीक्षण व उसकी शुध्दता पर विचार करना उचित नहीं होगा। भाषण के दौरान ऐसे शब्द प्रयोग करना, जो विचलित कर सकते है, आजकल फैशन बन गया है। ऐसी प्रथा न केवल छवि धूमिल कर रही है, बल्कि समाज में अपराध वृध्दि का कारण बन रही है। राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री जैसे उच्च पद के नेताओं की छबि खराब करने तथा नीचा दिखाने के लिए जनता के नेता से अभद्र भाषा के प्रयोग की अपेक्षा नहीं कर सकते है। जेल में हिरासत अवधि को देखते हुए जमानत प्रदान करने से समाज में गलत संदेश जाएगा।
