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Mandsaur: फर्जी वसीयत मामले में फिर होगी जांच, खात्मा प्रतिवेदन स्वीकार करने का आधार न मिलने पर कोर्ट का आदेश

Mon, 15 Jan 2024 06:39 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, मंदसौर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, मंदसौर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 15 Jan 2024 06:39 PM IST
सार

मंदसौर के बहुचर्चित फर्जी वसीयत मामले में कोर्ट ने पुलिस के खात्मा प्रतिवेदन को अस्वीकार कर दिया है। कोर्ट ने बताया है कि खात्मा प्रतिवेदन स्वीकार करने का कोई आधार नजर नहीं आ रहा। कोर्ट ने पुलिस को मामले में और जांच करने का आदेश दिया है। 

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Mandsaur: Investigation will be done again in fake will case, court rejected the quashing report
मंदसौर फर्जी वसीयत मामले में चारों आरोपी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मंदसौर में एक विधवा महिला से कूटरचित दस्तावेज के जरिए जमीन छीनने के मामले में नया मोड़ आया है। पहले पुलिस ने आरोपियों पर केस दर्ज कर लिया था, पर दो साल तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। इसके बाद पुलिस की ओर से कोर्ट में खारिजी पेश की गई, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार करते हुए मामले की फिर से जांच करने के आदेश दिए हैं। 
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मामला विधवा महिला गीता देवी पालीवाल निवासी मंदसौर हाल मुकाम नीमच का है। इसकी बेशकीमती जमीन जो उसके पति की स्व अर्जित संपत्ति थी, उसे विधवा महिला के जेठ राजेंद्र प्रसाद और उसके पुत्र आरोपीगण विशाल पालीवाल, विकास पालीवाल एवं राहुल पालीवाल ने मिलकर फर्जी वसीयत के आधार पर अपने नाम करवा ली थी। महिला को जब इस बात की भनक लगी और उसने राजस्व कार्यालय के चक्कर काटे। आखिरकार महिला को पुलिस का सहारा लेना पड़ा। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुनील पांडे के निर्देश पर सिटी कोतवाली पुलिस ने आरोपी गण राजेंद्र प्रसाद पालीवाल उसके पुत्र विशाल पालीवाल, विकास पालीवाल और राहुल पालीवाल के खिलाफ दिनांक 21 जनवरी 2022 को मामला दर्ज किया था।
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हालांकि शिकायतकर्ता महिला की ओर से जांचकर्ता सत्येंद्र सिंह पर आरोपियों को बचाने के आरोप भी लगे। कहा गया कि महिला की मदद करने के बजाय आरोपियों की मदद की और उन्हें बचने के तरीके बताए। जिस वसीयत के आधार पर जमीन का नामांतरण हुआ था, उसकी यशोधर्मन नगर थाने में मूल प्रति गुम होने की एफआईआर दर्ज करवाई गई, ताकि आरोपियों के द्वारा जो फर्जी वसीयत पेश की गई थी वह ओरिजिनल पेश नहीं करना पड़े। एफआईआर दर्ज करने के बाद दो साल बीत गए, पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के कोई प्रयास नहीं किया। 
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Mandsaur: Investigation will be done again in fake will case, court rejected the quashing report
कोर्ट का आदेश - फोटो : सोशल मीडिया

खारिजी पर महिला की जताई आपत्ति 
पुलिस द्वारा न्यायालय में खारजी की कार्रवाई करने पर महिला ने आपत्ति दर्ज करवाई। विधवा महिला ने न्यायालय को बताया कि पुलिस की कार्रवाई से वह संतुष्ट नहीं है। पुलिस द्वारा खारजी की कार्रवाई पर उसे आपत्ति है, पुलिस द्वारा प्रस्तुत खारजी को स्वीकार न किया जाए, क्योंकि पुलिस ने असल वसीयत एवं बटवारा लेख जब्त नहीं किया है।

माननीय न्यायालय ने महिला की आपत्ति स्वीकार करते हुए पुलिस को निर्देशित किया कि अभियुक्त गण राजेंद्र प्रसाद पालीवाल उसके पुत्र विशाल पालीवाल, विकास पालीवाल और राहुल पालीवाल द्वारा उसके साथ आरक्षित केंद्र शहर कोतवाली के अपराध क्रमांक 45 /2022 अंतर्गत धारा 420, 467, 468 भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध कारित के संबंध में जो विवेचना हुई है वह विधिवत नहीं है। ऐसी स्थिति में खात्मा प्रतिवेदन स्वीकार किए जाने के कोई आधार नहीं है, बल्कि और विवेचना किए जाने की आवश्यकता है। न्यायालय ने अभिलेख पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर खात्मा प्रतिवेदन स्वीकार किए जाने के कोई आधार नहीं होने से युक्त खात्मा प्रतिवेदन अस्वीकार किया और पुलिस को निर्देश दिया कि केस डायरी वापस की जाती है कि प्रकरण में और विवेचना कर विधिवत कार्रवाई करें।
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