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अपराध: 17 बांग्लादेशी नागरिकों का फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार, बिलासपुर से दबोचा
Sun, 11 Oct 2026 05:20 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 11 Oct 2026 05:20 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा में 17 बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले में एसटीएफ ने मुख्य आरोपी गुलाबराय गौतम उर्फ सम्यक बोधि भंते को बिलासपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर जाली दस्तावेज, बैंक खातों और कथित कमीशन के जरिए फर्जीवाड़े में सहयोग करने का आरोप है।
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17 बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने का मामला
- फोटो : AI
विस्तार
विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा में 17 बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले के मुख्य सूत्रधार को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से गिरफ्तार कर लिया है। एसटीएफ ने 20 हजार रुपये के इनामी आरोपी गुलाबराय गौतम उर्फ सम्यक बोधि भंते को बिलासपुर से पकड़ा है। एसटीएफ की पूछताछ में आरोपी ने स्वीकारा कि उसने बांग्लादेशी नागरिकों के गिरोह के कथित सरगना रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु के साथ सांठगांठ करके जाली दस्तावेज और पासपोर्ट बनवाने में सहायता की थी।
फर्जी पासपोर्ट मामले में मुख्य आरोपी गिरफ्तार
एसटीएफ के अधिकारियों के अनुसार आरोपी गुलाबराय गौतम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के झांसी का निवासी है। वह कुछ समय से मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित जनकगंज इलाके के गोल पहाड़िया में निवास कर रहा था। फर्जी पासपोर्ट मामले में नाम उजागर होने के बाद आरोपी विदिशा जाने की बात कहकर वहां से फरार हो गया था। इसके बाद से एसटीएफ लगातार उसकी खोजबीन कर रही थी और अंततः टीम ने उसे बिलासपुर से हिरासत में ले लिया। एसटीएफ का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी से इस पूरे फर्जीवाड़ा नेटवर्क की गहन पड़ताल में मदद मिलेगी।
ये भी पढ़ें- अच्छी खबर: कूनो में भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी चीतों से अधिक, कुल 54 में से 38 भारतीय मूल के
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बैंक खाते और कमीशन का खुलासा
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि डबरा, विदिशा, भोपाल और बैतूल के बौद्ध मठों में उसकी गहरी पहुंच थी। विदिशा में बौद्ध धर्म के कार्यक्रम के दौरान उसकी मुलाकात रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु से हुई थी। विदिशा के एक मठ में रहने के दौरान आरोपी ने भारतीय स्टेट बैंक की स्थानीय शाखा में अपना एक खाता खुलवाया था। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने यह बैंक खाता रियाल चौधरी को प्रति माह 10 हजार रुपये के कमीशन पर प्रयोग करने के लिए दिया था। जांच में सामने आया कि इसी खाते के माध्यम से फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने हेतु रुपयों का लेन-देन होता था।
सरकारी तंत्र से सांठगांठ का पर्दाफाश
एसटीएफ की पूछताछ के दौरान गुलाबराय ने यह भी स्वीकार किया कि उसने रियाल चौधरी के कहने पर 17 बांग्लादेशी नागरिकों के डबरा के पते पर फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए गवाही दी थी। इसके साथ ही उसने सरकारी तंत्र के कर्मचारियों से सांठगांठ कराने में भी मदद की थी। एसटीएफ के अनुसार इस मुख्य आरोपी के पकड़े जाने से फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह, वित्तीय लेनदेन और इसमें शामिल अन्य सहयोगियों के संबंध में पड़ताल आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। एसटीएफ अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी सूक्ष्मता से जांच कर रही है।
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फर्जी पासपोर्ट मामले में मुख्य आरोपी गिरफ्तार
एसटीएफ के अधिकारियों के अनुसार आरोपी गुलाबराय गौतम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के झांसी का निवासी है। वह कुछ समय से मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित जनकगंज इलाके के गोल पहाड़िया में निवास कर रहा था। फर्जी पासपोर्ट मामले में नाम उजागर होने के बाद आरोपी विदिशा जाने की बात कहकर वहां से फरार हो गया था। इसके बाद से एसटीएफ लगातार उसकी खोजबीन कर रही थी और अंततः टीम ने उसे बिलासपुर से हिरासत में ले लिया। एसटीएफ का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी से इस पूरे फर्जीवाड़ा नेटवर्क की गहन पड़ताल में मदद मिलेगी।
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बैंक खाते और कमीशन का खुलासा
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि डबरा, विदिशा, भोपाल और बैतूल के बौद्ध मठों में उसकी गहरी पहुंच थी। विदिशा में बौद्ध धर्म के कार्यक्रम के दौरान उसकी मुलाकात रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु से हुई थी। विदिशा के एक मठ में रहने के दौरान आरोपी ने भारतीय स्टेट बैंक की स्थानीय शाखा में अपना एक खाता खुलवाया था। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने यह बैंक खाता रियाल चौधरी को प्रति माह 10 हजार रुपये के कमीशन पर प्रयोग करने के लिए दिया था। जांच में सामने आया कि इसी खाते के माध्यम से फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने हेतु रुपयों का लेन-देन होता था।
सरकारी तंत्र से सांठगांठ का पर्दाफाश
एसटीएफ की पूछताछ के दौरान गुलाबराय ने यह भी स्वीकार किया कि उसने रियाल चौधरी के कहने पर 17 बांग्लादेशी नागरिकों के डबरा के पते पर फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए गवाही दी थी। इसके साथ ही उसने सरकारी तंत्र के कर्मचारियों से सांठगांठ कराने में भी मदद की थी। एसटीएफ के अनुसार इस मुख्य आरोपी के पकड़े जाने से फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह, वित्तीय लेनदेन और इसमें शामिल अन्य सहयोगियों के संबंध में पड़ताल आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। एसटीएफ अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी सूक्ष्मता से जांच कर रही है।
