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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   move to remove artfacts from Bhopal nawab's palace opposed

पटौदी खानदान में जायदाद बंटवारे को लेकर विवाद

Thu, 01 May 2014 02:05 PM IST
Updated Thu, 01 May 2014 02:05 PM IST
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move to remove artfacts from Bhopal nawab's palace opposed

26 अप्रैल को शर्मिला टैगोर भोपाल पहुंची थीं, 30 अप्रैल को उन्होंने भोपाल छोड़ दिया। यानि करीब पांच दिन वो भोपाल में रहीं। वो यहां नवाब पटौदी की जायदाद पर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए पहुंची थीं।

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इस बीच जबलपुर हाईकोर्ट ने विवाद के सुलझने तक संपत्तियों के बंटवारे पर रोक लगा दी है। हालांकि शर्मिला ने उस सामान को पैक कराकर एक फ्लैग स्टाफ हाउस के स्टोर में बंद कर दिया है जो उनके हिस्से में आया है।

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'जायदाद पर है भोपाल का हक'

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स्थानीय अखबारों में छपी खबरों के मुताबिक इसकी चाबियां वे अपने साथ ले गई हैं। वो इस सामान को अपने साथ दिल्ली ले जाना चाहती थीं लेकिन परिवार के कुछ सदस्य और इस स्थानीय संगठन इसके विरोध में था।

सहारा सामाजिक उत्थान समिति नाम की इस संस्था का कहना है कि फ्लैग स्टाफ हाउस में जो सामान रखा है वो बेशक पटौदी परिवार का है लेकिन इस पर भोपाल शहर का भी हक है।

जान से मारने की धमकी

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संस्था के मुतबिक जिस सामान का बंटवारा किया जा रहा है या बेचने की तैयारी की जा रही है इसमें से काफी सामान एंटीक है, बेहद पुराना है और दुर्लभ है। ऐसे में इस सामान को बेचा जाना ठीक नहीं होगा क्यों इस सामान पर तत्कालीन भोपाल की छाप है।

30 अप्रैल को संस्था के प्रमुख मेहराज खान मस्तान ने कोहेफिजा थाने में शिकायत दर्ज कराई कि कुछ लोगों ने उनको जान से मारने की धमकी दी है।

धमकी देने वालों ने कहा है कि अगर उन्होंने फ्लैग स्टाफ हाउस के बाहर प्रदर्शन किया तो उनको जान से मार दिया जाएगा। संस्था एंटीक सामानों को बेचे जाने के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली थी।
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हजार करोड़ से ज्यादा है कीमत

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खबर के मुताबिक परिवार में काफी विवाद है जिसके कारण मामला सुलझ नहीं पा रहा है हालांकि बातचीत जारी है और कोर्ट के बाहर ही निबटारा करने की कोशिशें की जा रही हैं।

माना जा रहा है कि संपत्ति की कीमत एक हजार करोड़ से ज्यादा है। पटौदी की बहनें और शर्मिला के बीच भी इस संपत्ति को लेकर विवाद है। कहा जाता है कि नवाब पटौदी मरने से पहले इस फ्लैग स्टाफ हाउस को बेचना चाहते थे।

उनके गुजरने के बाद उनकी बहनों ने शरियत के मुताबिक जायदाद पर 25-25 फीसदी मालिकाना हक जताया और कोर्ट की शरण ली। शर्मिला इस मामले को कोर्ट के बाहर ही निबटाना चाहती हैं लेकिन पटौदी की बहनें इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।

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