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Rewa Municipal Election: 24 साल से रीवा में भाजपा का मेयर, अब चुनौती कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता से उसे बचाने की
Tue, 19 Jul 2022 08:52 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Tue, 19 Jul 2022 08:52 PM IST
सार
रीवा में भाजपा के लिए राह आसान नहीं है। कांग्रेस ने इस बार जमीनी नेता को टिकट देकर भाजपा की 24 साल से कब्जे वाली मेयर सीट को कड़ी चुनौती दी है।
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प्रबोध व्यास और अजय मिश्रा में मुकाबला।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रीवा के महापौर पद पर 24 साल से भाजपा का कब्जा है। इस बार कांग्रेस ने जमीनी कार्यकर्ता को प्रत्याशी बनाकर भाजपा के सामने अच्छी चुनौती पेश की है। इस वजह से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर हर छोटे-बड़े नेता को रीवा में काफी मशक्कत करनी पड़ी है। मुख्यमंत्री तो चार दिन में दो बार रीवा पहुंचे और भाजपा प्रत्याशी के लिए वोट मांगे।
रीवा से कांग्रेस ने अजय मिश्रा बाबा को महापौर पद का उम्मीदवार बनाया है। मिश्रा लगातार तीन बार पार्षद रहे है। पहली बार वर्ष 1999 में वार्ड क्रमांक 17 से, दूसरी बार 2009 में वार्ड क्रमांक 19 और तीसरी बार वर्ष 2014 में वार्ड क्रमांक 17 से चुने गए थे। 2014 में तो अजय मिश्रा ने नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई थी। उन्हें जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर देखा जा रहा है।
अजय मिश्रा का मुकाबला भाजपा के प्रबोध व्यास से हैं, जिनके पास संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव है। भाजपा में छोटे से लेकर बड़े तक कई जिम्मेदारी निभा चुके प्रबोध भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। वे नगर अध्यक्ष से लेकर महामंत्री सहित संगठन के कई पदों पर रह चुके हैं। वे निर्विवाद चेहरा हैं। इसी वजह से मुख्यमंत्री से लेकर तमाम नेता उनके लिए सक्रिय हैं।
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भाजपा के प्रबोध व्यास के सामने अजय मिश्रा के साथ ही आम आदमी पार्टी के दीपक सिंह, बहुजन समाज पार्टी के जय प्रकाश, समाजवादी पार्टी के चिकित्सामणि गुप्ता से भी चुनौती है। यह भी कुछ पॉकेट्स में वोट काटकर परेशानी का सबब बन सकते हैं। कुल मिलाकर रीवा में महापौर के लिए 13 प्रत्याशी मैदान में हैं।
62.77% हुई थी वोटिंग
रीवा में 13 जुलाई को मतदान हुआ और रीवा नगर निगम चुनाव में कुल 62.07 फीसदी लोगों ने मतदान किया। रीवा में नौ नगर परिषदें भी हैं, जिनमें गोविंदगढ़, गुढ़, सिरमौर, बैकुंठपुर, त्योंथर, मनगवां, सेमरिया, चाकघाट व डभौरा नगर परिषद शामिल है। रीवा के महापौर पद के लिए 13 प्रत्याशी हैं। नगर निगम के अंतर्गत आने वाले 45 वार्डों में कुल 217 पार्षद उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इनके अलावा जिले की नौ नगर परिषदों में 15-15 वार्ड हैं। कुल 180 वार्डों में पार्षद पद के लिए 838 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
रीवा में महापौर पद का इतिहास
रीवा में 1995 में पहली बार नगर निगम के चुनाव हुए। तब पार्षदों ने कांग्रेस के अमीरुल्ला खान को पहला महापौर चुना। वे 1997 तक इस कुर्सी पर रहे। इसके बाद कांग्रेस की सावित्री पांडेय कुछ समय के लिए और फिर कमलजीत सिंह डंग शासन से मनोनीत महापौर रहे। 1998 में भाजपा के राजेंद्र ताम्रकार को पहली बार जनता ने सीधे महापौर चुना। उनके बाद 1999 में आशा सिंह, 2005 में वीरेंद्र गुप्ता, 2010 में शिवेंद्र सिंह पटेल और 2015 में ममता गुप्ता ने महापौर का चुनाव जीता। यानी 1998 से जनता महापौर चुन रही है और हर बार भाजपा का ही महापौर बना है।
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रीवा से कांग्रेस ने अजय मिश्रा बाबा को महापौर पद का उम्मीदवार बनाया है। मिश्रा लगातार तीन बार पार्षद रहे है। पहली बार वर्ष 1999 में वार्ड क्रमांक 17 से, दूसरी बार 2009 में वार्ड क्रमांक 19 और तीसरी बार वर्ष 2014 में वार्ड क्रमांक 17 से चुने गए थे। 2014 में तो अजय मिश्रा ने नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई थी। उन्हें जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर देखा जा रहा है।
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अजय मिश्रा का मुकाबला भाजपा के प्रबोध व्यास से हैं, जिनके पास संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव है। भाजपा में छोटे से लेकर बड़े तक कई जिम्मेदारी निभा चुके प्रबोध भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। वे नगर अध्यक्ष से लेकर महामंत्री सहित संगठन के कई पदों पर रह चुके हैं। वे निर्विवाद चेहरा हैं। इसी वजह से मुख्यमंत्री से लेकर तमाम नेता उनके लिए सक्रिय हैं।
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भाजपा के प्रबोध व्यास के सामने अजय मिश्रा के साथ ही आम आदमी पार्टी के दीपक सिंह, बहुजन समाज पार्टी के जय प्रकाश, समाजवादी पार्टी के चिकित्सामणि गुप्ता से भी चुनौती है। यह भी कुछ पॉकेट्स में वोट काटकर परेशानी का सबब बन सकते हैं। कुल मिलाकर रीवा में महापौर के लिए 13 प्रत्याशी मैदान में हैं।
62.77% हुई थी वोटिंग
रीवा में 13 जुलाई को मतदान हुआ और रीवा नगर निगम चुनाव में कुल 62.07 फीसदी लोगों ने मतदान किया। रीवा में नौ नगर परिषदें भी हैं, जिनमें गोविंदगढ़, गुढ़, सिरमौर, बैकुंठपुर, त्योंथर, मनगवां, सेमरिया, चाकघाट व डभौरा नगर परिषद शामिल है। रीवा के महापौर पद के लिए 13 प्रत्याशी हैं। नगर निगम के अंतर्गत आने वाले 45 वार्डों में कुल 217 पार्षद उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इनके अलावा जिले की नौ नगर परिषदों में 15-15 वार्ड हैं। कुल 180 वार्डों में पार्षद पद के लिए 838 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
रीवा में महापौर पद का इतिहास
रीवा में 1995 में पहली बार नगर निगम के चुनाव हुए। तब पार्षदों ने कांग्रेस के अमीरुल्ला खान को पहला महापौर चुना। वे 1997 तक इस कुर्सी पर रहे। इसके बाद कांग्रेस की सावित्री पांडेय कुछ समय के लिए और फिर कमलजीत सिंह डंग शासन से मनोनीत महापौर रहे। 1998 में भाजपा के राजेंद्र ताम्रकार को पहली बार जनता ने सीधे महापौर चुना। उनके बाद 1999 में आशा सिंह, 2005 में वीरेंद्र गुप्ता, 2010 में शिवेंद्र सिंह पटेल और 2015 में ममता गुप्ता ने महापौर का चुनाव जीता। यानी 1998 से जनता महापौर चुन रही है और हर बार भाजपा का ही महापौर बना है।
