मध्य प्रदेश में 350 करोड़पति उम्मीदवार

ऋषि पांडे Updated Fri, 22 Nov 2013 11:56 AM IST
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मध्य प्रदेश विधान सभा चुनावों में किस्मत आजमा रहे उम्मीदवारों के शपथपत्र को देखकर लगता है कि इस बार भाजपा, कांग्रेस और बसपा के आधे से ज्यादा उम्मीदवार करोड़पति हैं।
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मध्य प्रदेश इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने उम्मीदवारों की ओर से नामांकन फॉर्म दाखिल करते समय चुनाव आयोग को दिए गए शपथ पत्र के विश्लेषण के बाद यह जानकारी दी।
एडीआर से जुड़े राज्य के पूर्व आईपीएस अधिकारी अरुण गुर्टू कहते हैं, "राज्य में गंरीबी की रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले लोगों की संख्या 40 फीसदी के आसपास है जबकि विधानसभा चुनावों में करोडंपति उम्मीदवारों की तादाद 51 फीसदी है।''
एडीआर ने पूरे प्रदेश में विधानसभा का चुनाव लड़ रहे कुल 2,583 उम्मीदवारों में से तीन प्रमुख दल कांग्रेस, भाजपा और बसपा के 686 उम्मीदवारों में से 683 उम्मीदवारों के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया। विश्लेषण के परिणाम बेहद रोचक और चौंकाने वाले निकले हैं।

एडीआर और इलेक्शन वॉच के मुताबिकं फिर से चुनावी अखाड़े में उतरे मौजूदा आठ विधायकों की संपत्ति 1,000 फीसदी या इससे ज्यादा बढ़ गई है जबकि 16 निवर्तमान विधायकों की हैसियत में 500 फीसदी या इससे अधिक का इजाफा हुआ है और मौजूदा 113 प्रतिनिधियों की संपत्ति में 500 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।

'पैन नंबर तक नहीं'
गुर्टू कहते हैं, ''पिछले पांच सालों में इन दलों की प्रति उम्मीदवार औसत संपत्ति भी बढी है। भाजपा के 229 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 4.04 करोडं रुपए प्रति उम्मीदवार है जबकि कांग्रेस के 228 प्रत्याशियों में यह 5।33 करोडं रुपए प्रति उम्मीदवार पर बनती है। बसपा के 226 उम्मदवारों की औसत संपत्ति 76।62 करोडं रुपए है।''

फिर से चुनाव लडं रहे 141 विधायकों की संपत्ति में इन पांच सालों में औसतन 242 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई। पार्टियों के औसत के हिसाब से देखें तो एक ओर जहां भाजपा विधायकों की संपत्ति में 253 फीसदी वहीं कांग्रेस विधायकों की संपत्ति में 235 फीसदी और बसपा विधायकों की औसत संपत्ति में 270 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।

सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जैन कहते हैं, ''यह कम आश्चर्यजनक नहीं है कि 143 उम्मीदवारों ने शपथ पत्र में अपने पैन नंबर तक का उल्लेख नहीं किया है और कई उम्मीदवारों ने आयकर के ब्यौरे नहीं दिए हैं।''

सचिन सवालिया लहजे में कहते हैं, ''आखिर चुनाव आयोग शपथ पत्रों की जांच किस तरीके से कर रहा है।''

एडीआर और इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट कहती है कि मध्य प्रदेश में 2013 के विधानसभा चुनावों में तीन दलों के 683 उम्मीदवारों में से 350 यानी 51 फंीसदी करोडंपति हैं। इनमें भाजपा के 70 फीसदी, कांग्रेस के 66 फीसदी और बसपा के 18 फीसदी हैं।

साल 2008 में भाजपा के 35 फीसदी, कांग्रेस के 37 फीसदी और बसपा के 13 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति थे। यानी 2008 के मुकाबले करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या में 22 फीसदी का इजाफा हुआ है।

देनदारियां

एडीआर और इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के मुताबिकं राज्य में सबसे अधिक संपत्ति वाले तीन प्रत्याशी हैं। विजयराघवगढ से लडं रहे कांग्रेस के संजय पाठक, रतलाम शहर से भाजपा प्रत्याशी चेतन कश्यप और देपालपुरे क्षेत्र के कांग्रेस उम्मीदवार सत्यनारायण पटेल।

संजय पाठक की घोषित संपत्ति 121।32 करोडं रुपए, चेतन कश्यप की घोषित संपत्ति 120।29 करोडं रुपए और सत्यनारायण पटेल की घोषित संपत्ति 70।96 करोडं रुपए की है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि चुनावी अखाड़े में सब करोडंपति उम्मीदवार ही हैं। 28 प्रत्याशी ऐसे भी हैं जिनके पास 10 लाख रुपए से कम की संपत्ति है। बसपा के एक उम्मीदवार ने तो शून्य संपत्ति घोषित की है।

स्थानीय पत्रकार गिरीश उपाध्याय कहते हैं, ''उम्मीदवारों की देनदारियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। संजय पाठक ने सर्वाधिक 48।70 करोडं रुपए की देनदारियां घोषित की है जबकि भाजपा के सुरेन्द्र पटवा ने 34।49 करोडं रुपए की देनदारी घोषित की है।''

सामाजिक कार्यकर्ता राकेश दीवान कहते हैं, ''चुनाव आयोग को इन शपथ पत्रों की बारीकी से जांच करनी चाहिए। विश्लेषण के दौरान ऐसा अनुभव हुआ कि उम्मीदवारों की ओर से दाखिल किए गए शपथ पत्र को भरने में गंभीरता नहीं दिखाई गई या गलत जानकारियां दी गई हैं।''
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